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पोस्ट कोविड मरीजों के इलाज के लिए शुल्क तय नहीं, निजी अस्पताल कर रहे मनमानी वसूली
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लखनऊ। पोस्ट कोविड मरीजों के इलाज के लिए शुल्क निर्धारित न होने से निजी अस्पतालों ने मनमानी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पोस्ट कोविड समस्याओं को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में ऐसे मरीजों का निशुल्क इलाज करने का निर्देश दिया है। सरकारी अस्पताल इसका पालन भी कर रहे हैं, लेकिन निजी अस्पताल के लिए कोई गाइडलाइन न होने से मरीजों से मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है।
कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए ने स्पष्ट गाइडलाइन तथा अधिकतम फीस तय की थी। इसके बावजूद कई निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मनमानी फीस वसूली गई। शिकायत मिलने पर कई अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। शासन ने कई अस्पतालों का लाइसेंस भी निरस्त कर दिया। लेकिन पोस्ट कोविड समस्या के इलाज को लेकर कोई स्पष्ट आदेश अब तक नहीं हुआ है। निजी अस्पताल इसका फायदा उठा रहे हैं। सीएमओ कार्यालय की ओर से इस बारे में स्पष्ट आदेश नहीं हुआ है। इससे पोस्ट कोविड मरीजों की जेब खाली की जा रही है।
मॉनिटरिंग की केंद्रीकृत व्यवस्था नहीं
लखनऊ में कोरोना संक्रमण के मरीजों के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था है। किस अस्पताल में कौन सा मरीज भर्ती है, इसका ब्योरा रहता है। लेकिन पोस्ट कोविड के संबंध में ऐसी व्यवस्था नहीं है। इसकी वजह से कौन सा मरीज कहां इलाज करा रहा है या कितने मरीजों को यह समस्या है, इसका कोई आंकड़ा नहीं है। ऐसे में अगर पोस्ट कोविड मरीज से किसी प्रकार की मनमानी होती है तो मॉनिटरिंग के अभाव में कार्रवाई होने में काफी समय लगेगा।
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बलरामपुर अस्पताल में पोस्ट कोविड वार्ड
सीएमओ डॉ. संजय भटनागर ने बताया कि पोस्ट कोविड मरीजों की समस्या को देखते हुए बंदोबस्त किए जा रहे हैं। बलरामपुर अस्पताल में पोस्ट कोविड वार्ड शुरू किया गया है। जरूरत के हिसाब से और व्यवस्था भी की जाएगी।
अलग से गाइडलाइन नहीं
लखनऊ के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय भटनागर का कहना है कि पोस्ट कोविड मरीजों के इलाज के लिए अलग से कोई शासनादेश नहीं हुआ है। हालांकि, कोविड के इलाज के लिए जो आदेश है उसके हिसाब से ही निजी अस्पतालों को पोस्ट कोविड इलाज की फीस लेनी चाहिए। इससे ज्यादा वसूली पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए ने स्पष्ट गाइडलाइन तथा अधिकतम फीस तय की थी। इसके बावजूद कई निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मनमानी फीस वसूली गई। शिकायत मिलने पर कई अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। शासन ने कई अस्पतालों का लाइसेंस भी निरस्त कर दिया। लेकिन पोस्ट कोविड समस्या के इलाज को लेकर कोई स्पष्ट आदेश अब तक नहीं हुआ है। निजी अस्पताल इसका फायदा उठा रहे हैं। सीएमओ कार्यालय की ओर से इस बारे में स्पष्ट आदेश नहीं हुआ है। इससे पोस्ट कोविड मरीजों की जेब खाली की जा रही है।
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मॉनिटरिंग की केंद्रीकृत व्यवस्था नहीं
लखनऊ में कोरोना संक्रमण के मरीजों के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था है। किस अस्पताल में कौन सा मरीज भर्ती है, इसका ब्योरा रहता है। लेकिन पोस्ट कोविड के संबंध में ऐसी व्यवस्था नहीं है। इसकी वजह से कौन सा मरीज कहां इलाज करा रहा है या कितने मरीजों को यह समस्या है, इसका कोई आंकड़ा नहीं है। ऐसे में अगर पोस्ट कोविड मरीज से किसी प्रकार की मनमानी होती है तो मॉनिटरिंग के अभाव में कार्रवाई होने में काफी समय लगेगा।
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बलरामपुर अस्पताल में पोस्ट कोविड वार्ड
सीएमओ डॉ. संजय भटनागर ने बताया कि पोस्ट कोविड मरीजों की समस्या को देखते हुए बंदोबस्त किए जा रहे हैं। बलरामपुर अस्पताल में पोस्ट कोविड वार्ड शुरू किया गया है। जरूरत के हिसाब से और व्यवस्था भी की जाएगी।
अलग से गाइडलाइन नहीं
लखनऊ के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय भटनागर का कहना है कि पोस्ट कोविड मरीजों के इलाज के लिए अलग से कोई शासनादेश नहीं हुआ है। हालांकि, कोविड के इलाज के लिए जो आदेश है उसके हिसाब से ही निजी अस्पतालों को पोस्ट कोविड इलाज की फीस लेनी चाहिए। इससे ज्यादा वसूली पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।