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Lucknow News: मां के गर्भ में हो सकेगी शिशु की सर्जरी

Sun, 22 Feb 2026 02:16 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 22 Feb 2026 02:16 AM IST
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Surgery can be performed on a baby in the mother's womb
अपर मुख्य सचिव का अ​​भिनंदन करती हुईं डॉ. मंदाकिनी।
लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में अब मां के गर्भ में ही पल रहे शिशु की सर्जरी संभव होगी। इससे बच्चों को जन्मजात विकृतियों और गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकेगा। संस्थान के मातृत्व एवं प्रजनन स्वास्थ्य विभाग के 17वें स्थापना दिवस पर यह जानकारी दी गई।
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विभाग की अध्यक्ष प्रो. मंदाकिनी प्रधान ने बताया कि संस्थान में हर महीने 2-3 गर्भवती महिलाएं ऐसे भ्रूण के साथ आती हैं, जिनमें मस्तिष्क की कोई संरचनात्मक विकृति तो नहीं होती, लेकिन अन्य शारीरिक समस्याएं होती हैं। उन्होंने बताया कि यदि ऐसी समस्याओं का इलाज जन्म के बाद किया जाए, तो स्थायी विकलांगता या अन्य जटिलताओं का खतरा बना रहता है। ऐसे मामलों में फेटल सर्जरी यानी गर्भ के भीतर ही इलाज करना अधिक सुरक्षित और प्रभावी साबित होता है।
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लेजर तकनीक से होगा जटिल रोगों का उपचार

आने वाले एक वर्ष के भीतर संस्थान में ये सुविधाएं पूरी तरह क्रियाशील हो जाएंगी, जिनमें मुख्य रूप से दो समस्याओं का इलाज किया जाएगा। पहला पोस्टिरियर यूरेथ्रल वाल्व (पीयूवी) और दूसरा ट्विन-टू-ट्विन ट्रांसफ्यूजन सिंड्रोम (टीटीटीएस) है। पीयूवी केवल लड़कों में होने वाला जन्मजात विकार है, जिसमें मूत्रमार्ग में झिल्ली के कारण रुकावट आ जाती है। इससे बच्चे के गुर्दों और मूत्राशय में सूजन आ जाती है, जो भविष्य में किडनी फेलियर का कारण बन सकती है। इसका इलाज लेजर विधि से गर्भ के अंदर ही संभव होगा। वहीं, टीटीटीएस की समस्या उन जुड़वा बच्चों में होती है जो एक ही गर्भनाल साझा करते हैं। इसमें एक बच्चे का रक्त दूसरे में जाने लगता है, जिससे एक में खून की कमी और दूसरे के हृदय पर दबाव बढ़ जाता है। इसके उपचार के लिए भ्रूणोस्कोपिक लेजर सर्जरी शुरू की जाएगी।
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घर बैठे एप से होगी गर्भवती महिलाओं की निगरानी

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के लिए मैटरनिटी केयर एप भी लॉन्च किया गया। इस एप से महिलाओं की घर बैठे निगरानी हो सकेगी। इसमें महिला के मोबाइल में एप डाउनलोड कर दिया जाता है, जिसमें वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, थायराइड जैसी जांच रिपोर्ट अपलोड की जा सकती है। यह एप हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में ज्यादा सहायक हैं। इसमें उन्हें बार-बार अस्पताल आने की जरूरत कम होगी। इस मौके पर डेनमार्क से अन्या, एप बनाने वाली कंपनी की सीईओ खुशबू वर्मा, पीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान और अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष मौजूद रहे।
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