फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   The echo of women empowerment in the tune of Dhak

Lucknow News: ढाक की धुन में महिला सशक्तीकरण की गूंज

Tue, 03 Feb 2026 02:29 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 02:29 AM IST
विज्ञापन
The echo of women empowerment in the tune of Dhak
सनतकदा में प्रस्तुति देने आए ढाक सम्राट के नाम से मशहूर पद्मश्री गोकुल चंद्र दास। -अमर उजाला
अभिषेक सहज
विज्ञापन

लखनऊ। ढाक एक ऐसा वाद्ययंत्र है जो पश्चिम बंगाल में अमूमन दुर्गा पूजा व अन्य उत्सवों पर बजाया जाता है। यह वाद्ययंत्र अब पश्चिम बंगाल की सीमा से निकलकर देश के अन्य हिस्सों और विदेश तक में लोकप्रिय हो चुका है। इसे लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है ढाक सम्राट के नाम से मशहूर गोकुल चंद्र दास ने। उन्हें इसके लिए 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। वर्षों तक इस वाद्ययंत्र को केवल पुरुष ही बजाते थे लेकिन गोकुल चंद्र ने इस परंपरा को तोड़ते हुए 2010 में महिलाओं को ढाक बजाने का प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज उनके 240 कलाकारों के समूह में 90 महिलाएं शामिल हैं।
कैसरबाग में चल रहे सनतकदा फेस्टिवल में प्रस्तुति देने आए गोकुल चंद्र दास ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में बताया कि उनके परिवार में पिछली कई पीढि़यों से यही काम होता रहा है। बोले, मैंने भी पांच साल की उम्र में अपने पिता मतिलाल दास से ढाक बजाना सीखा। ढाक को दुर्गा पूजा पंडालों से निकालकर समारोहों और आमजन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले गोकुल चंद्र दास ने बताया कि उन्होंने पं. रविशंकर और उस्ताद जाकिर हुसैन जैसे संगीतकारों के साथ विदेश में ढाक वादन किया। अमेरिका के अलावा इंडोनेशिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, नार्वे, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया समेत बहुत से देशों में ढाक की प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि पहले ढाक केवल पुरुष बजाते थे लेकिन देश में पहली बार उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज उनके ग्रुप में करीब 90 महिला ढाकिया हैं। इससे इस क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण को काफी बल मिला और अब बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल व अन्य प्रदेशों में महिलाएं ढाक बजा रही हैं।
विज्ञापन


पद्मश्री मिलने के बाद भी नहीं बढ़ाया मेहनताना

एक सवाल के जवाब में गोकुल चंद्र दास ने बताया कि भारत सरकार की ओर से पद्मश्री मिलने के बाद से उन्हें पूरे देश में नाम और सम्मान मिला है लेकिन इससे उनके स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। उन्हाेंने बताया कि पद्मश्री मिलने के बाद उन्हें देश के बाकी हिस्सों से भी खूब बुलाया जाता है लेकिन उन्होंने अपना मेहनताना नहीं बढ़ाया। वे आज भी उसी मेहनताने पर काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed