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Lucknow News: पीएनजी के एलपीजी मुक्त लखनऊ की राह में रोड़े हजार
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। एलपीजी की बढ़ती किल्लत के बीच ग्रीन गैस लिमिटेड ने लखनऊ को एलपीजी मुक्त करने का फैसला लिया है, लेकिन इस राह में रोड़े हजार हैं। पुराने लखनऊ की तंग गलियों से लेकर मैनपावर और समय की कमी समेत अन्य व्यवस्थाएं रोड़े अटका रही हैं। कंपनी ने हर दिन 1,200 कनेक्शन करने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन हर दिन 100-125 कनेक्शन ही हो पा रहे हैं।
लखनऊ में इंदिरानगर, गोमतीनगर, विकासनगर, जानकीपुरम और शहीद पथ की ओर ओमैक्स आरवन तक पाइपलाइन पहुंच चुकी है। वहीं, लखनऊ के पांच औद्योगिक क्षेत्रों में सिर्फ दो क्षेत्रों अमौसी (आंशिक) व सरोजनीनगर में ही पाइपलाइन है। चिनहट स्थित अशोक लीलैंड के प्लांट को भी जोड़ा जा रहा है, लेकिन अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में पाइपलाइन ही अभी नहीं पहुंची है।
उधर, पुराने लखनऊ में लोगों के घरों में ही दुकानें हैं, जिससे अमीनाबाद, चौक, गणेशगंज आदि जगहों पर खोदाई करना बाजार की सेहत को नुकसान पहुंचाना है। इसके अलावा मैनपावर, फंड व अन्य तकनीकी सपोर्ट भी बड़ी समस्या है। सालों से चल रही सुस्त रफ्तार के कारण पीक टाइम में एलपीजी मुक्त लखनऊ की कल्पना फिलहाल दूर की कौड़ी नजर आ रही है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि भले ही समय लगेगा, लेकिन लक्ष्य को प्राप्त किया जाएगा।
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15-20 कनेक्शन से हर दिन 100-125 कनेक्शन
ग्रीन गैस लिमिटेड के एजीएम प्रवीण सिंह ने बताया कि पश्चिम एशिया तनाव से पहले हर रोज सामान्य तौर पर जहां 15-20 पीएनजी कनेक्शन होते थे, पिछले महीने यह बढ़कर 70-75 कनेक्शन रोजाना हो गई थी। तेज रफ्तार में काम के लिए कंपनी ने रोजगार मेले के जरिये कामगारों की नियुक्ति भी की, लेकिन कनेक्शनों की संख्या रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। इस वक्त हर दिन कनेक्शन का औसत 100-125 कनेक्शन ही हो पाया है।
तीन महीने में 5500 से ज्यादा हुए कनेक्शन
प्रवीण सिंह ने बताया कि पिछले तीन महीने में 5,500 से ज्यादा घरेलू कनेक्शन हो चुके हैं। 13 कनेक्शन औद्योगिक निकायों के किए गए हैं। हर दिन कनेक्शनों की संख्या बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
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लखनऊ में इंदिरानगर, गोमतीनगर, विकासनगर, जानकीपुरम और शहीद पथ की ओर ओमैक्स आरवन तक पाइपलाइन पहुंच चुकी है। वहीं, लखनऊ के पांच औद्योगिक क्षेत्रों में सिर्फ दो क्षेत्रों अमौसी (आंशिक) व सरोजनीनगर में ही पाइपलाइन है। चिनहट स्थित अशोक लीलैंड के प्लांट को भी जोड़ा जा रहा है, लेकिन अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में पाइपलाइन ही अभी नहीं पहुंची है।
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उधर, पुराने लखनऊ में लोगों के घरों में ही दुकानें हैं, जिससे अमीनाबाद, चौक, गणेशगंज आदि जगहों पर खोदाई करना बाजार की सेहत को नुकसान पहुंचाना है। इसके अलावा मैनपावर, फंड व अन्य तकनीकी सपोर्ट भी बड़ी समस्या है। सालों से चल रही सुस्त रफ्तार के कारण पीक टाइम में एलपीजी मुक्त लखनऊ की कल्पना फिलहाल दूर की कौड़ी नजर आ रही है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि भले ही समय लगेगा, लेकिन लक्ष्य को प्राप्त किया जाएगा।
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15-20 कनेक्शन से हर दिन 100-125 कनेक्शन
ग्रीन गैस लिमिटेड के एजीएम प्रवीण सिंह ने बताया कि पश्चिम एशिया तनाव से पहले हर रोज सामान्य तौर पर जहां 15-20 पीएनजी कनेक्शन होते थे, पिछले महीने यह बढ़कर 70-75 कनेक्शन रोजाना हो गई थी। तेज रफ्तार में काम के लिए कंपनी ने रोजगार मेले के जरिये कामगारों की नियुक्ति भी की, लेकिन कनेक्शनों की संख्या रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। इस वक्त हर दिन कनेक्शन का औसत 100-125 कनेक्शन ही हो पाया है।
तीन महीने में 5500 से ज्यादा हुए कनेक्शन
प्रवीण सिंह ने बताया कि पिछले तीन महीने में 5,500 से ज्यादा घरेलू कनेक्शन हो चुके हैं। 13 कनेक्शन औद्योगिक निकायों के किए गए हैं। हर दिन कनेक्शनों की संख्या बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।