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जांच में खुलासा: इंटरव्यू देने जाते समय बरगलाकर कार में बैठाया, गला दबाकर मार डाला

Sun, 11 Aug 2019 01:51 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 11 Aug 2019 01:51 PM IST
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The story behind a woman murder in para in Lucknow.
प्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ के पारा स्थित रीयल एस्टेट कंपनी में काम करने वाली युवती की गैंगरेप और हत्या के आरोपियों ने पुलिसिया पूछताछ में कई खुलासे किए। आरोपियों ने बताया कि युवती दूसरी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने वृंदावन कॉलोनी जा रही थी। तेलीबाग में आरोपियों ने उसे छोड़ने की बात कहकर कार में बैठा लिया और गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव रायबरेली में नदी में फेंक दिया।

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पारा थाना के इंस्पेक्टर त्रिलोकी सिंह ने बताया कि कांशीराम कॉलोनी में रहने वाली युवती काकोरी के संजय यादव की कंपनी अमित इन्फ्रा हाईट्स प्राइवेट लिमिटेड में काम करती थी। युवती के भाई ने बताया कि प्लॉट की बुकिंग दिलाने पर कंपनी कर्मचारियों को कमीशन देती थी।
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उसकी बहन ने भी कंपनी के लिए कई प्लॉट बुक कराए। इसके कमीशन के तौर पर उसे कंपनी से करीब 25 लाख रुपये लेने थे। इन रुपये को लेकर उसका कंपनी मालिक से विवाद चल रहा था। 29 जुलाई को उसके और संजय के बीच जमकर झगड़ा हुआ। युवती ने नौकरी छोड़ने और कानूनी कार्रवाई करने की धमकी दी थी। इसके बाद से उसने ऑफिस जाना कम कर दिया था।

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एसएसपी से मिला भाई तो केस दर्ज करने का आदेश

युवती के भाई के मुताबिक तीन अगस्त को उसकी बहन काम की बात कहकर घर से निकली और लापता हो गई। रात तक कुछ पता न चलने पर पारा थाना में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। इस बीच युवती के भाई ने एसएसपी कलानिधि नैथानी से संपर्क कर बहन के साथ दुराचार के बाद उसकी हत्या की आशंका जताई।

इसके बाद संजय यादव, अवधेश यादव, गुड्डू यादव, अजय यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया गया।

शनिवार को पुलिस ने संजय यादव के साले सरोजनीनगर के बिजनौर निवासी गुड्डू यादव, आलमबाग के आजादनगर में रहने वाले दरोगा के बेटे अजय यादव और अवधेश यादव को पकड़ा तो पूरी कहानी खुल गई।

पति से हो चुका था तलाक, बेटे के साथ किराये पर रहती थी

युवती के भाई ने बताया कि उसकी बहन ने छह साल पहले मुंबई के युवक से निकाह किया था। उसके साढ़े चार साल का एक बेटा भी है। कुछ महीने पहले उसका पति से तलाक हो गया। इसके बाद वह कांशीराम योजना में बेटे के साथ रहने लगी और घर चलाने के लिए वह संजय यादव की कंपनी में नौकरी कर रही थी।

बेटे के भविष्य के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर से बनी थी बुकिंग एजेंट
रीयल एस्टेट कंपनी में युवती का मुख्य काम कंप्यूटर ऑपरेटर का था। मगर काफी कम वेतन होने की वजह से वह परेशान थी। वह बेटे को अच्छी पढ़ाई और बेहतर जीवन देना चाहती थी।

युवती ने संजय से बात की तो उसने प्लॉट बिकवाकर कमीशन कमाने के लिए कहा। इसके बाद युवती बुकिंग एजेंट बन गई। उसने काफी मेहनत से काम किया, इससे कंपनी को काफी फायदा हुआ।

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