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Lucknow News: डीजल गाड़ियों की बढ़ी मांग, दो महीने तक की वेटिंग
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में एक महीने से डीजल गाड़ियों की मांग अचानक बढ़ गई है। एक गाड़ी पर दो महीने तक की वेटिंग चल रही है। कारोबारी बताते हैं कि एक महीने पहले तक 15 से 25 दिन की वेटिंग चल रही थी। यह हाल तब है, जब पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले डीजल गाड़ियां सवा से डेढ़ लाख रुपये तक महंगी होती हैं। इसके बावजूद इनकी मांग में वृद्धि हुई है।
पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण और उससे गाड़ियों के एवरेज पर पड़ रहे असर की खबरों से भी लोगों का रुझान डीजल गाड़ियों की ओर बढ़ा है। डीजल भी पेट्रोल के मुकाबले थोड़ा सस्ता रहता है। कारोबारी बताते हैं कि साधारण तौर पर डीजल गाड़ियों का निर्माण कम होता है। कंपनियां मांग के मुताबिक गाड़ियां बना नहीं पातीं। इससे उनके पास पर्याप्त भंडार नहीं रह पा रहा है।
डीजल मॉडलों पर लंबी वेटिंग
हजरतगंज स्थित ह्यूंडई शोरूम के महाप्रबंधक रिजवान अंसारी ने बताया कि नई गाड़ियां ई-20 पेट्रोल के हिसाब से आ रही हैं। वे भी बिक रही हैं, लेकिन डीजल गाड़ियों की मांग अधिक है। शोरूम ऑर्डर लगा रहे हैं, पर उसके मुकाबले गाड़ियां नहीं मिल पा रही हैं। क्रेटा और वेन्यु जैसे डीजल सेगमेंट के मॉडल पर दो-दो महीने तक की प्रतीक्षा चल रही है।
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30% तक बढ़ गई डिमांड
टाटा के सेल्स हेड प्रिंस कालरा बताते हैं कि पेट्रोल के मुकाबले डीजल गाड़ियों की मांग 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। सबसे ज्यादा सियेरा की मांग है, जिस पर डेढ़ महीने की वेटिंग है। नेक्सॉन और अलट्रोज की डिमांड भी बढ़ी है।
तीन महीने से ज्यादा है वेटिंग
एमजी मोटर्स के लखनऊ बिजनेस हेड आरिफ खान बताते हैं कि डीजल गाड़ी मैजेस्टर पर तीन महीने की वेटिंग चल रही है। हर महीने 10-15 गाड़ियों की बिक्री है, लेकिन डिलीवरी नहीं मिल रही।
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पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण और उससे गाड़ियों के एवरेज पर पड़ रहे असर की खबरों से भी लोगों का रुझान डीजल गाड़ियों की ओर बढ़ा है। डीजल भी पेट्रोल के मुकाबले थोड़ा सस्ता रहता है। कारोबारी बताते हैं कि साधारण तौर पर डीजल गाड़ियों का निर्माण कम होता है। कंपनियां मांग के मुताबिक गाड़ियां बना नहीं पातीं। इससे उनके पास पर्याप्त भंडार नहीं रह पा रहा है।
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डीजल मॉडलों पर लंबी वेटिंग
हजरतगंज स्थित ह्यूंडई शोरूम के महाप्रबंधक रिजवान अंसारी ने बताया कि नई गाड़ियां ई-20 पेट्रोल के हिसाब से आ रही हैं। वे भी बिक रही हैं, लेकिन डीजल गाड़ियों की मांग अधिक है। शोरूम ऑर्डर लगा रहे हैं, पर उसके मुकाबले गाड़ियां नहीं मिल पा रही हैं। क्रेटा और वेन्यु जैसे डीजल सेगमेंट के मॉडल पर दो-दो महीने तक की प्रतीक्षा चल रही है।
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30% तक बढ़ गई डिमांड
टाटा के सेल्स हेड प्रिंस कालरा बताते हैं कि पेट्रोल के मुकाबले डीजल गाड़ियों की मांग 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। सबसे ज्यादा सियेरा की मांग है, जिस पर डेढ़ महीने की वेटिंग है। नेक्सॉन और अलट्रोज की डिमांड भी बढ़ी है।
तीन महीने से ज्यादा है वेटिंग
एमजी मोटर्स के लखनऊ बिजनेस हेड आरिफ खान बताते हैं कि डीजल गाड़ी मैजेस्टर पर तीन महीने की वेटिंग चल रही है। हर महीने 10-15 गाड़ियों की बिक्री है, लेकिन डिलीवरी नहीं मिल रही।