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Lucknow News: 2006 के उप चुनाव जैसा रहा 2024 का परिणाम

Thu, 06 Jun 2024 04:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Thu, 06 Jun 2024 04:22 AM IST
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The result of 2024 was like the 2006 by-election
रायबरेली। गांधी परिवार के गढ़ में भाजपा का हिंदुत्व कार्ड काम नहीं आया और एक बार फिर पार्टी की कमल खिलाने की कसक अधूरी रह गई। इस लोकसभा चुनाव का परिणाम वर्ष 2006 के उप चुनाव की याद दिलाता है जब सोनिया गांधी चुनाव मैदान में थीं और भाजपा ने उन्हें हराने के लिए हिंदूवादी नेता विनय कटियार को मैदान में उतारा था।
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भाजपा को उम्मीद थी कि वह हिंदुत्व और राम मंदिर मुद्दे के सहारे रायबरेली में जीत दर्ज करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस उपचुनाव का न सिर्फ परिणाम चौंकाने वाला था, बल्कि सोनिया ने चार लाख 17 हजार 888 मतों से जीत हासिल करके एक रिकाॅर्ड बनाया था। इस जीत रिकार्ड की बराबरी आज तक कोई नहीं कर पाया है।
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2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की तीन लाख 90 हजार रिकार्ड मतों से जीत तो जरूर हुई, लेकिन वह अपनी मां के जीत का रिकाॅर्ड नहीं तोड़ पाए। साल 2019 में अमेठी में जीत हासिल करने के बाद भाजपा का मिशन रायबरेली जीतना था। गांधी परिवार के गढ़ को जीतने के लिए भाजपा शुरुआती दौर से ही हिंदुत्व को धार देती नजर आई। देश के गृहमंत्री अमित शाह ने यहां पर दो जनसभाएं की। जनसभाओं के जरिए उन्होंने हिंदुत्व कार्ड उछाला और जनता को यह याद दिलाना नहीं भूले कि कांग्रेस सत्ता में आई तो राम मंदिर में ताला लगवा देगी।
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गृहमंत्री यह भी आरोप लगाना नहीं भूले कि गांधी परिवार अपनी सांसद निधि का पैसा अल्पसंख्यकों की बेहतरी पर खर्च करती है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एक जनसभा यहां पर की और हिंदुओं को एकजुटता का संदेश दिया। अलबत्ता भाजपा का हिंदुत्व कार्ड चल नहीं पाया।
भाजपा हाईकमान को इस तरह की हार की उम्मीद नहीं थी। यह तो सभी जानते थे कि भाजपा चुनाव हार रही है, लेकिन लोगों और राजनीति के जानकारों को इस बात की कतई उम्मीद नहीं थी कि रिकार्ड मतों से राहुल चुनाव जीत जाएंगे। दरअसल, भाजपा जनता का मूड़ नहीं भांप पाई।

महज दो बार भाजपा ने हासिल की जीत
देश की हाईप्रोफाइल माने जाने वाली रायबरेली लोकसभा सीट पर 1952 से अब तक हुए लोकसभा चुनाव में दो बार ही कमल खिल सका है। खास बात ये है कि भाजपा यहां से चुनाव तब जीती, जब गांधी परिवार चुनाव मैदान से बाहर था। भाजपा प्रत्याशी अशोक सिंह ने साल 1996 और 1998 में जीत हासिल की थी। इस बार तो रायबरेली में कमल खिलाने के चक्कर में भाजपा अमेठी सीट भी गंवा बैठी, जबकि 2019 में अमेठी से भाजपा ने जीत हासिल की थी।


सारे जतन हो गए फेल
रायबरेली में कमल खिलाने के लिए भाजपा के सारे जतन फेल हो गए। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी ने रेल कोच फैक्टरी में स्वयं जनसभा की। बावजूद जिले में कमल नहीं खिल सका। वर्ष 2024 के चुनाव में भी पीएम को छोड़कर भाजपा के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा। यहां तक ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले पूर्व मंत्री डॉ. मनोज कुमार पांडेय को पार्टी में ज्वाइन कराया। उनके आवास पर भी गए। बावजूद इसके कमल नहीं खिला और भाजपा का मिशन रायबरेली फेल हो गया।
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