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बॉर्डर पर पकड़ी गई 'किराये की कोख' देने वाली महिलाएं, बड़े खुलासे

Mon, 14 Sep 2015 10:19 PM IST
Updated Mon, 14 Sep 2015 10:19 PM IST
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surrogacy business is done on indo-nepal border

इंडो-नेपाल बॉर्डर पर बडे़ पैमाने पर किराये की कोख का कारोबार चल रहा है। इस रैकेट का संचालन दिल्ली से किया जा रहा है। दिल्ली, मुंबई से तमाम युवतियों को नेपालगंज, पोखरा व काठमांडू में ओवम डोनेट (अंडाणु दान) करने के लिए भेजा जा रहा है।

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ओवम को नेपालगंज व पोखरा स्थित टेस्ट ट्यूब सेंटर में फ्रीज करके रखा जाता है। इसके बाद आईवीएफ तकनीक से नेपाली महिलाओं को गर्भधारण कराया जा रहा है। यह सनसनीखेज खुलासा शनिवार को रुपईडीहा बॉर्डर आउटपोस्ट पर पकड़ी गईं दार्जिलिंग की दो महिलाओं ने एसएसबी व पुलिस की पूछताछ में किया।
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इस कारोबार से नेपाल व दिल्ली के डॉक्टर करोड़ों रुपये की कमाई कर रहे हैं। एसएसबी व पुलिस ने साक्ष्यों के अभाव में महिलाओं को छोड़ दिया है, लेकिन जांच शुरू कर दी है। दोनों महिलाओं को एसएसबी एसआई मुन्नी बाई व सहायक सेनानायक जगजीत बहादुर ने कस्टडी में लिया था।

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चीन और जापान भेजा जाता है ओवम

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रुपईडीहा थाने के एसआई अजय कुमार पांडेय को पूछताछ के दौरान दोनों ने अपना नाम पूजा व सुषमा तमांग (परिवर्तित नाम) बताया। दोनों ने बताया कि नेपालगंज स्थित टेस्ट ट्यूब सेंटर का उद्घाटन एक वर्ष पूर्व दिल्ली की एक डॉक्टर ने किया था। यही डॉक्टर ओवम डोनेट करने के लिए युवतियों को भेजती हैं।

वह पोखरा के एक डॉक्टर व नेपालगंज मेडिकल कालेज के एक डॉक्टर के जरिए इस नेटवर्क का संचालन करती हैं। पूजा ने बताया कि उसने नेपालगंज के सेंटर में ओवम डोनेट किया है।

दोनों महिलाओं ने बताया कि भारतीय मूल की युवतियों के ओवम (अंडाणु) चीन, जापान व अन्य देशों को निर्यात किए जा रहे हैं। आईवीएफ तकनीक या टेस्ट ट्यूब बेबी पद्धति से गर्भ धारण कराया जा रहा है। दोनों महिलाओं में से एक महिला कैरियर के रुप में काम करती है तो दूसरी ओवम डोनेट करने के लिए दिल्ली से नेपालगंज पहुंची थी।

10 लाख कमाता संचालक, डोनर को 25 हजार

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ओवम डोनेट करने वाली महिलाओं को 25 हजार रुपये दिया जाता है। ओवम की सक्रियता बढ़ाने के लिए 14 दिनों तक हार्मोन का इंजेक्शन दिया जाता है। नेपालगंज स्थित टेस्ट ट्यूब सेंटर के लैब टेक्नीशियन युवती के संपर्क में रहते हैं।

महिला को सेहत दुरुस्त रखने के लिए दस हजार रुपये और दिए जाते हैं। इसके अलावा डोनर के साथ नेपाल आने वाली महिला को भी दस हजार रुपये दिए जाते हैं। जबकि इस ओवम से कारोबारी एक केस में लगभग 10 लाख रुपये की कमाई करते हैं।

एसएसबी व पुलिस ने नेपालगंज एसपी बसंत पंत से भी संपर्क साधा है और जांच में सहयोग करने की बात कही है। एसएसबी के कमांडेंट बीसी जोशी ने बताया कि इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।

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