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पकड़े गए शक्तिवर्द्घक दवाओं के लिए ले जाए जा रहे कछुए

Thu, 02 Jul 2015 07:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच Updated Thu, 02 Jul 2015 07:27 PM IST
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tortoise traffickers arrested in bahraich

सरयू और घाघरा नदी से 24 कछुओं का शिकार कर उन्हें बांग्लादेश ले जा रहा तस्कर गुरुवार को पुलिस के हाथ चढ़ गया। मलूकपुर गांव के पास पुलिस और वन विभाग की टीम ने घेराबंदी कर ये सफलता पाई। पकड़े गए तस्कर से कुछ और सुराग वन विभाग के हाथ लगे हैं।

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अन्य तस्करों का भी पता चला है, उनकी तलाश शुरू कर दी गई है। मामले में केस दर्ज कर पुलिस और वन विभाग ने तफ्तीश शुरू कर दी है।
जिले की सरयू और घाघरा नदी में कछुओं की 36 दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं।

तस्करों को इन कछुओं का पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में मुंहमांगा मूल्य मिलता है। इसी कारण कछुए शिकारियों और तस्करों के निशाने पर हैं। पुलिस ने बताया कि तस्कर साहिल पुत्र मुश्ताक निवासी चंपापुर गंगाघाट उन्नाव, बहराइच में पांच दिन से डेरा जमाए हुए था।
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उसने घाघरा और सरयू नदी के तटवर्ती गांव में रह रहे मछुआरों की मदद से दुर्लभ प्रजाति के 24 कछुओं का शिकार करवाया। इन कछुओं को फखरपुर थाना क्षेत्र के मलूकपुर गांव में इकट्ठा किया गया। वहां से गुरुवार दोपहर कछुओं की खेप को पिकप से उन्नाव ले जाया जाना था। इसकी भनक वन विभाग को लग गई।
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डीएफओ अखिलेश पांडेय के निर्देश पर वन दरोगा जहीरुद्दीन ने टीम के साथ मलूकपुर गांव में घेराबंदी कर 24 कछुए बरामद किए। साहिल को भी दबोच लिया गया। डीएफओ ने बताया कि बरामद कछुओं को कब्जे में लेकर तस्कर साहिल के खिलाफ जलीय जीव संरक्षण अधिनियम के तहत फखरपुर थाने में केस दर्ज करवाया गया है।

बताया क्यों ले जा रहे थे कछुए

tortoise traffickers arrested in bahraich

डीएफओ ने कहा कि पूछताछ के दौरान साहिल ने स्वीकार किया है कि वह कछुओं की खेप लखनऊ, उन्नाव, कानपुर और दिल्ली होते हुए पश्चिम बंगाल ले जाता। वहां से यह कछुए बांग्लादेश भेजे जाने थे। उन्होंने कहा कि पकड़े गए तस्कर से पूछताछ में कुछ तस्करों और शिकारियों के नाम का खुलासा हुआ है। उन्हें चिह्नित कर दबिश की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पकड़े गए तस्कर साहिल ने बताया कि कछुओं के मांस से शक्तिवर्धक दवाइयां बनाई जाती हैं, जबकि उसकी चिप्स बुलेटप्रूफ जैकेट व सौंदर्य प्रसाधन की सामग्री बनाने के काम आती हैं। एक कछुए की कीमत 30 से 35 हजार तक मिलती है। कीमत का निर्धारण कछुए की आयु पर होता है।

तस्कर ने बताया कि जो कछुए काफी पुराने होते हैं और पांच-पांच नाखून के होते हैं, उन कछुओं की डिमांड अधिक होती है। मनमाफिक मूल्य मिलता है। तंत्र-मंत्र में इन कछुओं का प्रयोग अधिक किया जाता है।

तराई में पहले भी कछुओं का शिकार हो चुका है। बहराइच व आसपड़ोस के जिलों से शिकार किए गए 600 कछुओं की खेप बीते माह मुंबई में पकड़ी गई थी, जिसे टर्टल सरवाइवल एलायंस और वन विभाग की टीम ने छुड़ाया था। इसके पूर्व हुजूरपुर, गायघाट और कोतवाली नगर और कोतवाली देहात क्षेत्र में भी भारी संख्या में कछुओं की बरामदगी हो चुकी है।

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