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हाईकोर्ट का कड़ा रुख, नेताओं की पसंद-नापसंद पर तबादले ठीक नहीं

Sun, 25 Sep 2016 02:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 25 Sep 2016 02:43 AM IST
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transfer should not be according to will of political leaders says court.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने विधायकों की सिफारिश पर सहायक कमिश्नर स्टांप गोरखपुर का लखनऊ किया गया तबादला रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि सियासी दखल से किए गए तबादले कानून की नजर में नहीं टिक सकते।

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नेताओं की पसंद-नापसंद पर सरकारी सेवक का तबादला नहीं होना चाहिए। इस तबादले के लिए गाजीपुर के जंगीपुर सीट से विधायक किस्मतिया देवी और जखनिया से विधायक सुब्बा राम ने सिफारिश की थी।
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जस्टिस सत्येंद्र सिंह चौहान और जस्टिस उमेशचंद्र श्रीवास्तव ने यह आदेश सहायक कमिश्नर स्टांप राम शंकर सिंह की याचिका पर दिया। याचिका में राम शंकर सिंह ने कहा था कि इस साल 10 अगस्त को उन्हें गोरखपुर से लखनऊ इसलिए ट्रांसफर कर दिया गया क्योंकि दोनों विधायकों ने उनकी जगह गोरखपुर लाए गए अफसर के पक्ष में पत्र लिखा था।
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अदालत ने कहा कि ट्रांसफर आदेश और विधायकों के खतों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि यह आदेश राजनीतिक प्रभाव के चलते किया गया।

'ट्रांसफर प्रशासनिक जरूरतों के लिए हैं राजनीतिक सनक के लिए नहीं'

transfer should not be according to will of political leaders says court.

हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी का भी हवाला दिया जिसमें सर्वोच्च अदालत ने कहा था- ट्रांसफर प्रशासनिक जरूरतों के लिए है न कि राजनीतिज्ञों या मंत्रियों की सनक के लिए। राजनीतिक प्रभाव के कारण किए गए ट्रांसफर कानून की निगाह में टिक नहीं सकते।

विधायक तो संबंधित क्षेत्र के भी नहीं
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि विधायक किस्मतिया देवी और सुब्बा राम दोनों ही गाजीपुर से हैं। जबकि ट्रांसफर गोरखपुर और लखनऊ के बीच हुए हैं, यहां दोनों विधायकों की विधानसभा सीटें भी नहीं हैं। ऐसे में इन तबादलों को कानून की नजर में कहीं से सही नहीं कहा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा... ‘सरकार का निर्णय विधायकों के पत्र पर’
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को दोहराते हुए कहा कि यह कानूनी व्यवस्था है जिसमें सरकारी सेवक राजनीतिज्ञों की इच्छा या पसंद-नापसंद के आधार पर ट्रांसफर नहीं किए जा सकते।

सरकार को ट्रांसफर का निर्णय इसलिए लेना पड़ा क्योंकि दो विधायकों ने इसके लिए पत्र लिखा था। हाईकोर्ट इस निर्णय से सहमत नहीं है। ऐसे में 10 अगस्त 2016 को दिए गए ट्रांसफर आदेश निरस्त किए जाते हैं। रामशंकर सिंह गोरखपुर कैंप में ही अपना काम जारी रखेंगे।

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