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UP: मायावती-अखिलेश के बनते-बिगड़ते रिश्ते; आभार-धन्यवाद का नया दौर; खास रणनीति के तहत सपा अध्यक्ष उठा रहे कदम

Wed, 28 Aug 2024 11:54 AM IST
शाहरुख खान अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 28 Aug 2024 11:54 AM IST
सार

माया-अखिलेश के रिश्तों में समर्थन आभार और धन्यवाद का नया दौर चल रहा है। सपा अध्यक्ष की बसपा के वोट पर नजर है। मायावती माजरे को अच्छी तरह से भांप रही हैं।

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Support in relationship between Mayawati and Akhilesh new phase of gratitude and thanks
Mayawati and Akhilesh - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मायावती और अखिलेश यादव के रिश्तों में समर्थन, आभार और धन्यवाद का नया दौर प्रारंभ हुआ है। सपा अध्यक्ष की बसपा के वोट पर नजर है, तो बसपा सुप्रीमो भी पूरे माजरे को अच्छी तरह से भांप रही हैं। हालांकि, कुछ जानकार संबंधों के इस नए दौर के पीछे यूपी के आने वाले चुनाव का गणित भी मान रहे हैं।
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हाल ही में मांट (मथुरा) के भाजपा विधायक राजेश चौधरी ने मायावती को यूपी का सबसे अधिक भ्रष्ट मुख्यमंत्री बताया था। साथ ही कहा था कि पहली बार उन्हें सीएम बनाना भाजपा की गलती थी। इस बयान के खिलाफ अखिलेश यादव खुलकर मायावती के साथ खड़े हुए।
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मायावती ने भी इसके लिए उनका (अखिलेश यादव)आभार जताया। यह सिलसिला और आगे बढ़ा, जब मंगलवार को अखिलेश यादव ने एक्स के जरिये मायावती के उस 'आभार' के प्रति धन्यवाद जताया।
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अखिलेश लिखते हैं- सच तो ये है कि ये 'आभार' उन लोगों का है जो पिछले दो दिनों से अपने मान-सम्मान की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर अपना सक्रिय विरोध दर्शा रहे हैं। 

इस विरोध का मूल कारण है, भाजपा के एक विधायक द्वारा शोषित-वंचित समाज की एक सम्मानित भूतपूर्व महिला मुख्यमंत्री का सरेआम किया गया अपमान। हालांकि, मायावती एक ओर अखिलेश यादव का आभार व्यक्त कर रहीं थीं, तो दूसरी ओर दलितों के कोटे में कोटे पर सपा प्रमुख की चुप्पी पर सवाल भी खड़ा कर रही थीं।
 

राजनीति के जानकार मानते हैं कि बसपा का आधार वोटर पिछले लोकसभा और उससे पहले विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से निराश है। सपा को उम्मीद है कि ये वोटर उसकी ओर रुख कर सकता है। भले ही लोकसभा चुनाव में बसपा ने कोई सीट न जीती हो, पर यूपी में उसे 9 प्रतिशत से ज्यादा मत मिले थे। 

 

सपा नेतृत्व अच्छी तरह से जानता है कि मायावती को सम्मान देने पर ही यह आधार वोट उन्हें मिल सकता है। बशर्ते बसपा से हमदर्दी रखने वाले मतदाताओं को यह महसूस हो कि उनकी पार्टी का प्रत्याशी जिताऊ स्थिति में नहीं है। यही वजह है कि एक खास रणनीति के तहत अखिलेश यादव, मायावती के समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं। उपचुनाव में इसका लिटमस टेस्ट भी हो जाएगा।

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