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Lucknow News: अंग्रेज अफसर ने एक दिन बाद दी थी रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु की सूचना
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लखनऊ। अंग्रेजों से युद्ध करते हुए झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को 18 जून 1858 को वीरगति प्राप्त हुई थी। दरअसल रानी उस समय मर्दाना वेष में थीं, इसलिए उनकी मृत्यु की सूचना आमजन तक देरी से पहुंच सकी थी। उनकी वीरगति की पुष्टि एक टेलीग्राम से स्पष्ट हुई थी। यह टेलीग्राम 19 जून 1858 को ग्वालियर से आर. हैमिल्टन ने कलकत्ता में लार्ड कैनिंग को भेजा था। इसमें लिखा था कि एक दिन पहले 18 जून को रानी लक्ष्मीबाई की युद्ध में मौत हो गई है। राजकीय अभिलेखागार में इन दिनों चल रही प्रदर्शनी में टेलीग्राम की इस प्रति को हर कोई उत्सुकता से देख रहा है।
10 मई तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में कई दुर्लभ दस्तावेज हैं। यहां रानी लक्ष्मीबाई के हाथ से बुंदेली भाषा में लिखा वह पत्र भी मौजूद है जिसमें उन्होंने नाना साहब से अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध के लिए मदद की गुहार लगाई थी। इस पत्र पर 19 फरवरी 1858 की तारीख लिखी है। रानी ने नाना साहब से मदद के लिए जल्द से जल्द सेना भेजने को कहा था। प्रदर्शनी में ही एक और दस्तावेज है जिससे इस बात का प्रमाण मिलता है कि अंग्रेजों ने रानी लक्ष्मीबाई और नाना साहब की कितनी संपत्ति जब्त की थी। पत्र में जब्त संपत्ति की कुल कीमत उस समय 33,296 रुपये दर्शाई गई थी।
नाना साहब पेशवा पर था एक लाख का इनाम
1857 के स्वतंत्रता संग्राम में नाना साहब पेशवा कानपुर से अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का नेतृत्व कर रहे थे। नाना साहब ने अग्रेजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। बौखलाए अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने में मदद करने वाले को उस समय एक लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी। इसके लिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने उर्दू और फारसी भाषा में एक इश्तहार जारी किया था। इस इश्तहार की एक प्रति राजकीय अभिलेखागार में लगी प्रदर्शनी में भी रखी गई है। उस समय नाना साहब पर रखे गए इनाम की राशि से ही इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों के लिए वह किस कदर आंख की किरकिरी बन चुके थे। इतिहासकारों की मानें तो उस जमाने में एक लाख रुपये की धनराशि मौजूदा समय में 100 करोड़ से अधिक होगी।
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10 मई तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में कई दुर्लभ दस्तावेज हैं। यहां रानी लक्ष्मीबाई के हाथ से बुंदेली भाषा में लिखा वह पत्र भी मौजूद है जिसमें उन्होंने नाना साहब से अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध के लिए मदद की गुहार लगाई थी। इस पत्र पर 19 फरवरी 1858 की तारीख लिखी है। रानी ने नाना साहब से मदद के लिए जल्द से जल्द सेना भेजने को कहा था। प्रदर्शनी में ही एक और दस्तावेज है जिससे इस बात का प्रमाण मिलता है कि अंग्रेजों ने रानी लक्ष्मीबाई और नाना साहब की कितनी संपत्ति जब्त की थी। पत्र में जब्त संपत्ति की कुल कीमत उस समय 33,296 रुपये दर्शाई गई थी।
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नाना साहब पेशवा पर था एक लाख का इनाम
1857 के स्वतंत्रता संग्राम में नाना साहब पेशवा कानपुर से अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का नेतृत्व कर रहे थे। नाना साहब ने अग्रेजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। बौखलाए अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने में मदद करने वाले को उस समय एक लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी। इसके लिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने उर्दू और फारसी भाषा में एक इश्तहार जारी किया था। इस इश्तहार की एक प्रति राजकीय अभिलेखागार में लगी प्रदर्शनी में भी रखी गई है। उस समय नाना साहब पर रखे गए इनाम की राशि से ही इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों के लिए वह किस कदर आंख की किरकिरी बन चुके थे। इतिहासकारों की मानें तो उस जमाने में एक लाख रुपये की धनराशि मौजूदा समय में 100 करोड़ से अधिक होगी।
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