{"_id":"6aada91643665353ce03ecc8","slug":"the-reading-room-of-tagore-library-will-open-today-after-a-year-lucknow-news-c-13-lko1070-1925806-2026-09-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: एक साल बाद आज से खुलेगा टैगोर लाइब्रेरी का वाचनालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: एक साल बाद आज से खुलेगा टैगोर लाइब्रेरी का वाचनालय
विज्ञापन
लखनऊ विश्वविद्यालय की टैगोर लाइब्रेरी का वाचनालय
लखनऊ। एक साल से मरम्मत और सुंदरीकरण के चलते बंद चल रहे लखनऊ विश्वविद्यालय के टैगोर पुस्तकालय का वाचनालय कक्ष शनिवार से छात्र-छात्राओं के लिए फिर से खुल जाएगा। छात्र-छात्राओं और विशेष रूप से शोधार्थियों के लिए यह राहत भरी खबर है। यहां 370 विद्यार्थी एक साथ बैठकर अध्ययन कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर 50 अतिरिक्त छात्रों के बैठने की भी व्यवस्था की जा सकेगी।
अवैतनिक पुस्तकालयाध्यक्ष रोली मिश्रा ने बताया कि यह कक्ष प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत चल रहे नवीनीकरण और मरम्मत कार्य के कारण कई महीनों से बंद था। नवीनीकरण के तहत दीवारों की सीलन दूर करने के लिए दीवारों और फर्श पर टाइल्स लगाई गई हैं। खराब मेजों की लाइटों और पंखों को भी ठीक किया गया है। आवश्यक रंगरोगन और अन्य कार्य भी कराए गए। यह विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अध्ययन के अनुकूल वातावरण प्रदान करेगा। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने बताया कि वाचनालय के संचालन से विद्यार्थियों को परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी। शोध कार्यों को आगे बढ़ाने में भी यह कक्ष सहायक होगा।
1937 में पड़ी थी नींव, लाइब्रेरी में पांच लाख से ज्यादा पुस्तकें
टैगोर लाइब्रेरी देश के प्रतिष्ठित पुस्तकालयों में से एक है। यहां पांच लाख से अधिक पुस्तकें मौजूद हैं। पुस्तकालय और वाचनालय के वर्तमान भवन की नींव वर्ष 1937 में रखी गई थी और 1940 में इस भवन का उद्घाटन किया गया था। पुस्तकालय का नक्शा अपने समय के मशहूर आर्किटेक्ट ग्रिफिन ने तैयार किया था। उनकी मृत्यु के बाद नर्लीकर ने इसे पूरा किया। लविवि की स्थापना के बाद रवींद्रनाथ टैगोर भी कई बार यहां आए। फिर उनके निधन के बाद लविवि के केंद्रीय पुस्तकालय का नाम उनके नाम पर कर दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
अवैतनिक पुस्तकालयाध्यक्ष रोली मिश्रा ने बताया कि यह कक्ष प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत चल रहे नवीनीकरण और मरम्मत कार्य के कारण कई महीनों से बंद था। नवीनीकरण के तहत दीवारों की सीलन दूर करने के लिए दीवारों और फर्श पर टाइल्स लगाई गई हैं। खराब मेजों की लाइटों और पंखों को भी ठीक किया गया है। आवश्यक रंगरोगन और अन्य कार्य भी कराए गए। यह विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अध्ययन के अनुकूल वातावरण प्रदान करेगा। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने बताया कि वाचनालय के संचालन से विद्यार्थियों को परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी। शोध कार्यों को आगे बढ़ाने में भी यह कक्ष सहायक होगा।
विज्ञापन
1937 में पड़ी थी नींव, लाइब्रेरी में पांच लाख से ज्यादा पुस्तकें
टैगोर लाइब्रेरी देश के प्रतिष्ठित पुस्तकालयों में से एक है। यहां पांच लाख से अधिक पुस्तकें मौजूद हैं। पुस्तकालय और वाचनालय के वर्तमान भवन की नींव वर्ष 1937 में रखी गई थी और 1940 में इस भवन का उद्घाटन किया गया था। पुस्तकालय का नक्शा अपने समय के मशहूर आर्किटेक्ट ग्रिफिन ने तैयार किया था। उनकी मृत्यु के बाद नर्लीकर ने इसे पूरा किया। लविवि की स्थापना के बाद रवींद्रनाथ टैगोर भी कई बार यहां आए। फिर उनके निधन के बाद लविवि के केंद्रीय पुस्तकालय का नाम उनके नाम पर कर दिया गया था।
विज्ञापन