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सुना है क्या: 'तनाव के साथ बढ़ी धुकधुकी' की कहानी, साथ ही 'काम का ओवरडोज और कब्जा तो उनका ही रहेगा' के किस्से

Mon, 08 Jun 2026 12:36 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Mon, 08 Jun 2026 12:36 PM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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suna hai kya palpitations rising with stress along with overdose of work and certainty they will retain contro
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'तनाव के साथ बढ़ी धुकधुकी' की कहानी। इसके अलावा 'काम का ओवरडोज' और 'कब्जा तो उनका ही रहेगा' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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तनाव के साथ बढ़ी धुकधुकी

सेहत सुधार वाले विभाग में एक के बाद एक यूनिट में तबादले का तनाव बढ़ता जा रहा है। कहीं एक अफसर दूसरे पर सवाल खड़े कर रहा है तो कहीं कर्मचारियों के बीच विवाद चरम पर पहुंच गया है। तबादले की शर्तों के दायरे में आने के बाद भी मौका गंवाने वालों ने मोर्चा खोल दिया है। ऐसे में फायदा पाने वाले कर्मचारियों की धुकधुकी बढ़ गई है। उन्हें डर सता रहा है कि कहीं सूची रद्द हुई तो शासन-सत्ता में किया गया खर्च बेकार हो जाएगा। ऐसे में वे विरोधियों को मनाने में जुटे हैं। भरोसा दिला रहे हैं कि जिस चैनल से उनका तबादला हुआ है, उसी से अगली बार आपका भी करा देंगे।

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काम का ओवरडोज

इन दिनों कोई काम के बोझ तले दबा जा रहा है तो किसी को वक्त काटने दौड़ रहा है। चार विभागों में इस असंतुलन के शिकार की संख्या ज्यादा है। यही वजह है कि अंदरखाने असंतोष लगातार सुलग रहा है। सुनवाई न होने से कामकाजी साहबों में खीझ जैसी स्थिति पनप रही है। हालांकि, फिलहाल किसी बदलाव के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

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कब्जा तो उनका ही रहेगा

प्रदेश की एक प्रमुख खेल एसोसिएशन में एक परिवार विशेष का कब्जा है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन के मामले में यह खेल संघ हमेशा फिसड्डी रहा। राष्ट्रीय खेलों में इस खेल से यूपी को एक भी पदक नसीब नहीं हुआ। बावजूद इसके एसोसिएशन में एक परिवार विशेष के सदस्य ही अहम पदों पर काबिज रहते हैं। बीच में कुछ ने विरोध दर्ज कराने का प्रयास किया, जो बेनतीजा रहा। आलम यह है कि विपक्षियों ने हथियार डाल दिए हैं और परिवार विशेष को एसोसिएशन का मालिक मान लिया है।

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