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Lucknow News: दीन की शिक्षा समझकर लोगों तक पहुंचाने वालों को मिलती है कामयाबी
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लखनऊ। बज्म-ए-ख्वातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज सिदरत ने कहा कि दीन की शिक्षा समझना और उसे लोगों तक पहुंचाने वालों को कामयाबी हासिल होती है। वह शनिवार को खत्म-ए-बुखारी शरीफ की महफिल को खिताब कर रही थीं।
चौक फिरंगी महल स्थित मदरसा हयातुल उलूम निजामिया में आयोजित महफिल में बेगम शहनाज सिदरत ने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने हमेशा खत्म-ए-बुखारी को बड़ी अहमियत दी है। बज्म ए ख्वातीन का मकसद महिलाओं में दीन का शौक पैदा करना और उनकी छुपी हुई खूबियों को बाहर लाना है। मदरसे की प्रबंधक अनवर जहां ने कहा कि खत्म-ए-बुखारी के पहले हिस्से में अल्लाह की इबादत और मोहब्बत-ए-इलाही का बयान है, जबकि दूसरे हिस्से में अजमत-ए-इलाही की तरफ इशारा किया गया है। जब बंदे के अंदर अल्लाह से मोहब्बत कैफियतें पैदा होती हैं तो उसकी ये खूबी अल्लाह को सबसे ज्यादा पसंद है। इस मौके पर मदरसे से शिक्षा पूरी करने वाली आलिमा अफरीन सिद्दीकी, आलिमा मैमूना बेगम, आलिमा जैनब कियास, आलिमा इकरा सिद्दीकी को आलिमियत का प्रमाण पत्र दिया गया। अर्शिया बानो और रिजवाना खान ने नातिया कलाम पेश किए।
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चौक फिरंगी महल स्थित मदरसा हयातुल उलूम निजामिया में आयोजित महफिल में बेगम शहनाज सिदरत ने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने हमेशा खत्म-ए-बुखारी को बड़ी अहमियत दी है। बज्म ए ख्वातीन का मकसद महिलाओं में दीन का शौक पैदा करना और उनकी छुपी हुई खूबियों को बाहर लाना है। मदरसे की प्रबंधक अनवर जहां ने कहा कि खत्म-ए-बुखारी के पहले हिस्से में अल्लाह की इबादत और मोहब्बत-ए-इलाही का बयान है, जबकि दूसरे हिस्से में अजमत-ए-इलाही की तरफ इशारा किया गया है। जब बंदे के अंदर अल्लाह से मोहब्बत कैफियतें पैदा होती हैं तो उसकी ये खूबी अल्लाह को सबसे ज्यादा पसंद है। इस मौके पर मदरसे से शिक्षा पूरी करने वाली आलिमा अफरीन सिद्दीकी, आलिमा मैमूना बेगम, आलिमा जैनब कियास, आलिमा इकरा सिद्दीकी को आलिमियत का प्रमाण पत्र दिया गया। अर्शिया बानो और रिजवाना खान ने नातिया कलाम पेश किए।
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