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सुना है क्या: 'तबादले पर पहरा' की कहानी, साथ ही 'रोमांचक हुई बड़ी कुर्सी की जंग व कारखास फिर सक्रिय' के किस्से

Tue, 26 May 2026 11:45 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 26 May 2026 11:45 AM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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suna hai kya Transfer Under Watch story along with Thrilling Battle for Top Seat and Reactivation of Key Aides
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'तबादले पर पहरा' की कहानी। इसके अलावा 'रोमांचक हुई बड़ी कुर्सी की जंग' और 'कारखास फिर सक्रिय' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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तबादले पर पहरा

सेहत महकमे में तबादले का सीजन चल रहा है। सेहत से जुड़े एक विभाग के आला अफसर ने तबादला सूची पर पहरा बैठा दिया। ऐसे में निदेशक ने दूसरे व्यक्ति को निगरानी के लिए लगा दिया है। इसकी भनक लगने पर विभाग के मुखिया ने चार सदस्यीय कमेटी गठित करके अपना पहरा लगा दिया है। अब देखना यह है कि इस वर्ष चल रही पहरेदारी कारगर साबित होती है या चहेतों को उपकृत करके नए विवाद को जन्म दिया जाता है।

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रोमांचक हुई बड़ी कुर्सी की जंग

प्रदेश में ट्रांसफर सीजन में तबादला एक्सप्रेस काफी तेज चल रही है। ऐसे में पढ़ाई-लिखाई वाले एक विभाग की बड़ी कुर्सी की जंग आखिरी समय में काफी रोमांचक दौर में पहुंच गई है। इसके दो प्रमुख दावेदार एकदूसरे को पटखनी देने में कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बड़े साहब के 31 को सेवानिवृत्त होने के बाद कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसके लिए प्रमुख दावेदार माननीय के यहां से लेकर शक्ति के केंद्र तक जुगाड़ बैठाने में जुटे हैं। वहीं, 200 किमी दूर बैठे एक अधिकारी को भी इसका दावेदार बताया जाने लगा है।

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कारखास फिर सक्रिय

गावों के विकास वाले महकमे में फंड मैनेजमेंट देखने वाले लेखाकार ने फिर मुख्यालय में कारखासी संभाल ली है। दरअसल, लेखाकार की तैनाती पिछले साल ही संगम नगरी में हुई थी लेकिन करीब तीन महीने तक वह मुख्यालय में जमे रहे और कारखासी करते रहे। उनके कारनामों की चर्चा हुई तो वह कुछ दिन मुख्यालय में नहीं दिखे। कुछ दिन तक पर्दे के पीछे से ही फंड मैनेजमेंट करते रहे। वह अब फिर प्रकट हो गए हैं। आए दिन मुख्यालय में दिखने लगे हैं। उन्होंने जिलों में फोन करके वसूली अभियान शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि लेखाकार पर किसी बड़े स्तर की छत्रछाया है।

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