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सुना है क्या: आज 'अंधा बांटे रेवड़ी' की कहानी, साथ ही वास्तु दोष में लाखों खर्च और साहब बड़े सीधे थे के किस्से

Tue, 06 Jan 2026 02:49 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Tue, 06 Jan 2026 02:49 PM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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suna hai kya blind man distributing sweets story also with spending lakhs on Vaastu and officers simple man
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में अंधा बांटे रेवड़ी, अपनों-अपनों को दे की कहानी। इसके अलावा 'वास्तु दोष में खर्च हो गए लाखों' और 'साहब, हमारे बड़े सीधे थे' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी... 

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अंधा बांटे रेवड़ी, अपनों-अपनों को दे

कल कारखानों वाले एक महकमे में इन दिनों छोटे-छोटे टेंडर पर बड़ों-बड़ों की नजर है। चुनावी सीजन में कोई अफसर या माननीय इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहता। हाल ये है कि कट के चक्कर में एक काम के टेंडर कई बार निकाले जा रहे हैं। शिकायत होती है और टेंडर निरस्त हो जाते हैं। फिर नए सिरे से मोलभाव होता है। इस रस्साकसी का नतीजा ये है कि इस वित्त वर्ष की तो छोड़ ही दें, पिछले साल की खरीद भी पूरी नहीं हो पा रही। पता नहीं ऐसा क्या है कि सभी टेंडर विदर्भ को ही जा रहे हैं।

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वास्तु दोष में खर्च हो गए लाखों

सेहत महकमे से जुड़ी एक यूनिट ने वास्तुदोष ठीक कराने में लाखों रुपये खर्च कर डाले। यूनिट के मुखिया ने करीब 40 लाख रुपये खर्च कर अपना सिंहासन तैयार कराया। काम पूरा होते ही उनका तबादला हो गया। नए मुखिया आए तो उन्हें यहां नकारात्मक ऊर्जा महसूस हुई। पंडितजी बुलाए गए। उन्होंने वास्तुदोष बता दिया। फिर क्या था, वास्तुदोष दूर करने के लिए अगली मंजिल पर उतनी ही रकम से नया सिंहासन बना। जहां वास्तुदोष था, वहां की जगह छोटे कर्मचारियों को दे दी गई। इसके बाद भी इस यूनिट में सकारात्मक ऊर्जा नहीं दिख रही है। लाखों खर्च के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।

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साहब, हमारे बड़े सीधे थे

प्रदेश में एक प्रमुख व पुराने राज्य विश्वविद्यालय में हाल में कुलपति को लेकर काफी चर्चे थे। उनके दावों, वादों के साथ-साथ उनके किए कामों को लेकर भी मातहत चटखारे लेकर चर्चा कर रहे थे। हाल में साहब के दावों के उलट विश्वविद्यालय को नया मुखिया मिल चुका है लेकिन पुराने साहब अभी भी चर्चा में हैं। विश्वविद्यालय के गुरु जी जहां भी एकत्र हो रहे हैं, साहब के एक-एक काम को याद कर चटखारे ले रहे हैं कि साहब तो हमारे बड़े सीधे थे। हालांकि, इस तंज में कई सवाल छिपे हैं।

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