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पोषाहार आपूर्ति के लिए टेंडर का मसौदा तैयार, नई शर्तें शामिल, बिचौलियों की छुट्टी
Tue, 11 Aug 2020 11:13 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 11 Aug 2020 11:13 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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पोषाहार आपूर्ति से पंजीरी कंपनियों का एकाधिकार खत्म करने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके तहत बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने पोषाहार आपूर्ति के टेंडर का नया मसौदा तैयार कर लिया है। इसमें पंजीरी कंपनियों से 18 जिलों का काम हटा लिया गया है।
इनसे अब सिर्फ 57 जिलों में ही पोषाहार की आपूर्ति ली जाएगी। वर्ष 2018 में दो साल के लिए टेंडर हुआ था, जिसमें 75 जिलों में पंजीरी आपूर्ति का काम 14 कंपनियों को दिया गया। इस टेंडर की अवधि इस साल अप्रैल में समाप्त हो गई थी।
नया टेंडर न होने की वजह से सरकार ने पुराने टेंडर की अवधि को चार महीने के लिए बढ़ा दिया था, जो अगस्त में ही पूरा हो रहा है। इसके मद्देनजर विभाग ने नए टेंडर का मसौदा तैयार कर लिया है। इसका विज्ञापन भी जारी कर दिया गया है।
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पुराने की तुलना में नए टेंडर में कई नई शर्तों को शामिल किया गया है। टेंडर में वही फर्म भाग ले सकेंगी, जो पंजीरी की मूल उत्पादक या निर्माता होंगी। ठेकेदार व्यापारी, बिचौलिया वितरक, डीलर या एजेंट को टेंडर की पात्रता से बाहर कर दिया गया है।
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इनसे अब सिर्फ 57 जिलों में ही पोषाहार की आपूर्ति ली जाएगी। वर्ष 2018 में दो साल के लिए टेंडर हुआ था, जिसमें 75 जिलों में पंजीरी आपूर्ति का काम 14 कंपनियों को दिया गया। इस टेंडर की अवधि इस साल अप्रैल में समाप्त हो गई थी।
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नया टेंडर न होने की वजह से सरकार ने पुराने टेंडर की अवधि को चार महीने के लिए बढ़ा दिया था, जो अगस्त में ही पूरा हो रहा है। इसके मद्देनजर विभाग ने नए टेंडर का मसौदा तैयार कर लिया है। इसका विज्ञापन भी जारी कर दिया गया है।
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पुराने की तुलना में नए टेंडर में कई नई शर्तों को शामिल किया गया है। टेंडर में वही फर्म भाग ले सकेंगी, जो पंजीरी की मूल उत्पादक या निर्माता होंगी। ठेकेदार व्यापारी, बिचौलिया वितरक, डीलर या एजेंट को टेंडर की पात्रता से बाहर कर दिया गया है।
नए टेंडर में वैष्णो रानी महिला बचत बनाम महाराष्ट्र राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का शत-प्रतिशत पालन करने की शर्त को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा पंजीरी कंपनियों के लिए कलर कोडिंग की व्यवस्था की गई है।
इसमें पीले रंग का पैकेट गर्भवती और धात्री माताओं के लिए हल्का गुलाबी रंग किशोरी बालिकाओं के लिए आसमानी व नीला 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए, हल्का हरा रंग का पैकेट 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए और लाल रंग का पैकेट गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को दिया जाएगा।
बार कोडिंग की जगह होगी क्यूआर कोडिंग
पिछले टेंडर में पोषाहार के पैकेट पर बार कोडिंग की शर्त थी, लेकिन इस बार क्यूआर कोडिंग की शर्त रखी गई है। क्यूआर कोडिंग के साथ ही पैकेट पर अमिट स्याही का भी प्रयोग किया जाएगा। एक बैग में 10 लाभार्थियों के पैकेट रखे जाएंगे और पैकेटों पर क्यूआर कोड प्रिंटेड होगा।
मोबाइल से इसे स्कैन करते ही पोषाहार की गुणवत्ता व निर्माता कंपनियों का पूरा विवरण आ जाएगा। क्यूआर कोडिंग कराने की जिम्मेदारी भी उसी कंपनी की होगी जो पोषाहार की आपूर्ति करेगी। क्यूआर कोड जेनरेशन करने की जिम्मेदारी भी उसी कंपनी की होगी।
इसमें पीले रंग का पैकेट गर्भवती और धात्री माताओं के लिए हल्का गुलाबी रंग किशोरी बालिकाओं के लिए आसमानी व नीला 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए, हल्का हरा रंग का पैकेट 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए और लाल रंग का पैकेट गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को दिया जाएगा।
बार कोडिंग की जगह होगी क्यूआर कोडिंग
पिछले टेंडर में पोषाहार के पैकेट पर बार कोडिंग की शर्त थी, लेकिन इस बार क्यूआर कोडिंग की शर्त रखी गई है। क्यूआर कोडिंग के साथ ही पैकेट पर अमिट स्याही का भी प्रयोग किया जाएगा। एक बैग में 10 लाभार्थियों के पैकेट रखे जाएंगे और पैकेटों पर क्यूआर कोड प्रिंटेड होगा।
मोबाइल से इसे स्कैन करते ही पोषाहार की गुणवत्ता व निर्माता कंपनियों का पूरा विवरण आ जाएगा। क्यूआर कोडिंग कराने की जिम्मेदारी भी उसी कंपनी की होगी जो पोषाहार की आपूर्ति करेगी। क्यूआर कोड जेनरेशन करने की जिम्मेदारी भी उसी कंपनी की होगी।