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पीएफ घोटाले में एक और बड़ा खुलासा, लखनऊ की भी दो फर्मों ने कराया था डीएचएफएल में निवेश
Fri, 22 Nov 2019 10:43 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 22 Nov 2019 10:43 AM IST
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पीएफ घोटाले में बृहस्पतिवार को चार और फर्मों के मालिकों को पूछताछ के लिए ईओडब्ल्यू के दफ्तर बुलाया गया। इन कंपनियों में दो कंपनियां लखनऊ की बताई जा रही हैं जिन्होंने डीएचएफएल में निवेश कराया था।
सूत्रों का कहना है कि जिन चार फर्मों के मालिकों से पूछताछ की गई है उसमें राहुल भसीन और अश्वनी भसीन शामिल हैं। कहा जा रहा है कि यह चार फर्में इन्हीं दोनों लोगों की हैं। जिसमें से दो का पता लखनऊ के महानगर का है जबकि दो अन्य का पता दिल्ली का है।
राहुल और अश्वनी दोनों ही दिल्ली में रहकर अपना कारोबार करते हैं। लेकिन ब्रोकर के रूप में डीएचएफएल में इकलौता निवेश इन फर्मों ने कराया था। सूत्रों का कहना है कि इन चार फर्मों के खातों में 2018 में लगभग पौने दो करोड़ रुपये आए थे। इन चार फर्मों में 40 लाख से 50 लाख रुपये तक की रकम इन फर्मों के खातों में एक बार में आई।
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फर्मों के सीए से भी हुई लंबी पूछताछ
सूत्रों का कहना है कि इन चारों फर्मों के चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) एक ही हैं। उक्त सीए से लगातार दूसरे दिन ईओडब्ल्यू के जांच अधिकारियों ने लंबी पूछताछ की। सूत्रों का कहना है कि सीए के ही कहने पर एक खाते से दूसरे खातों में पैसों को हस्तांतरित कराया गया। सूत्रों का यह भी कहना है कि इन फर्मों का पावर इंप्लाईज ट्रस्ट के पूर्व सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता के बेटे अभिनव गुप्ता से कनेक्शन फिलहाल सामने नहीं आया है।
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सूत्रों का कहना है कि जिन चार फर्मों के मालिकों से पूछताछ की गई है उसमें राहुल भसीन और अश्वनी भसीन शामिल हैं। कहा जा रहा है कि यह चार फर्में इन्हीं दोनों लोगों की हैं। जिसमें से दो का पता लखनऊ के महानगर का है जबकि दो अन्य का पता दिल्ली का है।
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राहुल और अश्वनी दोनों ही दिल्ली में रहकर अपना कारोबार करते हैं। लेकिन ब्रोकर के रूप में डीएचएफएल में इकलौता निवेश इन फर्मों ने कराया था। सूत्रों का कहना है कि इन चार फर्मों के खातों में 2018 में लगभग पौने दो करोड़ रुपये आए थे। इन चार फर्मों में 40 लाख से 50 लाख रुपये तक की रकम इन फर्मों के खातों में एक बार में आई।
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फर्मों के सीए से भी हुई लंबी पूछताछ
सूत्रों का कहना है कि इन चारों फर्मों के चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) एक ही हैं। उक्त सीए से लगातार दूसरे दिन ईओडब्ल्यू के जांच अधिकारियों ने लंबी पूछताछ की। सूत्रों का कहना है कि सीए के ही कहने पर एक खाते से दूसरे खातों में पैसों को हस्तांतरित कराया गया। सूत्रों का यह भी कहना है कि इन फर्मों का पावर इंप्लाईज ट्रस्ट के पूर्व सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता के बेटे अभिनव गुप्ता से कनेक्शन फिलहाल सामने नहीं आया है।
कहां गया कालाधन, लिंक तलाश रहे जांच अधिकारी
अभी तक की पूछताछ में कई अन्य कंपनियों के जरिए कालेधन को सफेद करने की बात भी सामने आई है। विभिन्न कंपनियों के खातों में एक नंबर में जो पैसे लिए गए उससे संबंधित कालाधन कहां गया? इसकी तलाश भी ईओडब्ल्यू के अधिकारी कर रहे हैं। इसके लिए विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है।