अब सर्किल रेट से बाहर होगा सुपर एरिया
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सर्किल रेट लागू करने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। प्रस्तावित सर्किल रेट पर आपत्तियों और सुझाव के लिए खुली बैठक बुधवार को हुई। इसमें बिल्डरों के लिए फायदेमंद सुपर एरिया को सर्किल रेट से बाहर करने का मामला उठा।
इस पर एडीएम वित्त व राजस्व धनंजय शुक्ला व एआईजी रजिस्ट्रार ओपी सिंह ने सहमति जताई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सहमति बनी तो सर्किल रेट से सुपर एरिया क्षेत्र के प्रावधान को हटाया जाएगा।
आपत्ति दर्ज कराने वालों का कहना था कि प्रस्तावित सर्किल रेट में निर्माण लागत दर को अलग अलग स्तर पर दर्शाया गया है। तहसील रायल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नयन राज सिंह राठौर की ओर से इस पर सुझाव आया।
कहा गया कि यदि आवासीय फ्लैट के संबंध में जमीन और निर्माण दर को अलग-अलग न तय करते हुए एक में जोड़ देना चाहिए। ऐसा करने से बिल्डरों को छोड़ कर सभी को इसका फायदा मिलेगा।
एडीएम एफआर व एआईजी निबंधन ने कहा कि इस मामले को संयुक्त रिव्यू कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। अधिवक्ता कौशल कुमार सिंह ने एक से तीन, चार से छह और सात मंजिल से अधिक के फ्लैट्स पर सर्किल रेट की अलग-अलग दर निर्धारण को अव्यवहारिक बताते हुए इसे एक समान किए जाने की बात कही।
बिल्डरों ने कहा घटाओ, किसानों ने कहा बढ़ाओ
उनका सुझाव था कि लिफ्ट, स्वीमिंग पूल, सिक्योरिटी सिस्टम जैसी अतिरिक्त सुविधा के जुड़ने पर किराया दर में होने वाली बढ़ोतरी को भी एक समान करते हुए प्रीमियम फ्लैट्स की सर्किल रेट का निर्धारण करने में पांच में से किसी भी एक सुविधा के शामिल होने पर एक समान दर को लागू करना ही व्यावहारिक और सभी के लिए फायदेमंद रहेगा।
खुली बैठक में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे गोदावरी डवलपर व अंसल बिल्डर के प्रतिनिधियों ने यह कहते हुए आपत्ति दर्ज कराई कि शहरी सीमा से सटे ग्रामीण इलाकों की जमीनों की दरों में 20 से 25 फीसदी की एकमुश्त वृद्धि ज्यादा है।
दूसरी तरफ नगराम व नीलमथा से आए किसान अमर सिंह यादव व सोमेश कुमार का कहना था कि गांव के किसानों की जमीन का सर्किल रेट हाइवे से सटे इलाकों की जमीन के बराबर किया जाना चाहिए। तभी किसानों को इसका फायदा मिल सकेगा।
व्यावसायिक संपत्तियों का मूल्यांकन दुरुस्त हो
पीएन गुप्ता ने व्यवसायिक संपत्तियों का मूल्यांकन मासिक किराए के तीन सौ गुना के आधार पर किए जाने को अव्यवहारिक बताया। उन्होंने कहा कि इसका निर्धारण मासिक किराए में 150 से 200 गुना की वृद्धि के आधार पर किया जाना चाहिए।
अधिवक्ता मयंक मोहन मिश्रा ने निबंधन के दौरान महिला क्रेता अथवा विक्रेता से अभिलेखीय दस्तावेज में लिखवाए जाने वाले मोबाइल नंबर को दर्ज कराने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि किसी का भी मोबाइल नंबर उसकी निजी सूचना में आता है।
आपत्तियों के निस्तारण व सुझाव सुनने के बाद इन्हें समायोजित कराने के बाद नए सर्किल रेट को सघन निगरानी में तैयार कराया जाएगा। निबंधन विभाग के अधिकारियों की मानें तो इसे अंतिम तौर पर तैयार कराने में न्यून्तम दो दिन का समय लगना तय है।
इसके बाद ही नए सर्किल रेट को अंतिम तौर से लागू किए जाने के लिए जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। एडीएम वित्त व राजस्व ने संकेत दिए कि 15 दिसंबर तक हर संभव स्तर पर जिले में नया सर्किल रेट लागू हो जाएगा।