फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Surgery in Balrampur hospital.

कंधे से चिपके हाथ को दुरुस्त कर बच्चे को दी नई जिंदगी

Sun, 01 May 2016 04:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 01 May 2016 04:57 PM IST
विज्ञापन
Surgery in Balrampur hospital.
ऑपरेशन के पहले व ऑपरेशन के बाद - फोटो : amar ujala

बलरामपुर अस्पताल के प्लास्टिक सर्जन ने दो सर्जरी के बाद एक बच्चे को नई जिंदगी दी है। आग में बुरी तरह झुलसे बच्चे का बायां हाथ सीने से चिपक गया था जबकि पंजा पूरी तरह मुड़ गया था।

विज्ञापन


छह महीने पहले बच्चा बलरामपुर अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर उसकी हालत देख दंग रह गए। लंबे प्राथमिक उपचार के बाद 14 अप्रैल को पहली सर्जरी और एक हफ्ते बाद दूसरी सर्जरी कर बच्चे के चिपके हुए हाथ और पंजे को अलग किया गया। सर्जरी के दौरान बुरी तरह चिपके हाथ की धमनियां खराब होने का खतरा था लेकिन अब बच्चा तेजी से रिकवर कर रहा है।
विज्ञापन


सीतापुर का सुनील (10) भाड़ की आग में झुलस गया था। उसके बाएं हाथ की त्वचा चिपक गईं और हाथ का पंजा पूरी तरह मुड़ गया था।

बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस और प्लास्टिक सर्जन डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि छह महीने पहले जब सुनील अस्पताल आया तो आग में बुरी तरह जलने की वजह से उसका बायां हाथ सीने में धंस गया था, जबकि पंजा पूरी तरह मुड़कर गोल हो गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

पहले कलाई व पंजे को किया सीधा

Surgery in Balrampur hospital.
डॉ. राजीव लोचन - फोटो : amar ujala

डॉ. लोचन ने बताया कि बच्चे को सबसे पहले प्राथमिक उपचार दिया गया। जख्म भरने के बाद पहली सबसे पहले कलाई और पंजे को सीधा किया गया।

इसके बाद बीते 14 अप्रैल को सीने में धंसे हाथ को दो घंटे की सर्जरी के बाद अलग कर दिया गया। सीने से हाथ को अलग करने के सात दिन बाद उसकी प्लास्टिक सर्जरी की गई जिसमें डेढ़ घंटे का समय लगा।

अब बच्चा पूरी तरह ठीक है और पहले से बेहतर महसूस कर रहा है। डॉ. लोचन ने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी के लिए थाई से स्किन ली गई जबकि हाथ की स्किन को भी रिपेयर किया गया जिससे बच्चे के हाथ को ठीक किया जा सके।

धमनियों को नुकसान का था डर

Surgery in Balrampur hospital.

डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि सुनील की सर्जरी इसलिए कठिन थी क्योंकि धमनियां आपस में चिपक गई थीं और सर्जरी के दौरान उनके डैमेज होने का खतरा भी था।

डॉ. लोचन के मुताबिक, सर्जरी के दौरान धमनियों को नुकसान होने पर अधिक रक्तस्राव होने का खतरा था।

धमनियों को बचाने के लिए कई एंगल से सीटी स्कैन और एक्स-रे कराई गई थी जिससे धमनियों की स्थिति को पता किया जा सके और उनको नुकसान से बचाया जा सके।

प्राइवेट में 80 हजार रुपये का खर्च
डॉ. राजीव लोचन के मुताबिक, सुनील की सर्जरी किसी निजी अस्पताल में होती तो 80 हजार रुपये से अधिक खर्च होता।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed