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डौंडियाखेड़ा में नहीं, हुलासखेड़ा में है खजाना!
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sat, 23 Nov 2013 10:51 AM IST
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उन्नाव के डौंडियाखेड़ा से शुरू हुआ अंधविश्वास का सिलसिला लखनऊ भी पहुंच गया है।
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एक बाबा ने दावा किया है कि लखनऊ की ऐतिहासिक महत्व की करेला झील के किनारे बसे हुलासखेड़ा में भी खजाना दबा हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह खजाना एक राजा का है। हालांकि, आठ साल तक चली खुदाई के बाद भी इसे निकाला नहीं जा सका था।
हुलासखेड़ा के संरक्षण के लिए काम कर रही संस्था कारवां के संयोजक विक्रांत नाथ ने बताया कि 1979 में सबसे पहले इस साइट के बारे में पता चला। राज्य पुरातत्व विभाग ने यहां उत्खनन कार्य कराने की ठानी।
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इसमें सबसे पहले आड़े आई खजाने के दबे होने की बात। यह खजाना किस राजा का था, इसकी जानकारी वहां किसी को नहीं है।
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वहां खुदाई नहीं होने देने का विरोध भी किया गया। लोगों में मान्यता है कि इस खजाने की रक्षा वहां ‘नागराज‘ खुद कर रहे हैं। विक्रांत नाथ के मुताबिक, पुरातत्व विभाग ने करीब आठ साल तक वहां खुदाई की।
अब भी पुरातत्व विभाग कुषाण काल, गुप्त काल और दूसरी सभ्यताओं की तलाश वहां कर रहा है। लेकिन, वहां खजाना नहीं मिल पाया।
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