{"_id":"615b671a8ebc3e289d2ec68c","slug":"treatment-of-dental-problem-in-kids-is-easy-now-lucknow-news-lko5986553107","type":"story","status":"publish","title_hn":"केजीएमयू में अब चंचल बच्चों के दांतों का भी आसानी से हो सकेगा इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केजीएमयू में अब चंचल बच्चों के दांतों का भी आसानी से हो सकेगा इलाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। केजीएमयू के पीडियाट्रिक एंड प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री विभाग में उछल-कूद मचाने वाले और इलाज के दौरान घबराने वाले बच्चों का इलाज आसानी से हो सकेगा। इलाज के दौरान वे न सिर्फ सहयोग करेंगे बल्कि शांत बैठे रहेंगे। ऐसा संभव होगा विभाग में शुरू हुई नाइट्रस ऑक्साइड सीडेशन सुविधा के माध्यम से। विभाग में सोमवार को इस सुविधा का शुभारंभ किया गया।
विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार सिंह के अनुसार बड़ों के मुकाबले बच्चों का इलाज करना काफी मुश्किल काम होता है। दांत के मामले में यह मुश्किल और बढ़ जाती है। इलाज के दौरान विशेषकर छोटे बच्चे या तो घबराहट में होते हैं या फिर उछल-कूद मचाते हैं। ऐसी स्थिति में उनका इलाज करना मुश्किल होता है। इसके लिए विभाग में नाइट्रस ऑक्साइड सीडेशन यूनिट लगाई गई है। इस यूनिट में ऑक्सीजन और नाइट्रस ऑक्साइड होता है। इसके प्रभाव की वजह से बच्चा शांत होकर बैठ जाता है। इससे इलाज करने में आसानी होगी। यह यूनिट करीब 10 लाख रुपये की है। इसकी विशेषता यह है कि इसे दूसरी जगह ले जाना आसान होगा। इस यूनिट की वजह से हर बच्चे के दांत की जांच और इलाज में लगने वाला समय आधा हो जाएगा। इस मौके पर दंत संकाय के डीन प्रो. आरके सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार चक, डॉ. अफरोज आलम अंसारी, डॉ. रिचा खन्ना, डॉ. शादाब मोहम्मद, डॉ. प्रदीप टंडन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार सिंह के अनुसार बड़ों के मुकाबले बच्चों का इलाज करना काफी मुश्किल काम होता है। दांत के मामले में यह मुश्किल और बढ़ जाती है। इलाज के दौरान विशेषकर छोटे बच्चे या तो घबराहट में होते हैं या फिर उछल-कूद मचाते हैं। ऐसी स्थिति में उनका इलाज करना मुश्किल होता है। इसके लिए विभाग में नाइट्रस ऑक्साइड सीडेशन यूनिट लगाई गई है। इस यूनिट में ऑक्सीजन और नाइट्रस ऑक्साइड होता है। इसके प्रभाव की वजह से बच्चा शांत होकर बैठ जाता है। इससे इलाज करने में आसानी होगी। यह यूनिट करीब 10 लाख रुपये की है। इसकी विशेषता यह है कि इसे दूसरी जगह ले जाना आसान होगा। इस यूनिट की वजह से हर बच्चे के दांत की जांच और इलाज में लगने वाला समय आधा हो जाएगा। इस मौके पर दंत संकाय के डीन प्रो. आरके सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार चक, डॉ. अफरोज आलम अंसारी, डॉ. रिचा खन्ना, डॉ. शादाब मोहम्मद, डॉ. प्रदीप टंडन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन