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Lucknow News: सात दशक पुरानी परंपरा चकल्लस में देर रात तक गूंजे ठहाके

Fri, 06 Mar 2026 02:14 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 06 Mar 2026 02:14 AM IST
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The seven-decade-old tradition of Chakallas saw laughter echoing till late night.
सम्मानित कवियों के साथ राज्य सभा सांसद दिनेश शर्मा, विधायक नीरज बोरा व बीजेपी नेता अमित टंडन। -
लखनऊ। लखनऊ की सांस्कृतिक परंपरा, गंगा-जमुनी तहजीब और हास्य-व्यंग्य की जीवंत परंपरा का अद्भुत संगम बृहस्पतिवार की शाम चौक क्षेत्र में देखने को मिला। सात दशक पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए होलिकोत्सव समिति चौक की ओर से आयोजित अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन ''चकल्लस'' में हंसी, व्यंग्य और साहित्य का ऐसा रंग बिखरा कि देर रात तक ठहाकों और तालियों की गूंज से पूरा माहौल गुलजार रहा।
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कार्यक्रम का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया। इस अवसर पर राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा, क्षेत्रीय विधायक नीरज बोरा, अमित टंडन और क्षेत्रीय पार्षद अनुराग मिश्रा ने कवियों को सम्मानित किया।
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कार्यक्रम में पद्म विभूषण पं. अमृत लाल नागर सम्मान केजीएमयू के चेस्ट विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा रंगमंच के कलाकार पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी को दिया गया। लालजी टंडन स्मृति सम्मान कवि अशोक नागर और डीपी बोरा स्मृति सम्मान कवयित्री शबीना अदीब को 25 हजार रुपये की धनराशि के साथ दिया गया। कवियों का परिचय सर्वेश अस्थाना ने कराया। मंच संचालन कवि अशोक नागर ने किया।
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कवि सम्मेलन में भगवान मकरंद, अशोक नागर और शबीना अदीब ने रचनाओं से खूब गुदगुदाया। गौरव चौहान और प्रख्यात मिश्रा ने वीर रस की कविताओं से देशभक्ति का भाव जगाया। योगिता चौहान, स्वयं श्रीवास्तव, विकास बौखल और अमित अनपढ़ की प्रस्तुतियों का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।

कवयित्री शबीना अदीब ने अपनी पंक्तियों ''''जो खानदानी रईस हैं वे मिजाज रखते नर्म अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई-नई है'''' से खूब दाद बटोरी। वहीं गौरव चौहान ने- सैलरी का आधा खर्चा तुम्हारी पेडीक्योर-मेडीक्योर में ही चला जाता है '''' सुनाकर तालियां बटोरी। भगवान मकरंद ने सुनाया- भला हुआ जो राम कहानी हो गयी समय पुराने में लेने के देने पड़ जाते जो गई नए जमाने में, और अशोक नागर ने- वाह में है कोई, चाह में है कोई और कोई राह वाली को भी मुस्कान देकर आ गये हैं सुनाकर लोगों को हंसाया। योगिता चौहान की कविता- ''अपनी धड़कन में ऐसे छुपा लो मुझे मैं तो एक गीत हूं गुनगुना लो मुझे'' को लोगों ने पसंद किया।


कार्यक्रम में पार्षद अनुराग मिश्रा, अंजनी श्रीवास्तव, अमरनाथ मिश्रा, हरि प्रसाद अग्रवाल, ओमप्रकाश दीक्षित, राम अवतार कनौजिया, पूर्व पार्षद अनुराग पांडेय, साकेत शर्मा, डॉ. उमंग खन्ना, सुनील गुप्ता, सुनीत कपूर, पियूष माइती, संकेत मिश्रा, आनंद रस्तोगी, संजीव झींगरन, शैलेंद्र कक्कर, संजय त्रिवेदी सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और श्रोता मौजूद रहे। कार्यक्रम देर रात तक हंसी और साहित्य के रंगों से सराबोर रहा।

सम्मानित कवियों के साथ राज्य सभा सांसद दिनेश शर्मा, विधायक नीरज बोरा व बीजेपी नेता अमित टंडन। -

सम्मानित कवियों के साथ राज्य सभा सांसद दिनेश शर्मा, विधायक नीरज बोरा व बीजेपी नेता अमित टंडन। -

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