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Lucknow News: लखनवी विरासत व कला से रूबरू कराकर महोत्सव ने कहा अलविदा
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बांधनी कला का प्रदर्शन करतीं महिलाएं।
लखनऊ। कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी में चल रहे सनतकदा महोत्सव का मंगलवार को समापन हो गया। अंतिम दिन भी कला, साहित्य, संगीत और सिनेमाई प्रस्तुतियों ने रंग जमाया। दर्शक यहां मनोरंजन के साथ ही लखनऊ की समृद्ध विरासत और समकालीन कलाओं से रूबरू हुए।
मंगलवार को फिल्मिस्तान सत्र में गंभीर व संवेदनशील विषयों को उठाने वाली फिल्मों से लेकर हास्य और व्यंग्य से भरी कहानियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। पुरंदर चौधरी की निर्देशित फिल्म धुशोर ने सिनेमा की गहराई दिखाई तो रिजवान सिद्दीकी की फिल्म इमामदस्ता ने रहस्य और हास्य का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत किया। फिल्म हमारी गली, हमारी दुनिया, गलियों के साथी और कहानी हर मोड़ पर में लखनऊ की गलियों की पुरानी यादों और समकालीन वास्तविकताएं प्रदर्शित की गईं।
समापन पर वाइल्ड-वाइल्ड वूमेन ने शानदार प्रदर्शन दिया। भारत के प्रमुख महिला हिप-हॉप समूह ने अपने गानों में हिंदी, मराठी, तमिल और कन्नड़ भाषाओं का मिश्रण कर महिलाओं के जटिल अनुभवों को अपनी रचनात्मकता में पिरोया।
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कपड़ों को रंगने की पुरानी तकनीक का प्रदर्शन
बांधनी कला की प्रस्तुति बज़्म-ए-हुनर के तहत बांधनी कला का शानदार प्रदर्शन हुआ। यह प्राचीन भारतीय कला मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान में प्रचलित है। इसमें कपड़ों पर रंग और पैटर्न बनाने की अनूठी तकनीक दिखाई गई। वहीं, किड्स कॉर्नर में कठपुतली शो गुलाबी गली का जादू ने बच्चों का मनोरंजन किया। वहीं, लखनऊ की दास्तान सांस्कृतिक कार्यक्रम में क्लासिक उर्दू रोमांस महाकाव्य ‘तिलिस्म-ए-होशरुबा’ का शानदार मंचन हुआ, जिसे मास्टर कहानीकार दानिश हुसैन ने प्रस्तुत किया। इसने दर्शकों को लखनऊ के ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्व से जुड़ा अनुभव दिया।
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मंगलवार को फिल्मिस्तान सत्र में गंभीर व संवेदनशील विषयों को उठाने वाली फिल्मों से लेकर हास्य और व्यंग्य से भरी कहानियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। पुरंदर चौधरी की निर्देशित फिल्म धुशोर ने सिनेमा की गहराई दिखाई तो रिजवान सिद्दीकी की फिल्म इमामदस्ता ने रहस्य और हास्य का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत किया। फिल्म हमारी गली, हमारी दुनिया, गलियों के साथी और कहानी हर मोड़ पर में लखनऊ की गलियों की पुरानी यादों और समकालीन वास्तविकताएं प्रदर्शित की गईं।
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समापन पर वाइल्ड-वाइल्ड वूमेन ने शानदार प्रदर्शन दिया। भारत के प्रमुख महिला हिप-हॉप समूह ने अपने गानों में हिंदी, मराठी, तमिल और कन्नड़ भाषाओं का मिश्रण कर महिलाओं के जटिल अनुभवों को अपनी रचनात्मकता में पिरोया।
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कपड़ों को रंगने की पुरानी तकनीक का प्रदर्शन
बांधनी कला की प्रस्तुति बज़्म-ए-हुनर के तहत बांधनी कला का शानदार प्रदर्शन हुआ। यह प्राचीन भारतीय कला मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान में प्रचलित है। इसमें कपड़ों पर रंग और पैटर्न बनाने की अनूठी तकनीक दिखाई गई। वहीं, किड्स कॉर्नर में कठपुतली शो गुलाबी गली का जादू ने बच्चों का मनोरंजन किया। वहीं, लखनऊ की दास्तान सांस्कृतिक कार्यक्रम में क्लासिक उर्दू रोमांस महाकाव्य ‘तिलिस्म-ए-होशरुबा’ का शानदार मंचन हुआ, जिसे मास्टर कहानीकार दानिश हुसैन ने प्रस्तुत किया। इसने दर्शकों को लखनऊ के ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्व से जुड़ा अनुभव दिया।