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Lucknow News: कथित वकीलों पर 2010 से अब तक दर्ज केसों की रिपोर्ट तलब
Fri, 08 Dec 2023 01:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 08 Dec 2023 01:48 AM IST
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लखनऊ। काले कोट में कोर्ट परिसर के बाहर अराजकता करने वाले कथित वकीलों पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ की सख्ती जारी है। हाईकोर्ट ने वर्ष 2010 में कुछ वकीलों की गुंडई के आरोप के मामले से लेकर अब तक जमीन हथियाने में भूमाफिया की मदद करने आदि आरोपों वाले सभी मामलों की तफ्तीश या ट्रायल की मौजूदा स्थिति का ब्योरा पुलिस कमिश्नर से तलब किया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस कमिश्नर लखनऊ यह सुनिश्चित करें कि ऐसे सभी केसों के विवरण के हलफनामे, जिम्मेदार डीसीपी स्तर के अफसर के जरिए अगली तिथि दो जनवरी तक पेश हों। इससे पहले पुलिस कमिश्नर एसबी शिरडकर बीते दो दिसंबर को हाईकोर्ट में पेश हुए और वांछित जानकारी दी। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर वह अगली तिथि तक यह हलफनामे दाखिल कर दें तो उन्हें अगली सुनवाई पर पेश नहीं होना होगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में सहयोग के लिए किसी जिम्मेदार अफसर को भेजे सकते हैं। यह आदेश जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने मामले में दाखिल 11 याचिकाओं पर दिया। इनमें वकील की ड्रेस पहनकर कोर्ट परिसर के बाहर अराजकता करने वाले कथित वकीलों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया है। इनमें अधिकांश मामलों में आरोप हैं कि जिला न्यायालय लखनऊ के कुछ अधिवक्ता, वकील की ड्रेस में जमीन हथियाने में भूमाफियाओं का सहयोग करते हैं। विरोध करने पर मारपीट भी करते हैं। हाल के ऐसे ही एक मामले में जिला जज लखनऊ द्वारा भेजी गई रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने उसे रिकार्ड पर रखवा दिया है।
वर्ष 2010 में हाईकोर्ट ने प्रशांत सिंह गौर की याचिका पर इस मामले का स्वयं संज्ञान लेकर सीबीआई को ऐसे वकीलों की जांच एसआईटी के जरिए करने का आदेश दिया था। साथ ही आयकर आयुक्त लखनऊ को भी प्रकरण में जांच के आदेश दिए थे। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार समेत बार कौंसिल ऑफ इंडिया को नियम बनाने पर गौर करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिया था कि जमीन या संपत्ति का कारोबार करने वाले प्रॉपर्टी डीलरों को पंजीकृत करने पर विचार करें। इस आदेश के बाद हुई कार्रवाई से जिला न्यायालय लखनऊ परिसर से वकीलों के भेष में गुंडई करने वाले अराजक तत्वों का लगभग सफाया हो गया था। इधर हाल में फिर अराजकता के ऐसे मामले लगातार कोर्ट के समक्ष आने लगे। इसे लेकर अनिल कुमार तिवारी ने 2018 में और दिनेश प्रताप सिंह ने 2022 में याचिका दाखिल की। इसी साल पूनम सिंह व दो अन्य, शुभांशु सिंह, शारदा शंकर रस्तोगी, अनिल कुमार खन्ना समेत कई अन्य याचियों ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर मामले में कड़ी कार्रवाई का आग्रह किया। अब न्यायालय इन सभी मामलों को एकसाथ संबद्ध कर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने यूपी बार कौंसिल से 2010 से 2023 तक ऐसे वकीलों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही का ब्योरा हालफनामे पर तलब किया था, जो पेश किया गया। मामले की अगली सुनवाई दो जनवरी को होगी।
