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Lucknow News: कमजोर जमीन दोबारा मजबूत करने की चुनाैती
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लखनऊ। लखनऊ। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ शहरी क्षेत्र की पांच में से दो सीटें जीतने के बावजूद समाजवादी पार्टी (सपा) की पकड़ लगातार कमजोर होती दिख रही है। नगर निकाय चुनाव में जहां पार्टी के पार्षदों की संख्या में भारी गिरावट आई है, वहीं संगठनात्मक मजबूती के मोर्चे पर भी सपा कांग्रेस से पीछे नजर आ रही है।
लखनऊ के 110 वार्डों में वर्ष 2017 में सपा ने 37 पार्षदों के साथ मजबूत उपस्थिति दर्ज की थी, लेकिन 2023 के निकाय चुनाव में यह संख्या घटकर महज 22 रह गई। यह पिछले 20 वर्षों में सपा का सबसे न्यूनतम पार्षद प्रतिनिधित्व है।
इसके बावजूद पार्टी अब तक महानगर इकाई में कमेटियों की घोषणा नहीं कर पाई है। केवल अध्यक्ष की नियुक्ति तक सीमित रह गई है, जबकि कांग्रेस ने अपनी रणनीतिक तैयारियों में सपा से बाजी मार ली है।
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2027 की तैयारी में पिछड़ रही सपा
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जहां सभी दल तैयारियों में जुटे हैं, वहीं सपा के पास स्पष्ट कार्ययोजना का अभाव नजर आता है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने वाली सपा अपनी सहयोगी पार्टी की तुलना में भी कमजोर संगठनात्मक स्थिति में है।
लखनऊ पूर्व सीट बनी चुनौती
लखनऊ पूर्व विधानसभा सीट सपा के लिए हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। हर चुनाव में इस सीट पर पार्टी की हार का अंतर बाकी सीटों की तुलना में काफी ज्यादा रहा है। हालिया लोकसभा चुनाव में भी पार्टी यहां 71 हजार से अधिक मतों से पीछे रही। यह स्थिति संकेत देती है कि यदि सपा को लखनऊ में वापसी करनी है, तो लखनऊ पूर्व जैसे सीटों पर विशेष रणनीति और जमीनी काम जरूरी होगा। हालांकि, फिलहाल ऐसी कोई ठोस तैयारी दिखाई नहीं दे रही है।
विधानसभा सीटवार सपा पार्षदों की संख्या
विधानसभा सीट- वार्ड- जीते पार्षद- हारे पार्षद
लखनऊ पश्चिम- 18- 4- 14
लखनऊ उत्तर- 21- 2- 19
लखनऊ पूर्व- 19- 2- 17
लखनऊ मध्य- 16- 5- 11
लखनऊ कैंट- 12- 2- 10
जिला क्षेत्र- 24- 7- 17
कुल- 110- 22- 88
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लखनऊ के 110 वार्डों में वर्ष 2017 में सपा ने 37 पार्षदों के साथ मजबूत उपस्थिति दर्ज की थी, लेकिन 2023 के निकाय चुनाव में यह संख्या घटकर महज 22 रह गई। यह पिछले 20 वर्षों में सपा का सबसे न्यूनतम पार्षद प्रतिनिधित्व है।
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इसके बावजूद पार्टी अब तक महानगर इकाई में कमेटियों की घोषणा नहीं कर पाई है। केवल अध्यक्ष की नियुक्ति तक सीमित रह गई है, जबकि कांग्रेस ने अपनी रणनीतिक तैयारियों में सपा से बाजी मार ली है।
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2027 की तैयारी में पिछड़ रही सपा
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जहां सभी दल तैयारियों में जुटे हैं, वहीं सपा के पास स्पष्ट कार्ययोजना का अभाव नजर आता है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने वाली सपा अपनी सहयोगी पार्टी की तुलना में भी कमजोर संगठनात्मक स्थिति में है।
लखनऊ पूर्व सीट बनी चुनौती
लखनऊ पूर्व विधानसभा सीट सपा के लिए हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। हर चुनाव में इस सीट पर पार्टी की हार का अंतर बाकी सीटों की तुलना में काफी ज्यादा रहा है। हालिया लोकसभा चुनाव में भी पार्टी यहां 71 हजार से अधिक मतों से पीछे रही। यह स्थिति संकेत देती है कि यदि सपा को लखनऊ में वापसी करनी है, तो लखनऊ पूर्व जैसे सीटों पर विशेष रणनीति और जमीनी काम जरूरी होगा। हालांकि, फिलहाल ऐसी कोई ठोस तैयारी दिखाई नहीं दे रही है।
विधानसभा सीटवार सपा पार्षदों की संख्या
विधानसभा सीट- वार्ड- जीते पार्षद- हारे पार्षद
लखनऊ पश्चिम- 18- 4- 14
लखनऊ उत्तर- 21- 2- 19
लखनऊ पूर्व- 19- 2- 17
लखनऊ मध्य- 16- 5- 11
लखनऊ कैंट- 12- 2- 10
जिला क्षेत्र- 24- 7- 17
कुल- 110- 22- 88