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Lucknow News: घर में उपयोग किए जाने वाले सिलबट्टे भी पुरातत्व के अंग

Wed, 20 Aug 2025 08:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 20 Aug 2025 08:03 PM IST
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The grinding stones used in the house are also a part of archaeology
फोटो-अर्जुन साहू(अमर उजाला)कैसरबाग छतर मंजिल स्थित पुरातत्व निदेशालय के सभागार में आयोजित पुर
लखनऊ। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के साथ ही आप के घरों में उपयोग किए जाने वाले सिलबट्टे भी पुरातत्व के अंग हैं। क्योंकि, इसके माध्यम से भी पुरातात्विक इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है। बुधवार को राज्य पुरातत्व निदेशालय की ओर से शुरू हुई 11 दिवसीय पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने यह जानकारी दी।
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पूर्व महानिदेशक ने पुरातत्व के सभी विद्याओं, सर्वेक्षण, उत्खनन, संरक्षण एवं अपनी सांस्कृतिक धरोहरों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने व्यावहारिक जीवन में उपयोग हो रहे संसाधनों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया। गंगा घाटी में हो रहे वर्षा के प्रतिशत के आधार पर मानव के सांस्कृतिक स्वरूप को समझाने का प्रयास किया। इसके अलावा कालपी, लहुआदेवा, राजा नल का टीला, लद्दाख एवं जोगेष्वर, अल्मोड़ा, उत्तराखंड के पुरातात्विक स्थलों के बारे में भी जानकारी दी। शैलचित्र को परिभाषित करते हुए वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अयोध्या काण्ड के बारे में जानकारी दी।
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राज्य पुरातत्व निदेशालय की निदेशक रेनू द्विवेदी ने बताया कि गांव में मिट्टी के घर में उपयोग किए जाने वाले खपड़ा (खपरैल) भी पुरातत्व खोज का हिस्सा है। पुरातत्व विभाग की टीम जब किसी खोज के लिए गांव जाती थी लोग खपरैल बटोरने वाला कहकर संबोधित करते थे। शायद उन्हें पुरातत्व के बारे में जागरूक नहीं हुई होगी। यही वजह है कि सरकार की पहल से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
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निदेशक ने बताया कि पुरातात्विक विषय की जानकारी के लिए पुरातात्विक स्मारकों, स्थलों भ्रमण कराना चाहिए। जिससे किसी भी संस्कृति के उद्भव, विकास एवं प्रसार को समझ सके। कार्यशाला में यूपी के साथ ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, नई दिल्ली व अन्य राज्यों के विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज कुमार यादव, उत्खनन एवं अन्वेषण अधिकारी राम विनय, सहायक पुरातत्व अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार रस्तोगी, प्रकाशन सहायक बलिहारी सेठ व अन्य मौजूद रहें।
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