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Lucknow News: लाइब्रेरी फिर हों जीवंत, तभी बढ़ेगी अध्ययन की संस्कृति
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कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया पुस्तक का विमोचन। - संवाद
लखनऊ। समाज में पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लाइब्रेरियों को फिर से जीवंत करने की जरूरत है। नई पीढ़ी को गूगल और चैटजीपीटी के साथ अपनी संस्कृति और विरासत से भी जोड़ा जाना चाहिए। यह बात उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मंगलवार को हजरतगंज स्थित अर्बन क्लब में आयोजित महफिल-ए-टिकैत राय कार्यक्रम में कही।
उन्होंने लखनऊ और उसकी विरासत पर चर्चा करते हुए अपने पुराने दिनों को भी याद किया। कार्यक्रम के संयोजक नवल कांत सिन्हा ने कहा कि किसी शहर की पहचान केवल उसकी इमारतों से नहीं होती, बल्कि वहां के लोगों, संस्कृति और इतिहास से भी होती है। उन्होंने रूमी दरवाजे का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी ऐतिहासिक इमारत के पीछे छिपी कहानी उसकी खूबसूरती व महत्व को और बढ़ा देती है।
कार्यक्रम में लेखक संदीप के पांडेय की पुस्तक नेपाल चैप्टर का विमोचन किया गया। पुस्तक में भारत की दृष्टि से नेपाल के अपराध-भूगोल, खुफिया एजेंसियों और अंडरवर्ल्ड के बीच के द्वंद्व को केंद्र में रखा गया है। वहीं, ‘चकल्लस ए चायनीज’ सत्र में राघव प्रकाश ने लखनऊ में बढ़ते चाइनीज खान-पान के चलन और हाईजीन पर चर्चा की।
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गजल से सजी महफिल
अंतिम सत्र में बेगम अख्तर की जयंती की पूर्व संध्या पर गजल समारोह हुआ। अथर्व इशित ने बेगम अख्तर के जीवन, संघर्ष और संगीत जगत में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने शायर मजाज और लखनऊ के इतिहासकार योगेश प्रवीन का भी जिक्र किया और बताया कि लखनऊ से जुड़ी इन तीनों महान विभूतियों का जन्म अक्तूबर में हुआ था। इसके बाद मिथिलेश लखनवी और अंजली पटेल ने गजलों की प्रस्तुति से महफिल को यादगार बना दिया। इस मौके पर राय रवि बली, डिंपल त्रिवेदी, मनीष मिश्रा, सुनीता ऐरण, राज स्मृति, उमाशंकर दुबे, मुकेश बहादुर सिंह, आदेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने लखनऊ और उसकी विरासत पर चर्चा करते हुए अपने पुराने दिनों को भी याद किया। कार्यक्रम के संयोजक नवल कांत सिन्हा ने कहा कि किसी शहर की पहचान केवल उसकी इमारतों से नहीं होती, बल्कि वहां के लोगों, संस्कृति और इतिहास से भी होती है। उन्होंने रूमी दरवाजे का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी ऐतिहासिक इमारत के पीछे छिपी कहानी उसकी खूबसूरती व महत्व को और बढ़ा देती है।
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कार्यक्रम में लेखक संदीप के पांडेय की पुस्तक नेपाल चैप्टर का विमोचन किया गया। पुस्तक में भारत की दृष्टि से नेपाल के अपराध-भूगोल, खुफिया एजेंसियों और अंडरवर्ल्ड के बीच के द्वंद्व को केंद्र में रखा गया है। वहीं, ‘चकल्लस ए चायनीज’ सत्र में राघव प्रकाश ने लखनऊ में बढ़ते चाइनीज खान-पान के चलन और हाईजीन पर चर्चा की।
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गजल से सजी महफिल
अंतिम सत्र में बेगम अख्तर की जयंती की पूर्व संध्या पर गजल समारोह हुआ। अथर्व इशित ने बेगम अख्तर के जीवन, संघर्ष और संगीत जगत में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने शायर मजाज और लखनऊ के इतिहासकार योगेश प्रवीन का भी जिक्र किया और बताया कि लखनऊ से जुड़ी इन तीनों महान विभूतियों का जन्म अक्तूबर में हुआ था। इसके बाद मिथिलेश लखनवी और अंजली पटेल ने गजलों की प्रस्तुति से महफिल को यादगार बना दिया। इस मौके पर राय रवि बली, डिंपल त्रिवेदी, मनीष मिश्रा, सुनीता ऐरण, राज स्मृति, उमाशंकर दुबे, मुकेश बहादुर सिंह, आदेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।