शिक्षक मूल्यांकन करें कि उनके पढ़ाए बच्चे क्यों भारत मां के हाथ पैर काटने को तत्पर हो रहे हैं: योगी
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विश्वविद्यालयों में अराजकता और भारत विरोधी नारों पर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक अपना मूल्यांकन करें कि उनके द्वारा पढ़ाए गए बच्चों में इस प्रकार की प्रवृत्ति क्यों पैदा हुई। सरकार के संसाधनों पर चलने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में जब भारत के विखंडन के नारे लगाए जाएंगे तो शिक्षकों के कार्यों पर प्रश्न चिह्न खड़ा होना लाजिमी है। शिक्षकों को आत्ममंथन करना होगा कि आखिर इस प्रकार की स्थिति क्यों पैदा हुई कि उनके द्वारा पढ़ाए गए बच्चे भारत माता के हाथ-पैर काटने को तत्पर हैं।
मुख्यमंत्री बुधवार को बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विवि में आयोजित नेशनल सीएसआर कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को आचार्य चाणक्य को अपना आदर्श मानते हुए समाज और आवश्यकता के अनुरूप खड़े होना पड़ेगा। यदि ऐसा नहीं कर सकते तो वे अपने पेशे, वर्तमान व भावी पीढ़ी के प्रति दोषी होंगे। यदि अपने पेशे के प्रति शिक्षकों में सम्मान का भाव नहीं है तो उसे तत्काल छोड़ दें, सरकार और समाज पर बोझ न बनें। शिक्षक केवल स्कूल जाने तक सीमित नहीं रहें, बल्कि वे सर्वज्ञ रहकर खुद भी चुनौतियों का मुकाबला करें और भावी पीढ़ी में भी वही भाव पैदा करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्च 2017 में उन्होंने सत्ता संभाली तब प्रदेश में बेसिक शिक्षा की स्थिति बहुत खराब थी। स्कूलों में प्रोक्सी टीचर्स पढ़ाते थे, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं नहीं थीं। तीन साल में सरकार के प्रयास से 92 हजार स्कूलों का कायाकल्प हुआ है। स्कूलों में अवस्थापना सुविधाओं के साथ स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी भी उपलब्ध कराई गई है। यदि कॉरपोरेट जगत इसमें सहयोग करे तो 31 मार्च तक सभी 1.58 लाख स्कूलों का कायाकल्प संभव हो सकता है।
तारीख पर तारीख मिलने से नहीं हुई शिक्षकों की कमी दूर
मुख्यमंत्री ने कहा कि 69500 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रकरण में उच्च न्यायालय में दो साल से डेट पर डेट नहीं पड़ती तो परिषदीय स्कूलों में मानक के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध हो जाते। उन्होंने उम्मीद जताई कि देर-सवेर फैसला आएगा और 69500 शिक्षक स्कूलों में अवश्य आएंगे।
प्रेरणा एप पर परफॉर्मेंस होगी राज्यपाल और राष्ट्रपति पुरस्कार का मानक
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रेरणा एप पर शिक्षकों की परफॉर्मेंस को राज्यपाल और राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार के मानकों में शामिल किया जाना चाहिए। पुरस्कार ऐसे शिक्षक को दिया जाए जिसे देखकर सभी शिक्षक गौरवान्वित महसूस करें। गत वर्षों में उन्होंने खुद ऐसे शिक्षकों के नाम पुरस्कार की सूची से काटे हैं जो कभी स्कूल नहीं जाते बल्कि दिनभर बीएसए या डीआईओएस दफ्तर में बैठते हैं।
जनगणना ड्यूटी से भागें नहीं
योगी ने कहा कि शिक्षकों को जब तक जमीनी स्थिति पता नहीं होगी वे बच्चों के साथ न्याय नहीं कर सकते हैं। जनगणना के जरिए जब शिक्षक घर-घर पहुंचेंगे तो उन्हें क्षेत्र की सामाजिक स्थिति का पता चलेगा। जनता के साथ संपर्क और संवाद के बाद शिक्षकों और जनता दोनों की एक-दूसरे के प्रति धारणा बदलेगी। इसलिए शिक्षक जनगणना ड्यूटी से भागें नहीं ।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को दिए तीन लक्ष्य
योगी ने बेसिक शिक्षा विभाग को अप्रैल 2021 तक के लिए तीन लक्ष्य दिए। इनमें परिषदीय स्कूलों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करना, शिक्षकों का रिफ्रेशर कोर्स लागू करना और पाठ्यक्रम का सरलीकरण शामिल हैं।
आंगनबाड़ी को बनाएं प्री-प्राइमरी स्कूल
मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी को प्री-प्राइमरी स्कूल बनाएं। स्कूलों में प्रवेश के लिए न्यूनतम पांच वर्ष की उम्र की बाध्यता को समाप्त करें। यदि पांच वर्ष से कम उम्र का बच्चा भी स्वस्थ है तो उसे स्कूल में प्रवेश दें। इससे स्कूल जाने के प्रति उसकी हिचक खुलेगी।
