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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Supreme Court directed to pay 2.5 lakh compensation to doctors dismissed due to absenteeism

182 डॉक्टरों की बर्खास्ती का मामला: 14 वर्ष बाद आया सुप्रीम कोर्ट का आदेश, एसीआर न मिलने पर हुई थी कार्रवाई

Sun, 15 Dec 2024 09:00 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 15 Dec 2024 09:00 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने अनुपस्थिति के कारण बर्खास्त डॉक्टरों को ढाई-ढाई लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। ये डॉक्टर वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) नहीं मिलने पर आनन-फानन में बर्खास्त किए गए थे। इसमें कुछ की वापसी हो गई थी। जबकि, करीब 15 डॉक्टरों ने अदालत की शरण ली थी।

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Supreme Court directed to pay 2.5 lakh compensation to doctors dismissed due to absenteeism
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

यूपी में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय ने वर्ष 2010 में सभी डॉक्टरों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट मंगवाई। ऑनलाइन व्यवस्था नहीं होने की वजह से उस वक्त यह रिपोर्ट हाथ से लिखकर भेजी जाती थी। विभिन्न जिलों से करीब 182 डॉक्टरों की रिपोर्ट नहीं मिली। इस आधार पर उन्हें चार से पांच साल तक अनुपस्थित दिखा दिया गया। 

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इसी आधार पर इन डॉक्टरों को बर्खास्त करने का आदेश जारी हो गया। इससे विभाग में हलचल मची। इस सूची में कई ऐसे भी डॉक्टर थे, जो महानिदेशालय में ही कार्य कर रहे थे। कुछ ऐसे डॉक्टर थे, जो प्रतिनियुक्ति पर अलग-अलग शाखाओं में जिम्मेदारी निभा रहे थे। सूची जारी होने के बाद इन डॉक्टरों ने खुद के संबंधित स्थान पर कार्य करने का सुबूत दिया। 

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ढाई-ढाई लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

यह भी बताया कि वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट का रखरखाव और उसे तैयार करने की जिम्मेदारी विभाग की है। जिन लोगों ने सुबूत दिया, उनकी बहाली कर दी गई। इस बीच डॉ. सुदर्शन कुमार सहित करीब 15 डॉक्टरों ने अदालत की शरण ली। वे हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। यहां से उन्हें ढाई-ढाई लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। हालांकि इस आदेश का इन दिनों बर्खास्त होने वाले डॉक्टरों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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नोटिस और वेतन भुगतान नहीं होने पर होती है बर्खास्तगी

प्रदेश में अब मानव संपदा पोर्टल पर सभी डॉक्टरों की रिपोर्ट मौजूद रहती है। एक स्थान से दूसरे स्थान पर तबादला नहीं होने पर संबंधित डॉक्टर का वेतन भी रुक जाता है। ऐसी में उसकी जानकारी मिल जाती है। इसी तरह कार्यभार ग्रहण करने के कुछ दिन बाद गायब होने वाले डॉक्टरों के बारे में पोर्टल के साथ ही सभी सीएमओ और अधीक्षकों से भी रिपोर्ट ली जाती है। 

संबंधित पद को रिक्त घोषित किया जाता है

लंबे समय से गायब रहने वाले डॉक्टरों को तीन नोटिस दी जाती है। नोटिस का जवाब नहीं मिलने के बाद उन्हें बर्खास्त किया जाता है। करीब दो साल में 100 से ज्यादा डॉक्टरों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्यवाही की गई है। बर्खास्तगी के बाद संबंधित पद को रिक्त घोषित किया जाता है। इस पद पर नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

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