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Lucknow News: दुनिया जानेगी यूपी में अपनाए जा रहे कान के इलाज का मॉडल
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प्रो. एचपी सिंह।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कान की हड्डी गलने के बाद उपचार में अपनाई गई नई तकनीक से अब पूरी दुनिया के ईएनटी विशेषज्ञ वाकिफ हो सकेंगे। इसके लिए केजीएमयू के ईएनटी विभाग के प्रो. एचपी सिंह को तुर्की बुलाया गया है। वह वहां वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ ओटोरिनोलैरिंगोलॉजी में इस तकनीक की बारीकी और बरती जाने वाली सावधानी के बारे में जानकारी देंगे।
कान में संक्रमण होने पर एक तरह का तरल पदार्थ निकलता है। तत्काल उपचार नहीं कराने पर संक्रमण कान की हड्डियों तक पहुंच जाता है। हड्डियां गल जाती हैं। कई बार संक्रमण दिमाग की नसों तक पहुंच जाता है। ऐसे में सर्जरी के जरिये कान की संक्रमित हड्डी निकाल दी जाती है। हड्डी निकालने के बाद कान के पिछले हिस्से में एक छेद बच जाता है। इससे मरीज पानी में डुबकी नहीं लगा सकते। सर्जरी के बाद उसे बार-बार संक्रमण भी होता रहता है।
केजीएमयू के ईएनटी विभाग के प्रो. एचपी सिंह ने इसमें नया प्रयोग किया। हड्डी निकालने के बाद दूसरे स्थान से मांस लेकर छेद बंद कर दिया। इससे न सिर्फ संक्रमण रुका, बल्कि उपचार के बाद सेना, पुलिस आदि से छंटने वाले युवाओं को राहत मिली। उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया गया। उन्होंने अब तक 160 मरीजों में इस तकनीक को अपनाया है। प्रो. एचपी सिंह ने बताया कि तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित कांग्रेस के वैज्ञानिक सत्र में वह अपने प्रयोग और सफलता की जानकारी देंगे।
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कान में संक्रमण होने पर एक तरह का तरल पदार्थ निकलता है। तत्काल उपचार नहीं कराने पर संक्रमण कान की हड्डियों तक पहुंच जाता है। हड्डियां गल जाती हैं। कई बार संक्रमण दिमाग की नसों तक पहुंच जाता है। ऐसे में सर्जरी के जरिये कान की संक्रमित हड्डी निकाल दी जाती है। हड्डी निकालने के बाद कान के पिछले हिस्से में एक छेद बच जाता है। इससे मरीज पानी में डुबकी नहीं लगा सकते। सर्जरी के बाद उसे बार-बार संक्रमण भी होता रहता है।
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केजीएमयू के ईएनटी विभाग के प्रो. एचपी सिंह ने इसमें नया प्रयोग किया। हड्डी निकालने के बाद दूसरे स्थान से मांस लेकर छेद बंद कर दिया। इससे न सिर्फ संक्रमण रुका, बल्कि उपचार के बाद सेना, पुलिस आदि से छंटने वाले युवाओं को राहत मिली। उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया गया। उन्होंने अब तक 160 मरीजों में इस तकनीक को अपनाया है। प्रो. एचपी सिंह ने बताया कि तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित कांग्रेस के वैज्ञानिक सत्र में वह अपने प्रयोग और सफलता की जानकारी देंगे।
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