खून की एक बूंद से पता चलेगा शरीर में कितनी है जहरीली शराब
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मलिहाबाद में हुई जहरीली शराब की घटना के बाद केजीएमयू सतर्क हो गया है। ऐसी किसी दुर्घटना के होने पर अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके इसके लिए यूनिवर्सिटी ऑफ नार्वे से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत जांच की व्यवस्था की जा रही है।
इसके तहत केजीएमयू में नार्वे की टीम पैथोलॉजी का ऐसा सेटअप बनाएगी जहां ऐसी किसी घटना के पीड़ितों के खून की फौरन जांच कर ये पता लगाया जा सकेगा कि उनके रक्त में जहर का असर कितना है और आने वाले समय में उनको कितना नुकसान होता है।
जहरीली शराब पीने के बाद एक झटके में 50 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों की जान पर आफत बनने के बाद केजीएमयू के कुलपति प्रो. रविकांत ने मंगलवार को यूनिवर्सिटी ऑफ नार्वे के अधिकारियों से टेली कॉन्फ्रेसिंग से बात कर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत जांच की व्यवस्था शुरू कराने की बात कही है।
नार्वे की टीम पहुंचेगी केजीएमयू
नार्वे की टीम जल्द ही केजीएमयू पहुंचेगी और सेटअप लगाने की तैयारियों का खाका तैयार करेगी। नार्वे में इस तरह की सुविधा है और शराब पीड़ितों की जान बचाने के लिए इस जांच का सहारा लिया जाता है। वहीं केजीएमयू में अभी तक जहर के स्तर को मांपने के लिए एल्बुमिन और क्रेटनीन समेत अन्य जांचें होती हैं।
केजीएमयू के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि फॉर्मिक एसिड और मिथाइल अल्कोहल पीने के बाद जहरीले कण खून में आ जाते हैं। रक्त में जहरीले कण के मिश्रण के बाद हृदय, गुर्दा और आंखों को अधिक नुकसान होता है।
कुछ देर बाद यही जहर एसिडोसिस बन जाता है और शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं जिसके बाद मरीज की मौत हो जाती है। ऐसे मरीजों की समय रहते जांच हो सके और भविष्य के खतरे को भांप लिया जाए इसके लिए ये व्यवस्था की जा रही है।