अगर हैं ये लक्षण तो समझ लीजिए बहरे हो रहे हैं आप
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आपको क्या कुछ दिनों से सुनने में परेशानी हो रही है? जब भी आप किसी से बात करते हैं, तो आपको सामने वाले के शब्द साफ-साफ सुनाई नहीं देते? उन्हें आपके सामने तेज आवाज में बोलना पड़ता है?
यदि ऐसा है, तो हो सकता है आप ′हियरिंग लॉस′ की समस्या से पीड़ित हों। हियरिंग लॉस यानी आवाज सुनने की क्षमता का कम हो जाना। स्पष्ट सुनने में परेशानी, आवाज का बहुत कम सुनाई देना, शोरगुल के बीच समझने में दिक्कत होना आदि हियरिंग लॉस के अंतर्गत आता है।
हियरिंग लॉस दो प्रकार का होता है, पहला कंडक्टिव हियरिंग लॉस और दूसरा सेंसोरीन्यूरल हियरिंग लॉस। यदि आपको भी सुनने में दिक्कत होती है, तो इसे हल्के में न लें, नहीं तो आप बहरेपन के शिकार हो सकते हैं। अमेरिका में होने वाली स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं में हियरिंग लॉस तीसरी सबसे आम बीमारी है।
कई बार बढ़ती उम्र के साथ ही सुनने की क्षमता भी कम होने लगती है, तो कई बार फैक्ट्री में काम करने वाले मैकेनिक की सुनने की क्षमता कम हो जाती है। यह समस्या जन्मजात भी होती है और दवाओं के दुष्प्रभावों से भी हो सकता है।
चूंकि कान शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है, इसलिए तेज आवाज के संपर्क में लगातार रहने, कानों पर ईयर- फोन लगाकर देर तक गाना सुनने जैसी आदतें भी कान के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं।
यहां जानें लक्षण
आप दो या दो से ज्यादा लोगों से बात कर रहे हैं और उनकी बातें ठीक से सुनने में परेशानी हो या स्पष्ट सुनाई न दे, तो यह हियरिंग लॉस से संबंधित बीमारी के कुछ लक्षण हैं।
कई बार सुनने की क्षमता में कमी आने के शुरुआती लक्षण जल्दी समझ नहीं आते। ऐसी स्थिति में लोग इसे नजरअंदाज करते चले जाते हैं, जिससे सुनने की क्षमता में आई कमी समय के साथ-साथ धीरे-धीरे कम होती चली जाती है।
सामान्य बातचीत सुनने में भी दिक्कत आना, बार-बार लोगों से बात को दुहराने के लिए कहना, फोन पर बात के दौरान कम सुनाई देना, अन्य लोगों के मुकाबले तेज आवाज में टीवी या संगीत सुनना। यहां तक कि बच्चों, पक्षियों या बारिश की आवाज को भी न सुन पाना आदि इसके कुछ लक्षण हैं।
सुनने में तकलीफ कई कारणों और किसी भी उम्र में हो सकती है। कंडक्टिव हियरिंग लॉस कानों से पस बहने, ईयर कनाल में इंफेक्शन, कान की हड्डी में गड़बड़ी, पर्दे के डैमेज होने या कान का ट्यूमर, एलर्जी के कारण होता है।
सेंसोरीन्यूरल हियरिंग लॉस तब होता है, जब कान के भीतरी हिस्से (इनर ईयर, जिसे नर्व से संबंधित हियरिंग लॉस भी कहते हैं) में कोई समस्या उत्पन्न हो जाए, सुनने वाली कोशिकाओं में गड़बड़ी, उनका कमजोर हो जाना या नष्ट होना, उम्र के बढ़ने, तेज आवाज में एक्सपोजर, सिर से संबंधित ट्रॉमा, ट्यूमर, वायरस, ऑटोइम्यून इनर ईयर डिजीज आदि से भी होता है।
ऐसे बरतें सावधानी
अगर तेज आवाज वाले स्थान पर काम करते हैं, तो कानों में ईयर प्लग या रुई लगाकर रखें। कान में हर समय ईयरबड, सरसों का तेल न डालें। तेज आवाज में टीवी या संगीत न सुनें। नहाते समय उंगली से कानों की सफाई न करें।
ऐसी जगह जहां ध्वनि प्रदूषण ज्यादा होती है जैसे एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या फैक्ट्री आदि में तो कान को ढक कर रखें। 45 वर्ष की उम्र के बाद कानों का चेकअप कराते रहें।
बातचीत के दौरान आपको कम सुनाई पड़ता है,कभी-कभी सुनने के लिए भी सामने वाले के बहुत करीब जाना पड़ता है, तो इसे गंभीरता से लें। और बिना देर किए चिकित्सक से मिलें।
आमतौर पर हियरिंग लॉस की समस्या बचपन से ही देखी जाती है। प्रेग्नेंसी के समय कई बार महिलाएं सावधानी नहीं बरततीं, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को यह समस्या हो जाती है। तपेदिक, मधुमेह और मलेरिया की दवाओं के सेवन से भी कई बार लोगों की सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है।
हाई ब्लडप्रेशर, दिमागी बुखार या फिर ज्यादा शोर-शराबे वाला माहौल भी इसका एक मुख्य कारण है। यदि आपका कान लगातार बह रहा हो, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं।
कंडक्टिव हियरिंग लॉस में सुनने की शक्ति पहले जैसी हो सकती है, लेकिन सेंसोरीन्यूरल हियरिंग लॉस में इसे वापस नहीं लाया जा सकता। इसलिए तेज आवाज से जितना हो सकें दूर रहें। कान में तेल, ईयरबड, पिन, पेन आदि जैसी चीजें न डालें। सड़क पर बैठे किसी कान साफ करने वाले से कानों को साफ न कराएं। कान में मैल होने या दर्द होने पर ईएनटी से संपर्क करें।