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Lucknow News: रैन बसेरे की खिड़कियों के शीशे टूटे, ठंड से तीमारदार परेशान
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क्वीन मेरी अस्पताल के रैन बसेरे की टूटी खिड़कियां।
लखनऊ। केजीएमयू के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (क्वीन मेरी) परिसर स्थित रैन बसेरे की कई खिड़कियां टूटी हुई हैं। केवल जाली लगी होने के कारण सर्द हवाएं सीधे भीतर प्रवेश कर रही हैं, जिससे वहां ठहरे तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को ठंड में रात गुजारनी पड़ रही है। इससे लोग ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं।
ठंड की शुरुआत के साथ शहर के विभिन्न इलाकों में बेघर लोगों के लिए रैन बसेरे बनाए जा रहे हैं, लेकिन क्वीन मेरी स्थित रैन बसेरे की बदहाल स्थिति अब तक नहीं सुधारी गई है। यहां कई खिड़कियों के दरवाजे टूटे हुए हैं, जिससे तेज हवाएं भीतर आती हैं। रैन बसेरे में पांच साल से लेकर 60 वर्ष से अधिक उम्र तक के लोग ठहरे हुए हैं।
सीतापुर से पत्नी का इलाज कराने पहुंचे युवक ने बताया कि खिड़कियों में शीशे या दरवाजे न होने के कारण रात में काफी ठंड लगती है। उन्होंने कहा कि वह खुद तो किसी तरह ठंड सहन कर ले रहे हैं, लेकिन उनके साथ ठहरा पांच साल का बच्चा ज्यादा परेशान है, जिससे उसकी तबीयत खराब होने का डर बना हुआ है।
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वहीं, 63 वर्षीय गीता देवी ने बताया कि अधिक उम्र होने के कारण वह थोड़ी सी भी ठंड बर्दाश्त नहीं कर पातीं। ठंड की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। वह बहू का इलाज कराने आई थीं, लेकिन अब खुद बीमार होती जा रही हैं।
गायनी वार्ड में भी यही हाल
अस्पताल के प्रथम तल पर बने गायनी वार्ड की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। यहां भी खिड़कियों के दरवाजे टूटे हुए हैं और उनके स्थान पर पुराने गत्ते लगाए गए हैं, जो फट चुके हैं। इन खिड़कियों के सामने बेड पर भर्ती मरीजों को ठंड का सीधा असर झेलना पड़ रहा है। एक महिला मरीज ने बताया कि रात में तेज हवा अंदर आती है, जिससे उन्हें और उनके नवजात शिशु को ठंड लगती है। इसके कारण वह ठीक से आराम भी नहीं कर पा रही हैं।
Iरैन बसेरे और वार्ड की खिड़कियों के शीशे टूटे होने की जानकारी नहीं थी। अगर जानकारी दी जाती तो पहले ही इसे सही कर दिया जाता। लोगों को ठंड से परेशान नहीं होना पड़ता। विभाग से इस संबंध में जवाब मांगा गया है। साथ ही, जल्द व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी।I
I- डॉ. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयूI
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ठंड की शुरुआत के साथ शहर के विभिन्न इलाकों में बेघर लोगों के लिए रैन बसेरे बनाए जा रहे हैं, लेकिन क्वीन मेरी स्थित रैन बसेरे की बदहाल स्थिति अब तक नहीं सुधारी गई है। यहां कई खिड़कियों के दरवाजे टूटे हुए हैं, जिससे तेज हवाएं भीतर आती हैं। रैन बसेरे में पांच साल से लेकर 60 वर्ष से अधिक उम्र तक के लोग ठहरे हुए हैं।
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सीतापुर से पत्नी का इलाज कराने पहुंचे युवक ने बताया कि खिड़कियों में शीशे या दरवाजे न होने के कारण रात में काफी ठंड लगती है। उन्होंने कहा कि वह खुद तो किसी तरह ठंड सहन कर ले रहे हैं, लेकिन उनके साथ ठहरा पांच साल का बच्चा ज्यादा परेशान है, जिससे उसकी तबीयत खराब होने का डर बना हुआ है।
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वहीं, 63 वर्षीय गीता देवी ने बताया कि अधिक उम्र होने के कारण वह थोड़ी सी भी ठंड बर्दाश्त नहीं कर पातीं। ठंड की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। वह बहू का इलाज कराने आई थीं, लेकिन अब खुद बीमार होती जा रही हैं।
गायनी वार्ड में भी यही हाल
अस्पताल के प्रथम तल पर बने गायनी वार्ड की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। यहां भी खिड़कियों के दरवाजे टूटे हुए हैं और उनके स्थान पर पुराने गत्ते लगाए गए हैं, जो फट चुके हैं। इन खिड़कियों के सामने बेड पर भर्ती मरीजों को ठंड का सीधा असर झेलना पड़ रहा है। एक महिला मरीज ने बताया कि रात में तेज हवा अंदर आती है, जिससे उन्हें और उनके नवजात शिशु को ठंड लगती है। इसके कारण वह ठीक से आराम भी नहीं कर पा रही हैं।
Iरैन बसेरे और वार्ड की खिड़कियों के शीशे टूटे होने की जानकारी नहीं थी। अगर जानकारी दी जाती तो पहले ही इसे सही कर दिया जाता। लोगों को ठंड से परेशान नहीं होना पड़ता। विभाग से इस संबंध में जवाब मांगा गया है। साथ ही, जल्द व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी।I
I- डॉ. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयूI

क्वीन मेरी अस्पताल के रैन बसेरे की टूटी खिड़कियां।

क्वीन मेरी अस्पताल के रैन बसेरे की टूटी खिड़कियां।

क्वीन मेरी अस्पताल के रैन बसेरे की टूटी खिड़कियां।

क्वीन मेरी अस्पताल के रैन बसेरे की टूटी खिड़कियां।