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एसयूवी ने स्कूटी सवार युवकों को रौंदा, दो किलोमीटर दूरी से कर रहे थे पीछा

Sat, 17 Aug 2019 01:30 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 17 Aug 2019 01:30 AM IST
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Suv hited scooty, two friend killed and on injured
एसयूवी से दो किमी. पीछा कर स्कूटी को रौंदा, दो दोस्तों की मौत, एक जख्मी
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इंदिरानगर थानाक्षेत्र के अरविंदो पार्क पुलिस चौकी के पास बुधवार रात तेज रफ्तार एसयूवी ने स्कूटी सवार तीन युवकों को रौंद दिया।
हादसे में हाईकोर्ट के डिप्टी रजिस्ट्रार सूबेदार सिंह के बेटे पवन (23) व उसके दोस्त तुषार (22) की मौत हो गई। तीसरा साथी हिमांशु (24) गंभीर रूप से घायल हो गया।
उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डिप्टी रजिस्ट्रार का आरोप है कि कलेवा चौराहे से दो किलोमीटर तक पीछा कर वारदात अंजाम दी गई।
पार्क के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात कैद हो गई है। पिता की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। एएसपी ट्रांसगोमती अमित कुमार के मुताबिक, 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।
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एएसपी के मुताबिक , कमता के शंकरपुरी कॉलोनी निवासी सूबेदार सिंह ने बताया कि छोटा बेटा पवन सिंह गोंडा के सरयू डिग्री कॉलेज से बीकॉम तृतीय वर्ष का छात्र था।
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बुधवार दोस्त सचिन चौधरी संग वह शहीद पथ की तरफ गया था। विभूतिखंड स्थित शहीद पथ पर उसे तुषार स्कूटी लेकर मिला।
इसके बाद पवन व तुषार इंदिरानगर के सेक्टर-21 में रहने वाले दोस्त हिमांशु के घर गए। इसके बाद तीनों स्कूटी से भूतनाथ बाजार गए।
रात करीब 9.15 बजे मां पूजा ने कॉल की पवन ने कुछ देर में घर पहुंचने की जानकारी दी। रात करीब 9.50 बजे पवन व हिमांशु मथुरा विहार निवासी तुषार को छोड़ने उसके घर जा रहे थे।
अरविंदो पार्क पुलिस चौकी के पास पीछे से आ रही एसयूवी ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में तीनों दोस्त पार्क के पास बने फुटपाथ पर गिर गए और एसयूवी सवार इंदिरानगर के सेक्टर-8 की तरफ भाग निकले।
हादसे के बाद घायल चीख-पुकार कर रहे थे। जबकि राहगीर मदद के बजाए वीडियो बनाने में लगे थे। यह देख कुछ अन्य लोगों ने वीडियो बना रहे लोगों को डपटा और एंबुलेंस को सूचना दी।
एंबुलेंस पहुंचने में देर हुई तो घायलों को डाला से लोहिया अस्पताल भेजा गया। जहां डॉक्टरों ने पवन व तुषार को मृत घोषित कर दिया।
जबकि हिमांशु को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। सूचना पर पवन के भाई पंकज और पिता सूबेदार सिंह लोहिया अस्पताल पहुंचे।
वहीं, पुलिस से जानकारी पाकर परिवारीजनों ने हिमांशु को निजी अस्पताल में भर्ती कराया। उसके सिर में गंभीर चोट लगी है। ऑपरेशन किया गया है।
सप्ताहभर पहले हुआ था विवाद, पुलिस की लापरवाही से हुई वारदात
इंदिरानगर पुलिस की लापरवाही से दो घरों में रक्षाबंधन जैसे त्योहार के दिन जवान बेटों का शव पहुंचा। पवन के पिता सूबेदार सिंह बोल पड़े कि आखिर मेरे बेटे की क्या गलती थी, जो उसे मार डाला। सूबेदार सिंह ने इंदिरानगर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाये। सूबेदार सिंह ने बताया कि आठ अगस्त को हरिहरनगर निवासी संदीप सिंह ने उनके बेटे पवन को फोन कर बुलाया था। पवन बीडी लॉन के पास पहुंचा, जहां संदीप अपने साथी सचिन चौधरी, ईशूवीर सिंह और विक्की चौधरी के साथ मौजूद था। पवन के पहुंचते ही संदीप उसे गाली देने लगा। एतराज पर सचिन चौधरी व ईशूवीर सिंह ने रॉड और सरिये से पवन पर हमला बोल दिया। चोट लगने से पवन बेहोश होकर गिर पड़ा। इस बीच आरोपितों ने उसका मोबाइल व रुपये भी लूट लिये। पवन की स्कूटी भी तोड़ दी थी। चार दिन बाद पवन के बड़े भाई पंकज सिंह को घटना की जानकारी हुई। इसके बाद 12 को पवन ने इंदिरानगर थाने में संदीप, सचिन, ईशूवीर सिंह और विक्की चौधरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
दो बार रौंदने की कोशिश
पुलिस के मुताबिक, एसयूवी सवार बदमाशों ने तीनों दोस्तों पर हमला करने के लिए दो किलोमीटर तक दौड़ाया। बदमाशों ने इंदिरानगर के कलेवा चौराहे से पीछा किया था। मुंशी पुलिया मेट्रो स्टेशन होते हुए स्कूटी सवार आरएलबी स्कूल की तरफ मुड़े। बीच में एक जगह तीनों को रौंदने की कोशिश की। स्कूटी सवारों को साजिश का एहसास हो गया था। तीनों ने बचने के लिए अरविंदो पार्क की तरफ मुड़ने के बाद कुछ दूरी पर स्कूटी सड़क की दूसरी दिशा में कर दी। ताकि उनसे बच सकें। लेकिन एसयूवी सवार भी उलटी दिशा की तरफ तेजी से बढ़े। एक जगह हमला करने की कोशिश की। तीसरी कोशिश में एसयूवी सवार अपने मंसूबों में सफल हो गए और अरविंदो पार्क के गेट नंबर दो पर तीनों दोस्तों को रौंद दिया।
सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई घटना
सीओ गाजीपुर दीपक कुमार सिंह के मुताबिक, वारदात स्थल से लेकर कलेवा चौराहे तक 27 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसमें मेट्रो स्टेशन, आरएलबी स्कूल व अरविंदो पार्क के पास के मकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में एसयूवी सवार बदमाशों की करतूत कैद हो गई है। हालांकि एसयूवी का नंबर नहीं मिल सका है। पवन पर जिन लोगों ने हमला किया था। उस मामले में जुड़े सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

आरोपियों को बचाने में जुटी रही पुलिस
भाई पंकज ने आरोप लगाया कि मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस आरोपियों को बचाने में जुट गई। बार-बार कहने के बावजूद पुलिस ने लापरवाही बरती। दूसरी तरफ मुकदमा दर्ज होने की जानकारी होते ही धमकी दी जाने लगी थी। डर की वजह से पव ने घर से निकलना बंद कर दिया था। डर-सहमे पवन ने मुकदमा वापस लेने व समझौता का मन भी बना लिया था। पंकज ने बताया कि जरा भी आशंका होती तो उसे पवन को जाने ही नहीं देते।
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