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आउटसोर्सिंग से मैनपॉवर लेने की व्यवस्था में अभी भी मनमानी, मुख्य सचिव ने जताई नाराजगी
Tue, 08 Dec 2020 07:23 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 08 Dec 2020 07:23 PM IST
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मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में आउटसोर्सिंग नियुक्तियों में मनमानी अभी भी नहीं रुक रही है। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने इस स्थिति पर आपत्ति जताते हुए जेम पोर्टल के जरिए मैनपॉवर लिए जाने की व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने सेवा प्रदाताओं को किसी भी दशा में मैन्युअल निविदा आवंटित न किए जाने तथा आउटसोर्स पर रखे गए कार्मिकों को तय समय पर निर्धारित मानदेय का भुगतान सुनिश्चित करने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।
शासन के कार्मिक विभाग ने सरकारी विभागों तथा उनके अधीनस्थ संस्थाओं में आउटसोर्सिंग के आधार पर मैनपॉवर की आपूर्ति के लिए 18 दिसंबर 2019 को एक शासनादेश जारी किया था। इसके क्रियान्वयन के लिए श्रम विभाग ने 18 अगस्त 2020 और एमएसएमई विभाग ने 25 अगस्त 2020 को शासनादेश किया। शासन के इन आदेशों में स्पष्ट है कि जेम पोर्टल/ ई-निविदा के जरिए पूर्व में की गई जिन निविदाओं में क्रयादेश जारी हो गया है, उनका नवीनीकरण या विस्तारीकरण नहीं किया जाएगा। इसी तरह तय समयावधि पूरी होने पर पूर्ववर्ती निविदाएं निरस्त मानते हुए नई निविदाएं जेम से की जाएंगी। यह समय सीमा 25 अगस्त को बीत चुकी है। इसके बावजूद कई विभाग अभी भी पुराने अनुबंध को बढ़ाकर पूर्व सेवा प्रदाता कंपनियों से पूर्व व्यवस्था के अंतर्गत कार्य ले रहे हैं। यही नहीं अनुबंध बढ़ाने के लिए शासन से अनुरोध भी किया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने शासन, निदेशालय व फील्ड के समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जेम पोर्टल से मैनपॉवर आपूर्ति के संबंध में जारी शासनादेश में दी गई व्यवस्था से किसी भी दशा में विचलन न किया जाए। उन्होंने सेवा प्रदाता कंपनियों के चयन को लेकर जारी व्यवस्था के पुख्ता क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण नए दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। इसका कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
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शासन के कार्मिक विभाग ने सरकारी विभागों तथा उनके अधीनस्थ संस्थाओं में आउटसोर्सिंग के आधार पर मैनपॉवर की आपूर्ति के लिए 18 दिसंबर 2019 को एक शासनादेश जारी किया था। इसके क्रियान्वयन के लिए श्रम विभाग ने 18 अगस्त 2020 और एमएसएमई विभाग ने 25 अगस्त 2020 को शासनादेश किया। शासन के इन आदेशों में स्पष्ट है कि जेम पोर्टल/ ई-निविदा के जरिए पूर्व में की गई जिन निविदाओं में क्रयादेश जारी हो गया है, उनका नवीनीकरण या विस्तारीकरण नहीं किया जाएगा। इसी तरह तय समयावधि पूरी होने पर पूर्ववर्ती निविदाएं निरस्त मानते हुए नई निविदाएं जेम से की जाएंगी। यह समय सीमा 25 अगस्त को बीत चुकी है। इसके बावजूद कई विभाग अभी भी पुराने अनुबंध को बढ़ाकर पूर्व सेवा प्रदाता कंपनियों से पूर्व व्यवस्था के अंतर्गत कार्य ले रहे हैं। यही नहीं अनुबंध बढ़ाने के लिए शासन से अनुरोध भी किया जा रहा है।
