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Lucknow News: जीवाश्मों का अतीत बताएगा जलवायु का भविष्य

Fri, 11 Sep 2026 02:29 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 02:29 AM IST
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The past of fossils will reveal the future of the climate.
बीएसआईपी के 80वें स्थापना दिवस पर हुआ आयोजन। 
लखनऊ। करोड़ों साल पुराने जीवाश्म अब सिर्फ धरती के बीते इतिहास के पन्ने नहीं खोल रहे, बल्कि बदलती जलवायु के भविष्य को समझने का रास्ता भी दिखा रहे हैं। पुराने पौधों, जीवाश्मों, चट्टानों और प्राकृतिक अवशेषों में दर्ज पर्यावरणीय संकेत वैज्ञानिकों को बताते हैं कि हजारों-लाखों साल पहले मौसम, मानसून और समुद्र का स्तर किस तरह बदला था। इन्हीं बदलावों को समझकर वर्तमान जलवायु परिवर्तन के असर को जानने की कोशिश हो रही है।
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राजधानी स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) अपने 80 साल के शोध सफर में धरती के अतीत को पढ़ते हुए वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों को समझने में जुटा है। बृहस्पतिवार को संस्थान के 80वें स्थापना दिवस पर वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ शोध को नई तकनीक से जोड़ने की योजनाओं की जानकारी दी गई।
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पुराने जीवाश्मों में छिपे हैं मौसम के संकेत

बीएसआईपी के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर ने बताया कि पुराने पौधों, जीवाश्मों, चट्टानों और प्राकृतिक अवशेषों में उस दौर के पर्यावरण की महत्वपूर्ण जानकारी छिपी है। इनके अध्ययन से हजारों-लाखों साल पहले जलवायु और मानसून में हुए बदलावों, समुद्र के स्तर में परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के स्वरूप का पता चलता है। यही अध्ययन आज हो रहे जलवायु परिवर्तन को समझने में भी मदद कर रहा है।
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एआई से जुड़ेगा जीवाश्मों का अतीत
80वें स्थापना दिवस पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे ने बीएसआईपी में BRAHMA मिशन प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। यहां एआई और मशीन लर्निंग की मदद से देश की जीवाश्म विरासत का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अलग-अलग स्थानों से मिले जीवाश्मों की जानकारी एक जगह सुरक्षित होने से वैज्ञानिक बड़े स्तर पर उनका अध्ययन कर सकेंगे। प्रो. वाघमारे ने बताया कि बीएसआईपी का शोध अब जीवाश्म और पुराने पौधों तक सीमित नहीं है। जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण, जैव विविधता, प्राकृतिक आपदाओं, भू-विरासत और खगोल जीव विज्ञान जैसे विषयों पर भी काम हो रहा है। उन्होंने वर्ष 2027 में लखनऊ में होने वाली ‘INQUA कांग्रेस’ की मेजबानी मिलने पर संस्थान को बधाई दी।


केदारनाथ ने बताया चेतावनी का महत्व

स्थापना दिवस व्याख्यान में आईएमडी के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. आनंद शर्मा ने 2013 की केदारनाथ आपदा का उदाहरण देते हुए कहा कि पहाड़ों में भारी बारिश जैसे खतरों के संकेत समय रहते मिलें और लोगों तक पहुंचें तो जानमाल का नुकसान कम किया जा सकता है। समारोह में संस्थान के प्रकाशनों और ‘पुराविज्ञान स्मारिका’ के पांचवें अंक का विमोचन किया गया। हिंदी पखवाड़े की शुरुआत के साथ प्रयोगशालाओं और संग्रहालय का भ्रमण तथा ‘बादलों की तलाश में’ संवाद सत्र भी आयोजित हुआ।

बीएसआईपी के 80वें स्थापना दिवस पर हुआ आयोजन। 

बीएसआईपी के 80वें स्थापना दिवस पर हुआ आयोजन। 

बीएसआईपी के 80वें स्थापना दिवस पर हुआ आयोजन। 

बीएसआईपी के 80वें स्थापना दिवस पर हुआ आयोजन। 

बीएसआईपी के 80वें स्थापना दिवस पर हुआ आयोजन। 

बीएसआईपी के 80वें स्थापना दिवस पर हुआ आयोजन। 

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