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Lucknow News: इस बार देश में 10% कम बारिश, मगर सूखे के आसार नहीं

Wed, 10 Jun 2026 02:23 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:23 AM IST
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This year, the country received 10% less rainfall, but there is no possibility of drought
डाॅ. मृत्युंजय महापात्रा। 
लखनऊ। देश और प्रदेश में इस वर्ष जून से सितंबर के दौरान सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश के आसार हैं। इसके बावजूद कहीं सूखा पड़ने की स्थिति नहीं होगी। यह कहना है भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक और विश्व मौसम विज्ञान संगठन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि डॉ. मृत्युंजय महापात्रा का।
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मंगलवार को अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि अलनीनो की मजबूत स्थिति के कारण ही देश में आगामी मानसून सीजन में सामान्य की तुलना में 90 फीसदी ही बारिश देखने को मिल सकती है। वर्ष 2015 और 2023 में भी अलनीनो की मजबूत स्थिति बनी थी जिससे देश में सामान्य से 10 से 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। जून में अलनीनो के सक्रिय होने की संभावना 82 प्रतिशत तक पहुंच सकती है जबकि जुलाई और अगस्त में अलनीनो प्रभाव 90 प्रतिशत से अधिक रहने के आसार हैं। सामान्यतः अलनीनो के कारण भारतीय मानसून कमजोर पड़ता है और वर्षा में कमी आती है।
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भारत के मानसून पर असर डालता है अलनीनो
डॉ. महापात्रा के अनुसार, अलनीनो प्रशांत महासागर में होने वाली एक मौसमी जलवायु घटना है, जिसका भारत के मानसून पर सीधा असर पड़ता है। इसके असर से मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं और नमी लेकर आने वाली हवाओं का सामान्य प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे देश के कई हिस्सों, खासकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से कम वर्षा होती है।
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20 वर्ष में भारतीय मानसून पर अलनीनो का प्रभाव

वर्ष अलनीनो की स्थिति मानसून की दस्तक बारिश (%)
2004 कमजोर 4 जून 86.2%
2009 कमजोर 23 मई 78.2%
2015 मजबूत 5 जून 86.2%
2018 कमजोर 29 मई 90.6%
2023 मजबूत 8 जून 94.4%


माैसम ऐट योर डोर स्टेप का सपना हुआ साकार
डॉ. महापात्र ने बताया कि अर्ली वार्निंग सिस्टम के जरिये लोगों को मोबाइल पर घंटे के हिसाब से मौसम की सटीक जानकारी और अलर्ट मिल रहे हैं। आगे मौसम ग्राम ऐप से मैदानी या पहाड़ी पर्यटक अपने रूट के अनुसार बारिश, कोहरा, आंधी, बिजली गिरने, बादल फटने और हिमस्खलन जैसी घटनाओं की जानकारी पहले ही प्राप्त कर सकेंगे। इससे माैसम ऐट योर डोर स्टेप का सपना साकार हुआ है। यह प्रणाली कृषि, पर्यटन, विमानन और आपदा प्रबंधन को और मजबूत कर रही है।



देश में दस वर्ष में 17 से 50 हुए मौसम रडार
डॉ. महापात्रा ने बताया कि लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र अब क्षेत्रीय कमांड सेंटर के ताैर पर विकसित हुआ है। पहले उत्तर प्रदेश में केवल एक डॉप्लर मौसम रडार था जबकि अब तीन कार्यरत हैं। छह नए लगाए जा रहे हैं। देश में 10 वर्ष में मौसम रडारों की संख्या 17 से बढ़कर 50 हो गई है जिसे अगले दो वर्ष में 100 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।




साइक्लोन मैन के नाम से हैं मशहूर

2019 में आए फानी चक्रवात की सटीक चेतावनी देकर डाॅ. महापात्रा ने अलग पहचान बनाई थी। समय रहते दी गईं उनकी चेतावनियों से बड़े नुकसान और जनहानि को टालने में मदद मिली। इसी वजह से उन्हें साइक्लोन मैन के नाम से भी जाना जाता है।
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