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मारपीट करने वाले लखनऊ यूनिवर्सिटी के तीन छात्र निष्कासित, तीन का दाखिला रोका गया

Mon, 25 Mar 2019 04:17 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 25 Mar 2019 04:17 PM IST
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three students of lucknow university expelled
- फोटो : डेमो

लखनऊ विश्वविद्यालय ने कर्मचारी के घर मारपीट के आरोप में छह छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इनमें से तीन छात्रों को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है, जबकि बाकी तीन छात्रों से शपथ पत्र लेकर पाठ्यक्रम पूरा करने की अनुमति दी है, लेकिन इसके बाद इन छात्रों को विवि या महाविद्यालय के किसी पाठ्यक्रम में आगे दाखिला नहीं दिया जाएगा।

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ये सभी विद्यार्थी एलएलबी के छात्र हैं। कुलसचिव कार्यालय की ओर से जारी आदेश में अखंड प्रताप सिंह, आलोक कुमार, अविनाश तिवारी, परम वीर वर्मा, गौरव दुबे और रत्नेश सिंह के नाम शामिल हैं। आदेश में कहा गया है कि अन्य सभी छह छात्रों ने अपने साथियों के नवीन परिसर स्थित कुलसचिव कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक बृजनंदनधर दुबे के आवास पर पांच फरवरी को दरवाजा क्षतिग्रस्त किया, महिलाओं से अभद्रता की, जान से मारने की धमकी दी, नौकरी न करने देने की धमकी दी।

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इसके बाद छह फरवरी को प्रॉक्टर कार्यालय की ओर से सभी छह छात्रों को निलंबित करके तीन दिनों में जवाब देने को कहा गया। अविनाश तिवारी, अखंड प्रताप सिंह, आलोक कुमार, परमवीर वर्मा, गौरव दुबे और रत्नेश सिंह ने स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया।

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जांच समिति इनके जवाब से संतुष्ट नहीं थी। इसलिए आपराधिक और हिंसक वारदात के आरोप में अखंड प्रताप सिंह, आलोक कुमार और अविनाश तिवारी को तत्काल रूप से बर्खास्त कर दिया गया। इनको पाठ्यक्रम पूरा करने की इजाजत भी नहीं दी गई है।

दो साल में 24 से ज्यादा निष्कासन

 परमवीर वर्मा, गौरव दुबे और रत्नेश सिंह को शपथ पत्र लेकर पाठ्यक्रम पूरा करने की इजाजत दी गई है, लेकिन इसके बाद वे आगे विवि या सहयुक्त महाविद्यालय में दाखिला नहीं ले सकेंगे। आगे किसी घटना में शामिल होने पर इनका निष्कासन भी कर दिया जाएगा।

लविवि में पिछले दो साल में विभिन्न घटनाओं में लिप्त 24 से ज्यादा छात्रों का निष्कासन किया जा चुका है। लविवि कुलपति प्रो. एसपी सिंह के अनुसार अनुशासनहीनता किसी रूप से बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विवि में विद्यार्थियों की जरूरत है, अपराधियों की नहीं।
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