UP: हिरनों की कमी से जंगलों से आबादी में पहुंच रहे बाघ व तेंदुए, '...हिंसक व शाकाहारी जानवरों का संतुलन जरूरी'
यूपी के जंगलों में हिरनों की कमी से बाघ और तेंदुए बाहर निकल रहे हैं। पूर्व वन विभागाध्यक्ष ने कहा कि जंगल में हिंसक व शाकाहारी जानवरों का संतुलन जरूरी है।
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यूपी के पूर्व वन विभागाध्यक्ष आरएस भदौरिया का कहना है कि जंगलों के अंदर हिरन प्रजाति व सुअरों की संख्या कम होने से बाघ और तेंदुए बाहर निकल रहे हैं। इनके हमले रोकने के लिए जंगल में हिंसक व शाकाहारी जानवरों का संतुलन होना जरूरी है। इसके लिए वन विभाग को सर्वे करके समुचित कदम उठाने होंगे।
इन दिनों बरेली के हाफिजगंज क्षेत्र में तेंदुआ बमचक मचा रहा है। इससे पहले बहराइच, पीलीभीत और शाहजहांपुर में तेंदुए और बाघ कई लोगों की जान ले चुके हैं। पिछले साल इनके हमले में 60 लोग मारे गए थे। भदौरिया कहते हैं कि ऐसी स्थिति वनों के अंदर इन हिंसक जानवरों के खाने ( प्रे बेस यानी हिरन प्रजाति व सुअर आदि ) की कमी के कारण होती है।
उनका कहना है कि यूपी में कतर्नियाघाट से बिजनौर वन क्षेत्र तक हिंसक जानवरों (प्रेडेटर) की तुलना में शाकाहारी जानवर (प्रे-बेस) बहुत कम हो गए हैं। यही वजह है कि हिंसक जानवर अपनी भूख मिटाने के लिए वनों से बाहर निकल रहे हैं। हिंसक जानवरों का वनों से बाहर निकलकर भोजन तलाशना वनों की वहन क्षमता से उनकी आबादी अधिक होने का अकाट्य प्रमाण है। इस समस्या का समाधान वन विभाग की मुख्य जिम्मेदारी है।
शाकाहारी जानवरों की आबादी घट गई
आरएस भदौरिया का कहना है कि 50 वर्षों से वनों में आखेट पर पाबंदी है। बाघ व तेंदुओं की चार पीढ़ियां सुरक्षित रहने से इनकी आबादी कई गुना बढ़ गई है। वहीं, जंगलों से शाकाहारी जानवरों के लिए चारे के रूप में उगने वाली नई मुलायम घास गायब हो गई है। इससे शाकाहारी जानवरों की आबादी घट गई है।