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सुना है क्या: 'मिस्टर क्लीन को जोर का झटका' की कहानी, साथ ही साहब को ज्ञान नहीं चाहिए व मातहत परेशान के किस्से

Sun, 18 Jan 2026 03:02 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 18 Jan 2026 03:02 PM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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suna hai kya Mr. Clean shock story including tales of bosses not wanting knowledge and troubled subordinates
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'मिस्टर क्लीन को लगा जोर का झटका' की कहानी। इसके अलावा 'साहब को ज्ञान नहीं चाहिए' और 'मुखिया से मातहत परेशान' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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मिस्टर क्लीन को लगा जोर का झटका

प्रदेश की राजधानी से सटे शहर में तैनात एक वरिष्ठ नौकरशाह गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में फंसते दिख रहे हैं। केंद्र की सैकड़ों करोड़ की योजना में चहेते ठेकेदार को लाकर काम करवाया गया और जनता के करोड़ों रुपये की हेराफेरी की शिकायत लोकायुक्त तक पहुंच गई। चर्चा यह भी है कि लोकायुक्त कार्यालय ने पूरे मामले की जांच उनके वरिष्ठ अधिकारी को सौंप दी है। बताया जा रहा है कि यह घोटाला कई सौ करोड़ का है। इस मामले की चर्चा इन दोनों ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में गरम है।

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साहब को ज्ञान नहीं चाहिए

प्रदेश के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में बहुप्रतीक्षित मुखिया की तैनाती हो चुकी है। साहब ने आने के साथ ही गुलदस्तों से दूरी तो बनाई ही, दूसरे दिन से समीक्षा बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। पहली बैठक थी तो बड़े-बड़े ज्ञान देने वाले गुरुजी कहां पीछे रहने वाले थे। हालांकि एक-एक कर मुखिया ने न सिर्फ सबके सुझाव लिए बल्कि बड़े प्रेम से संदेश भी दिया कि साहब को ज्ञान नहीं चाहिए। वह काम करने वाले को ही प्राथमिकता देंगे। बैठक समाप्त होने पर जब सभी बाहर निकले तो किसी ने पूछा कि बैठक का सार बताइए तो जवाब मिला, साहब को ज्ञान नहीं चाहिए।

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मुखिया से मातहत परेशान

फल-फूल वाले विभाग के कर्मचारी अपने मुखिया से परेशान हैं। उनके मुखिया काम कम बताते हैं और डांटते ज्यादा हैं। उनकी यह डांट अब अधिकारियों व कर्मचारियों से बर्दाश्त नहीं हो रही है। लिहाजा उनके विभाग के अधिकारी अब मुखिया के डांट की कहानी सार्वजनिक रूप से बताने लगे हैं। तीन दिन पहले मुखिया के आका के यहां बैठक थी जिसमें खेती-बाड़ी से जुड़े सभी विभाग के अधिकारी जुटे थे। फिर क्या था फल-फूल वाले विभाग के अफसरों ने अपने मुखिया की खूबियां बतानी शुरू कर दीं। यह सुन अन्य विभागों के अधिकारी भगवान से प्रार्थना करने लगे कि भविष्य में यह मुखिया उनके विभाग में न आएं।

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