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Lucknow News: वीजा बनाने का झांसा देकर दो बांग्लादेशी एजेंटों से 5.50 लाख की ठगी
Thu, 04 Apr 2024 02:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 04 Apr 2024 02:10 AM IST
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लखनऊ। मेसिडोनिया का वीजा बनाने का झांसा देकर जालसाजों ने दो बांग्लादेशी एजेंटों से 5.50 लाख रुपये ठग लिए।
पांच लोगों का पासपोर्ट लेकर आरोपियों ने व्हाट्सएप पर जाली वीजा भेज दिया। पीड़ित एजेंटों ने पासपोर्ट और रुपये वापस मांगे तो आरोपियों ने आनाकानी की। पीड़ितों ने मंगलवार को नाका थाने में केस दर्ज कराया है।
बांग्लादेश के जिला नौखाली निवासी रोकोन जमा सोबुज वीजा पासपोर्ट बनवाने का अधिकृत एजेंट है। उनकी और साथी रोमान की मुलाकात नवंबर-2023 में नई दिल्ली के नजफगढ़ निवासी अमित कुमार गिरी और रायबरेली के अमरनगर निवासी फिरोज खान से हुई थी।
बातचीत के दौरान दोनों ने बताया था कि वह वीजा बनवाने का काम करते हैं। पीड़ित ने खर्च पूछा तो 1.10 लाख रुपये बताया। रोकोन और रोमान ने पांच लोगों के पासपोर्ट देते हुए मेसिडोनिया का वीजा बनाने की बात कही।
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आरोपियों ने 5.50 लाख रुपये मांगे तो पीड़ितों ने रकम उनके बताए खाते में भेज दी। कुछ दिन बाद अमित ने मोबाइल पर वीजा भेजा। जांचने पर रोकोन को पता चला कि वीजा फर्जी है।
डीसीपी मध्य रवीना त्यागी ने बताया कि दोनों पीड़ित एजेंट वैध वीजा पर भारत में आए हुए हैं। दोनों के साथ वीजा के नाम पर जालसाजों ने नाका इलाके में बातचीत की थी और फिर रुपये लेकर जाली वीजा थमा दिया।
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पांच लोगों का पासपोर्ट लेकर आरोपियों ने व्हाट्सएप पर जाली वीजा भेज दिया। पीड़ित एजेंटों ने पासपोर्ट और रुपये वापस मांगे तो आरोपियों ने आनाकानी की। पीड़ितों ने मंगलवार को नाका थाने में केस दर्ज कराया है।
बांग्लादेश के जिला नौखाली निवासी रोकोन जमा सोबुज वीजा पासपोर्ट बनवाने का अधिकृत एजेंट है। उनकी और साथी रोमान की मुलाकात नवंबर-2023 में नई दिल्ली के नजफगढ़ निवासी अमित कुमार गिरी और रायबरेली के अमरनगर निवासी फिरोज खान से हुई थी।
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बातचीत के दौरान दोनों ने बताया था कि वह वीजा बनवाने का काम करते हैं। पीड़ित ने खर्च पूछा तो 1.10 लाख रुपये बताया। रोकोन और रोमान ने पांच लोगों के पासपोर्ट देते हुए मेसिडोनिया का वीजा बनाने की बात कही।
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आरोपियों ने 5.50 लाख रुपये मांगे तो पीड़ितों ने रकम उनके बताए खाते में भेज दी। कुछ दिन बाद अमित ने मोबाइल पर वीजा भेजा। जांचने पर रोकोन को पता चला कि वीजा फर्जी है।
डीसीपी मध्य रवीना त्यागी ने बताया कि दोनों पीड़ित एजेंट वैध वीजा पर भारत में आए हुए हैं। दोनों के साथ वीजा के नाम पर जालसाजों ने नाका इलाके में बातचीत की थी और फिर रुपये लेकर जाली वीजा थमा दिया।