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पूर्वांचल में होगी ओबीसी नेताओं की असली परीक्षा : अनुप्रिया, ओमप्रकाश राजभर, निषाद जैसे नेताओं के सामने बड़ा लक्ष्य

Mon, 21 Feb 2022 01:24 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 21 Feb 2022 01:24 AM IST
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सार
कई नेता ऐसे हैं जो पिछले चुनाव में भाजपा के साथ थे, मगर अब साइकिल पर सवार हैं। इसलिए माना जा रहा है कि पूर्वांचल में इस बार अनुप्रिया पटेल, डॉ. संजय निषाद, ओमप्रकाश राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान जैसे पिछड़े वर्ग के चेहरे की असली परीक्षा होगी।
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The real test of OBC leaders will be in Purvanchal: Big target in front of leaders like Anupriya, Omprakash Rajbhar, Nishad
ओमप्रकाश राजभर

विस्तार

सियासत के रण में पिछड़ी जाति के दिग्गज नेताओं का असल इम्तिहान इस बार पूर्वांचल में होगा। सपा और भाजपा से जुड़े पिछड़े वर्ग के कई ऐसे नेता है जो अपनी-अपनी जाति के वास्तविक नेता होने का दंभ भरते फिर रहे हैं। इनमें एकाध को छोड़ कर ज्यादातर बतौर प्रत्याशी मैदान में भी उतर चुके हैं। इनमें कई नेता ऐसे हैं जो पिछले चुनाव में भाजपा के साथ थे, मगर अब साइकिल पर सवार हैं। इसलिए माना जा रहा है कि पूर्वांचल में इस बार अनुप्रिया पटेल, डॉ. संजय निषाद, ओमप्रकाश राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान जैसे पिछड़े वर्ग के चेहरे की असली परीक्षा होगी।


सबसे पहले बात सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की। इस पार्टी का गठन तो 2002 में ही हो गया था मगर खाता खुला 2017 के विधानसभा चुनाव में। तब गठबंधन के तहत भाजपा ने सुभासपा को 8 सीटें दी थीं। इनमें से चार पर वह विजयी रहा और आठों सीटों पर 34.14 फीसदी वोट मिला था। इस बार सुभासपा सपा के साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ लड़ रही है। ओमप्रकाश की पूरी सियासत राजभर के अलावा बिंद, कुम्हार, प्रजापति, कुशवाहा, कोइरी जैसी पिछड़ी जातियों पर केंद्रित है और इन्हीं जातियों से जुड़े मुद्दे उठाकर मैदान में उतरते रहे हैं।


 

इस बार ओमप्रकाश और उनके बेटे अरविंद राजभर भी चुनाव मैदान में हैं। अरविंद को प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की शिवपुर सीट से योगी सरकार में मंत्री व सजातीय नेता अनिल राजभर के खिलाफ उतारा गया है। एक ही जाति का होने के चलते दोनों नेताओं की कड़ी परीक्षा होगी। वहीं, ओमप्रकाश जहूराबाद मे भाजपा के कालीचरण राजभर व सपा सरकार में मंत्री रहीं बसपा उम्मीदवार शादाब फातिमा से त्रिकोणीय मुकाबले में फंस गए हैं। सपा ने सुभासपा को 18 सीटें दी हैं। यानी पिछली बार की तुलना में इस बार उनकी कठिन अग्निपरीक्षा होगी।

संजय निषाद : प्रभाव दिखाने की चुनौती
खुद को निषादों के नेता के रूप में प्रचारित करने वाले भाजपा के सहयोगी डॉ. संजय निषाद का दावा है कि 403 में से 160 सीटों पर निषादों का प्रभाव है। इनमें से अधिकांश सीट पूर्वांचल में ही हैं। कोई भी दल उनके सहयोग के बिना चुनाव नहीं जीत सकता। हालांकि पिछले चुनाव में संजय निषाद ने पार्टी के सिंबल पर 72 उम्मीदवार उतारे थे, मगर सिर्फ 3.58 फीसदी वोट ही हासिल कर सके। उनकी पार्टी एकमात्र सीट ज्ञानपुर ही जीतने में कामयाब रही। हालांकि कहा जाता है कि यह जीत भी बाहुबली विजय मिश्रा ने अपने बल पर जीता था। इस बार निषाद पार्टी को भाजपा ने 16 सीटें दी हैं। इन पर कामयाबी हासिल करने के लिए संजय निषाद को कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा।

अनुप्रिया पटेल : कुर्मी बहुल सीटों पर परीक्षा
अब बात कुर्मी नेता और अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल की। पूर्वांचल में कुर्मी जाति की काफी संख्या है और अनुप्रिया को ही इनका सर्वमान्य नेता माना जाता है। 2017 के चुनाव में अनुप्रिया की पार्टी 11 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसके 9 प्रत्याशी जीते थे। अपना दल को 11 सीटों पर 39.21 फीसदी वोट मिले थे। इस बार अपना दल को हिस्सेदारी में 17 सीट मिली है। इसलिए अनुप्रिया के सामने इन सभी सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों को जिताने के अलावा उन सीटों पर भाजपा को भी चुनाव जिताने की चुनौती होगी, जिन पर कुर्मी मतदाता अधिक हैं।


स्वामी प्रसाद, दारा व कृष्णा के सामने भी होगी चुनौती
पिछले चुनाव में भाजपा का साथ पाकर चुनाव जीतकर मंत्री बनने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान को भी अग्नि परीक्षा देनी होगी। दोनों नेता इस बार सपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। वहीं अपना दल (कमेरावादी) की अध्यक्ष कृष्णा पटेल व उनकी बेटी पल्लवी पटेल भी सपा के साथ चुनाव लड़ रही हैं। तीनों नेताओ भी इस चुनाव में खुद के साथ अपने सजातीय उम्मीदवारों को चुनाव जिताने की चुनौती है।

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