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Lucknow News: विशेष दुकान से किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने का नहीं होगा दबाव
Mon, 13 Apr 2026 02:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 13 Apr 2026 02:27 AM IST
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विशेष दुकान से किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने का नहीं होगा दबाव
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लखनऊ। जिला शुल्क नियामक समिति के सख्त रुख के बाद निजी विद्यालयों ने भी अपना पक्ष रखा है। विद्यालय प्रबंधकों ने कहा कि सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है कि अभिभावकों को किसी खास ब्रांड या दुकान से कॉपियां और स्टेशनरी (जैसे रंगीन पेंसिल, क्रेयॉन वगैरह) खरीदने के लिए नहीं कहा जाएगा। वह स्वेच्छा से कॉपी किताबें या स्टेशनरी खरीद सकेंगे। सभी स्कूल इस नियम का सख्ती से पालन करेंगे।
यूनाइटेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि किताबों और स्टेशनरी को लेकर अभिभावकों को हो रही दिक्कतों को समझते हुए निजी स्कूल यह कोशिश करेंगे कि किताबें बार-बार न बदली जाएं। आईसीएसई और सीबीएसई स्कूलों में जब तक बोर्ड की ओर से सिलेबस नहीं बदला जाता, तब तक किताबों को न बदलने की कोशिश की जाएगी।
एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट व सीबीएसई के सिटी कोऑर्डिनेटर जावेद आलम खान ने कहा कि संगठन सरकार से जीएसटी को तर्कसंगत बनाने का भी अनुरोध करेगा। अभी स्कूल से जुड़ी चीजों के लिए इस्तेमाल होने वाले कागज पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जिसे कम करने से माता-पिता पर पड़ने वाला कुल खर्च का बोझ कम हो सकेगा। एसोसिएशन की सेक्रेटरी डॉ. माला मेहरा ने बताया कि स्कूल यूपी फीस रेगुलेशन एक्ट का सख्ती से पालन कर रहे हैं, और कोई भी स्कूल अपने कैंपस से यूनिफॉर्म, किताबें या स्टेशनरी नहीं बेच रहा है।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि एसोसिएशन की बैठक में शहर के 200 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों ने हिस्सा लिया। इनमें सीएमएस, लखनऊ पब्लिक स्कूल, पायनियर मांटेसरी, मॉडर्न एकेडमी, स्कॉलर्स होम, सेठ आनंदराम जयपुरिया, कैथोलिक डायोसीज व अन्य विद्यालय के प्रतिनिधि शामिल हुए।
जिला शुल्क नियामक समिति ने अभिभावकों की शिकायत पर ईमेल आईडी जारी की है। किताबें, यूनिफॉर्म व विद्यालय से जुड़ी अन्य तरह की समस्याओं पर rmsa.lko@ gmail.com पर शिकायत दस्तावेज के साथ जानकारी भेज सकते हैं। समिति करीब एक सप्ताह के अंदर पड़ताल कर इसकी जानकारी देगी।
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यूनाइटेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि किताबों और स्टेशनरी को लेकर अभिभावकों को हो रही दिक्कतों को समझते हुए निजी स्कूल यह कोशिश करेंगे कि किताबें बार-बार न बदली जाएं। आईसीएसई और सीबीएसई स्कूलों में जब तक बोर्ड की ओर से सिलेबस नहीं बदला जाता, तब तक किताबों को न बदलने की कोशिश की जाएगी।
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एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट व सीबीएसई के सिटी कोऑर्डिनेटर जावेद आलम खान ने कहा कि संगठन सरकार से जीएसटी को तर्कसंगत बनाने का भी अनुरोध करेगा। अभी स्कूल से जुड़ी चीजों के लिए इस्तेमाल होने वाले कागज पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जिसे कम करने से माता-पिता पर पड़ने वाला कुल खर्च का बोझ कम हो सकेगा। एसोसिएशन की सेक्रेटरी डॉ. माला मेहरा ने बताया कि स्कूल यूपी फीस रेगुलेशन एक्ट का सख्ती से पालन कर रहे हैं, और कोई भी स्कूल अपने कैंपस से यूनिफॉर्म, किताबें या स्टेशनरी नहीं बेच रहा है।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि एसोसिएशन की बैठक में शहर के 200 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों ने हिस्सा लिया। इनमें सीएमएस, लखनऊ पब्लिक स्कूल, पायनियर मांटेसरी, मॉडर्न एकेडमी, स्कॉलर्स होम, सेठ आनंदराम जयपुरिया, कैथोलिक डायोसीज व अन्य विद्यालय के प्रतिनिधि शामिल हुए।
जिला शुल्क नियामक समिति ने अभिभावकों की शिकायत पर ईमेल आईडी जारी की है। किताबें, यूनिफॉर्म व विद्यालय से जुड़ी अन्य तरह की समस्याओं पर rmsa.lko