दस एकेडमिक रिसोर्स पर्सन सम्मानित
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले दस एकेडमिक रिसोर्स पर्सन को सम्मानित किया। इनमें बरेली के लक्ष्मीकांत शुक्ल, बहराइच के श्रवण कुमार मिश्रा, विजय कुमार सरोज, यादवेंद्र प्रताप, भानु प्रताप मिश्रा, कल्पना मिश्रा, अब्दुल मोमिन, चित्रकूट के संतोष कुमार साहू, बिजनौर के इरशाद आलम और हापुड़ के ललित कुमार शामिल हैं।
‘आधारशिला’, ‘ध्यानाकर्षण’ और ‘शिक्षण संग्रह’ का विमोचन
कार्यक्रम में शिक्षा को प्रासंगिक और व्यावहारिक बनाने के लिए तैयार की गई हस्तपुस्तिकाओं ‘आधारशिला’, ‘ध्यानाकर्षण’ और ‘शिक्षण संग्रह’ का विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदर्श शिक्षक बनाने के लिए ये मील का पत्थर साबित होंगी। कार्यक्रम में 350 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के कक्षा 9 से 12 तक उच्चीकरण की योजना का लोकार्पण भी किया गया। इस पर 788 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
109 संस्थाओं ने किए 114 करोड़ के एमओयू
कॉन्क्लेव में देश-विदेश की 109 कंपनियों और संस्थाओं ने 114 करोड़ रुपये के एमओयू किए। ये संस्थाएं स्कूलों की अवस्थापना सुविधा, डिजिटल क्लास रूम, स्मार्ट क्लास रूम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑनलाइन टीचर ट्रेनिंग और शिक्षकों को गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए कार्यक्रमों तथा वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स विकसित करने में सहयोग करेंगी।
बेसिक शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने बताया कि इनमें गूगल इंडिया, एचसीएल फाउंडेशन, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, मैरिको लिमिटेड, लीफोलोजी, माइक्रोसॉफ्ट, हैबलेट पैकर्ड इंटरप्राइजेज इंडिया, आई.केयर इंडिया, एचडीएफसी फाउंडेशन, आईसीआईसीआई फाउंडेशन, एक्सिस बैंक, श्री अरविंदो सोसाइटी, कनवेजीनियस एजुकेशन, इलाहाबाद बैंक, आई ड्रीम सोशल एडकेट फाउंडेशन, इलेट्स टेक्नोमीडिया शामिल हैं। गूगल इंडिया की मार्केटिंग हैड निकिता और बेसिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। गूगल इंडिया ने विद्यार्थियों की शैक्षिक क्षमता संवर्धन के लिए ‘बोलो’ एप निशुल्क दिया है।
शिक्षा के क्षेत्र में पूरी दुनिया की यूपी पर नजर : द्विवेदी
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। 1.58 लाख स्कूल, पौने छह लाख शिक्षक और 1.80 करोड़ बच्चों के साथ यह प्रदेश का बड़ा विभाग है। यहां शिक्षकों का सबसे बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘निष्ठा’ चलाया जा रहा है। स्कूली शिक्षा में सुधार की दृष्टि से पूरी दुनिया यूपी को आशा भरी नजर से देख रही है।
देश-विदेश की कंपनियां और संस्थाएं अपने सीएसआर फंड से परिषदीय स्कूलों के कायाकल्प के लिए करार कर रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में निवेश का कई गुना फायदा होगा। गत वर्ष लंदन में आयोजित कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों ने भी स्कूलों के उत्थान में सहयोग के लिए उत्साह दिखाया था।
तीन साल में खोले 371 नए इंटर कॉलेज : दिनेश शर्मा
उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि 15 साल में प्रदेश में केवल 48 नए इंटर कॉलेज खोले गए थे, जबकि योगी सरकार के तीन साल में 205 नए इंटर कॉलेज के साथ 166 दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज खोले गए हैं। पांच नए विश्वविद्यालय खोले गए हैं। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने बेसिक शिक्षा विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी।
एमएलसी अशोक धवन की प्रशंसा करते हुए कहा कि धवन ने खुद दो दिन पहले उनके दफ्तर में मुलाकात कर वाराणसी के परिषदीय स्कूलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए विधायक निधि के दो करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। इस अवसर पर विभाग के सचिव संजय गोयल, निदेशक सर्वेंद्र विक्रम, विशेष सचिव आनंद कुमार, आरवी सिंह मौजूद थे।