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खुली बची वैक्सीन के लिए रिजर्व में रहेंगे स्वास्थ्य कर्मी, पिछले अभियान में खुलने के बाद बच गई थी 377 डोज
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खुली बची वैक्सीन के लिए रिजर्व में रहेंगे स्वास्थ्य कर्मी, पिछले अभियान में खुलने के बाद बच गई थी 377 डोज
लखनऊ। टीकाकरण के अंतिम समय खुली वैक्सीन बच न जाए, इसके लिए पांच से सात स्वास्थ्य कर्मी रिजर्व रखे जाएंगे। यदि वैक्सीन खुली रहती है तो उसे रिजर्व में रहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को लगाया जाएगा।
वैक्सीन के एक वायल में 10 डोज है। हर व्यक्ति को पांच एमएल की डोज दी जाती है। पिछले चरण के टीकाकरण में करीब 377 डोज बच गई थी। इस वैक्सीन को दो से आठ डिग्री के तापमान पर रखा जाता है। एक बार वायल खुलने पर वैक्सीन चार से आठ घंटे तक ही सही रह सकती है। इसे ध्यान में रखकर स्वास्थ्य विभाग ने इस बार नई रणनीति अपनाई है। हर बूथ पर करीब पांच स्वास्थ्य कार्यकर्ता रिजर्व में रहेंगे। वायल खुलने के बाद डोज बची तो उसे रिजर्व वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को लगाया जाएगा। इन्हें अतिरिक्त लाभार्थी की श्रेणी में गिना जाएगा। बाद में अगले चरण के लिए सूची तैयार करते वक्त इन लाभार्थियों का नाम टीकाकरण कराने वालों में शामिल कर लिया जाएगा। टीकाकरण का लक्ष्य बढ़ाने के लिए तमाम स्वास्थ्य कर्मियों को फोन करके सूचना दी गई है। गुरुवार को दोपहर बाद से अनुपस्थित रहने वालों को फोन करके बुलाया जाएगा।
कहां कितनी बची डोज
सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में करीब 142 डोज बची थी। जबकि केजीएमयू में 22, लोहिया संस्थान में 24, पीजीआई में 22, बलरामपुर में 12, सिविल अस्पताल में 6, डफरिन में 8 व झलकारीबाई में 7 डोज बची थी। इसी तरह अन्य अस्पतालों में भी दो से पांच डोज बची थी।
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10 फीसदी वेस्टेज की श्रेणी
प्रभारी जिला टीकाकरण डॉ. एमके सिंह का कहना है कि टीकाकरण के दौरान करीब 10 फीसदी वेस्टेज की श्रेणी में रखा जाता है। इसे खराब होना नहीं मानते। जहां भी खुराक बची थी वह 10 फीसदी से कम थी। इस बार हर खुराक का उपयोग करने की कोशिश रहेगी। इसके लिए अतिरिक्त लाभार्थी की श्रेणी में टीकाकरण किया जाएगा।
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लखनऊ। टीकाकरण के अंतिम समय खुली वैक्सीन बच न जाए, इसके लिए पांच से सात स्वास्थ्य कर्मी रिजर्व रखे जाएंगे। यदि वैक्सीन खुली रहती है तो उसे रिजर्व में रहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को लगाया जाएगा।
वैक्सीन के एक वायल में 10 डोज है। हर व्यक्ति को पांच एमएल की डोज दी जाती है। पिछले चरण के टीकाकरण में करीब 377 डोज बच गई थी। इस वैक्सीन को दो से आठ डिग्री के तापमान पर रखा जाता है। एक बार वायल खुलने पर वैक्सीन चार से आठ घंटे तक ही सही रह सकती है। इसे ध्यान में रखकर स्वास्थ्य विभाग ने इस बार नई रणनीति अपनाई है। हर बूथ पर करीब पांच स्वास्थ्य कार्यकर्ता रिजर्व में रहेंगे। वायल खुलने के बाद डोज बची तो उसे रिजर्व वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को लगाया जाएगा। इन्हें अतिरिक्त लाभार्थी की श्रेणी में गिना जाएगा। बाद में अगले चरण के लिए सूची तैयार करते वक्त इन लाभार्थियों का नाम टीकाकरण कराने वालों में शामिल कर लिया जाएगा। टीकाकरण का लक्ष्य बढ़ाने के लिए तमाम स्वास्थ्य कर्मियों को फोन करके सूचना दी गई है। गुरुवार को दोपहर बाद से अनुपस्थित रहने वालों को फोन करके बुलाया जाएगा।
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कहां कितनी बची डोज
सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में करीब 142 डोज बची थी। जबकि केजीएमयू में 22, लोहिया संस्थान में 24, पीजीआई में 22, बलरामपुर में 12, सिविल अस्पताल में 6, डफरिन में 8 व झलकारीबाई में 7 डोज बची थी। इसी तरह अन्य अस्पतालों में भी दो से पांच डोज बची थी।
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10 फीसदी वेस्टेज की श्रेणी
प्रभारी जिला टीकाकरण डॉ. एमके सिंह का कहना है कि टीकाकरण के दौरान करीब 10 फीसदी वेस्टेज की श्रेणी में रखा जाता है। इसे खराब होना नहीं मानते। जहां भी खुराक बची थी वह 10 फीसदी से कम थी। इस बार हर खुराक का उपयोग करने की कोशिश रहेगी। इसके लिए अतिरिक्त लाभार्थी की श्रेणी में टीकाकरण किया जाएगा।