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मुख्य सचिव ने शासन, निदेशालय व फील्ड के समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जेम पोर्टल से मैनपॉवर आपूर्ति के संबंध में जारी शासनादेश में दी गई व्यवस्था से किसी भी दशा में विचलन न किया जाए। उन्होंने सेवा प्रदाता कंपनियों के चयन को लेकर जारी व्यवस्था के पुख्ता क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण नए दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। इसका कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
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सेवा प्रदाताओं को शत-प्रतिशत भर्ती सेवायोजना पोर्टल से करना अनिवार्य
मुख्य सचिव ने कहा है कि सेवा प्रदाताओं को शत-प्रतिशत नई भर्ती सेवायोजन पोर्टल के माध्यम से करनी होगी। शासन पुराने कार्यरत कार्मिकों की सूची का सत्यापन वेतन भुगतान, ईपीएफ व ईएसआई व नियुक्ति पत्र के आधार पर करेगा। सेवा प्रदाता को विभाग हर महीने की एक तारीख को आउटसोर्स कर्मियों की उपस्थिति भेजेंगे। सेवा प्रदाता उसके 4 से 6 कार्यदिवस में कार्मिक के मानदेय का भुगतान सुनिश्चित करेगा। 14 तारीख तक कार्मिक का पीएफ व ईएसआई जमा करना होगा।
ब्लैकलिस्ट व डिबार अवधि पूरा करने वाली कंपनियां टेंडर में ले सकेंगी हिस्सा
शासन ने ऐसी ब्लैकलिस्टेड व डिबार कंपनियों को भी मैनपॉवर आपूर्ति से जुड़े टेंडर में भाग लेने की अनुमति दे दी है, जिनके पक्ष में हाईकोर्ट ने स्थगनादेश दे दिया है। इसी तरह पूर्व में ब्लैकलिस्ट व डिबार की गई जिन कंपनियों की ब्लैकलिस्ट व डिबार अवधि समाप्त हो गई है, वे भी निविदा में भाग ले सकेंगी। मुख्य सचिव ने कहा है कि यदि किसी सेवा प्रदाता कंपनी की निविदा तकनीकी रूप से अर्ह नहीं है तो इसे निरस्त करते समय स्पष्ट कारण दर्ज किया जाए। सेवा प्रदाता को पक्ष रखने के लिए समय देकर उसकी जिज्ञासा का समाधान भी किया जाए। बिना कारण बताए सेवाप्रदाताओं की निविदाएं तकनीकी रूप से निरस्त न की जाएं। बिना ठोस कारण व अपरिहार्य परिस्थिति के बार-बार निविदा तिथि नहीं बढ़ाई जाएगी। टेंडर में अवांछित प्रपत्र न मांगने और अनावश्यक नई शर्त लगाकर निविदा न निरस्त करने को निर्देशित किया गया है। कोई विशेष शर्त लगाने से पहले जेम नीति का अध्ययन करने और ऐसी कोई अनावश्यक शर्त न रखने को कहा गया है जो जेम नीति व इससे संबंधित शासनादेशों के प्रावधानों से इतर हों।
ब्लैकलिस्ट व डिबार अवधि पूरा करने वाली कंपनियां टेंडर में ले सकेंगी हिस्सा
शासन ने ऐसी ब्लैकलिस्टेड व डिबार कंपनियों को भी मैनपॉवर आपूर्ति से जुड़े टेंडर में भाग लेने की अनुमति दे दी है, जिनके पक्ष में हाईकोर्ट ने स्थगनादेश दे दिया है। इसी तरह पूर्व में ब्लैकलिस्ट व डिबार की गई जिन कंपनियों की ब्लैकलिस्ट व डिबार अवधि समाप्त हो गई है, वे भी निविदा में भाग ले सकेंगी। मुख्य सचिव ने कहा है कि यदि किसी सेवा प्रदाता कंपनी की निविदा तकनीकी रूप से अर्ह नहीं है तो इसे निरस्त करते समय स्पष्ट कारण दर्ज किया जाए। सेवा प्रदाता को पक्ष रखने के लिए समय देकर उसकी जिज्ञासा का समाधान भी किया जाए। बिना कारण बताए सेवाप्रदाताओं की निविदाएं तकनीकी रूप से निरस्त न की जाएं। बिना ठोस कारण व अपरिहार्य परिस्थिति के बार-बार निविदा तिथि नहीं बढ़ाई जाएगी। टेंडर में अवांछित प्रपत्र न मांगने और अनावश्यक नई शर्त लगाकर निविदा न निरस्त करने को निर्देशित किया गया है। कोई विशेष शर्त लगाने से पहले जेम नीति का अध्ययन करने और ऐसी कोई अनावश्यक शर्त न रखने को कहा गया है जो जेम नीति व इससे संबंधित शासनादेशों के प्रावधानों से इतर हों।