{"_id":"629286b501644801fa1a3699","slug":"supply-of-coal-to-power-stations-of-uttar-pradesh-is-decreasing","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP Power Crisis: बिजलीघरों में कम हो रही कोयले की आपूर्ति, मानसून में संकट गहराने की आशंका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP Power Crisis: बिजलीघरों में कम हो रही कोयले की आपूर्ति, मानसून में संकट गहराने की आशंका
Sun, 29 May 2022 02:03 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: विजय पुंडीर
Updated Sun, 29 May 2022 02:03 AM IST
सार
प्रदेश के बिजलीघरों में जरूरत के मुताबिक कोयला की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जहां रोजाना 15-17 रैक कोयले की आपूर्ति होनी चाहिए, लेकिन इस समय 11-12 रैक ही पहुंच पा रहा है।
विज्ञापन
कोयला
- फोटो : pixabay
विस्तार
प्रदेश के बिजलीघरों के लिए फिर से कोयले का संकट खड़ा होने की आशंका पैदा हो गई है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम के बिजली घरों को रोजाना 15-17 रैक कोयले की आपूर्ति होनी चाहिए, लेकिन इस समय 11-12 रैक ही पहुंच पा रहा है। इसके चलते मानसून के दौरान बिजलीघरों में कोयले की भारी कमी हो सकती है, जिससे बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
विज्ञापन
प्रदेश सरकार के कोयला आयात करने से हाथ खड़े करते ही कोल इंडिया ने यूपी के बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति घटा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद कोयले की आपूर्ति में इजाफा हुआ था, लेकिन इसमें फिर कमी हो गई है। प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र के ताप बिजलीघरों में मानक के अनुसार रोजाना 17 रैक कोयले की जरूरत होती है। कम से कम 15 रैक की आपूर्ति तो जरूरी ही है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से 11-12 रैक कोयला ही पहुंच पा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बिजलीघरों में जरूरत से कम कोयला पहुंचने से बरसात के दौरान समस्या खड़ी हो सकती है।
विज्ञापन
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एनटीपीसी की उत्पादन इकाइयों के पास कोयले की उपलब्धता सबसे ज्यादा है जबकि राज्यों की उत्पादन इकाइयों को किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। यूपी को रोजाना मानक से पांच रैक कम कोयला मिल रहा है। इसके लिए पूरी तरह से ऊर्जा मंत्रालय ही जिम्मेदार है। ऊर्जा मंत्रालय को रेल मंत्रालय से समन्वय करके पर्याप्त कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करानी चाहिए।
विज्ञापन