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि प्रॉपर्टी डीलिंग करने वाले वकीलों पर कार्यवाही की जाए। कोर्ट ने कहा कि कुछ मामलों में वकीलों के भेष में जमीनों पर कब्जे समेत संपत्तियों के लिए धमकी देने वाले प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ शिकायतें हैं। ऐसे में सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करे। साथ ही आयकर विभाग को भी आदेश दिया कि ऐसे प्रॉपर्टी डीलर वकीलों के संबंध में रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने मामले में वकीलों की शीर्ष संस्था बार कौंसिल ऑफ इंडिया को भी पक्षकार बनाने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पहले ऐसे कुछ मामलों की जांच सीबीआई, सीबीसीआईडी समेत एसटीएफ को सौंपी गई थी। कोर्ट ने इन एजेंसियों समेत जनपद न्यायाधीश लखनऊ और पुलिस से इन मामलों की स्टेट्स रिपोर्ट तलब की है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस कमिश्नर लखनऊ यह सुनिश्चित करें कि ऐसे सभी केसों के विवरण के हलफनामे, जिम्मेदार डीसीपी स्तर के अफसर के जरिए अगली तिथि दो जनवरी तक पेश हों। इससे पहले पुलिस कमिश्नर एसबी शिरडकर बीते दो दिसंबर को हाईकोर्ट में पेश हुए और वांछित जानकारी दी। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर वह अगली तिथि तक यह हलफनामे दाखिल कर दें तो उन्हें अगली सुनवाई पर पेश नहीं होना होगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में सहयोग के लिए किसी जिम्मेदार अफसर को भेजे सकते हैं। यह आदेश जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने मामले में दाखिल 11 याचिकाओं पर दिया। इनमें वकील की ड्रेस पहनकर कोर्ट परिसर के बाहर अराजकता करने वाले कथित वकीलों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया है। इनमें अधिकांश मामलों में आरोप हैं कि जिला न्यायालय लखनऊ के कुछ अधिवक्ता, वकील की ड्रेस में जमीन हथियाने में भूमाफियाओं का सहयोग करते हैं। विरोध करने पर मारपीट भी करते हैं। हाल के ऐसे ही एक मामले में जिला जज लखनऊ द्वारा भेजी गई रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने उसे रिकार्ड पर रखवा दिया है।
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वर्ष 2010 में हाईकोर्ट ने प्रशांत सिंह गौर की याचिका पर इस मामले का स्वयं संज्ञान लेकर सीबीआई को ऐसे वकीलों की जांच एसआईटी के जरिए करने का आदेश दिया था। साथ ही आयकर आयुक्त लखनऊ को भी प्रकरण में जांच के आदेश दिए थे। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार समेत बार कौंसिल ऑफ इंडिया को नियम बनाने पर गौर करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिया था कि जमीन या संपत्ति का कारोबार करने वाले प्रॉपर्टी डीलरों को पंजीकृत करने पर विचार करें। इस आदेश के बाद हुई कार्रवाई से जिला न्यायालय लखनऊ परिसर से वकीलों के भेष में गुंडई करने वाले अराजक तत्वों का लगभग सफाया हो गया था। इधर हाल में फिर अराजकता के ऐसे मामले लगातार कोर्ट के समक्ष आने लगे। इसे लेकर अनिल कुमार तिवारी ने 2018 में और दिनेश प्रताप सिंह ने 2022 में याचिका दाखिल की। इसी साल पूनम सिंह व दो अन्य, शुभांशु सिंह, शारदा शंकर रस्तोगी, अनिल कुमार खन्ना समेत कई अन्य याचियों ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर मामले में कड़ी कार्रवाई का आग्रह किया। अब न्यायालय इन सभी मामलों को एकसाथ संबद्ध कर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने यूपी बार कौंसिल से 2010 से 2023 तक ऐसे वकीलों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही का ब्योरा हालफनामे पर तलब किया था, जो पेश किया गया। मामले की अगली सुनवाई दो जनवरी को होगी।
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि प्रॉपर्टी डीलिंग करने वाले वकीलों पर कार्यवाही की जाए। कोर्ट ने कहा कि कुछ मामलों में वकीलों के भेष में जमीनों पर कब्जे समेत संपत्तियों के लिए धमकी देने वाले प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ शिकायतें हैं। ऐसे में सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करे। साथ ही आयकर विभाग को भी आदेश दिया कि ऐसे प्रॉपर्टी डीलर वकीलों के संबंध में रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने मामले में वकीलों की शीर्ष संस्था बार कौंसिल ऑफ इंडिया को भी पक्षकार बनाने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पहले ऐसे कुछ मामलों की जांच सीबीआई, सीबीसीआईडी समेत एसटीएफ को सौंपी गई थी। कोर्ट ने इन एजेंसियों समेत जनपद न्यायाधीश लखनऊ और पुलिस से इन मामलों की स्टेट्स रिपोर्ट तलब की है।