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शुगर कॉन-2022 : वैज्ञानिकों ने समझाया गन्ने का महत्व, शोध को बढ़ावा देने का आह्वान

Mon, 17 Oct 2022 01:21 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 17 Oct 2022 01:21 AM IST
सार

डॉ. आरके सिंह ने कहा कि दुनिया में गन्ने की सिर्फ 10 किस्मों की 50 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल में खेती होती है। उन्होंने अन्य प्रजातियों के विकास व उनकी खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

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Sugar Con-2022: Scientists explained the importance of sugarcane, called for promotion of research
गन्ना

विस्तार

तीन साल बाद शुरू हुए शुगर कॉन 2022 में शोध को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी को गन्ने की नई किस्मों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि गन्ना दुनिया में आर्थिक विकास की पहचान है। कहा, भारत को आत्मनिर्भर बनाने में गन्ने की फसल का विशेष महत्व है।

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विश्व खाद्य दिवस पर रविवार को भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ में ‘चीनी और एकीकृत उद्योगों की स्थिरता, मुद्दे और पहल’ विषयक सातवें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। बतौर मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के उप महानिदेशक डॉ. तिलक राज शर्मा ने वैज्ञानिकों से गन्ने की जलवायु, पोषक तत्व एवं कम जल लेने वाली किस्मों के विकास, गुणवत्ता पूर्ण चीनी, गुड़, शीरा, एथेनॉल व अन्य मूल्य संवर्धित उत्पादों के विकास का आह्वान किया। 
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इसी संस्थान के सहायक महानिदेशक डॉ. आरके सिंह ने कहा कि दुनिया में गन्ने की सिर्फ 10 किस्मों की 50 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल में खेती होती है। उन्होंने अन्य प्रजातियों के विकास व उनकी खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कानुपर के निदेशक डा. नरेंद्र मोहन ने चीनी उद्योग में हो रहे परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। दीन दयाल उपाध्याय विवि गोरखपुर के कुलपति डॉ. राजेश सिंह ने शोध संस्थानों से विद्यार्थियों को नवीनतम शोध से परिचित कराने का आह्वान किया। आईआईएसआर के निदेशक डॉ. अश्विनी दत्त पाठक, पूर्व कुलपति डॉ. सुशील सोलोमन ने थीम पर प्रकाश डाला। आयोजन सचिव, डॉ. एके शाह ने अगले सत्रों की जानकारी दी। सम्मेलन में प्रोफेसर विराट (थाईलैंड), निर्मल कुमार सिंह चेयरमैन शुगर सर्च इंस्टीट्यूट (श्रीलंका) और प्रकृति सुकैया (थाईलैंड) मुख्य रूप से शामिल हुए।
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गन्ने को ऊर्जा फसल बनाने का आह्वान
चीन के प्रो. यंग पी. लुई ने सम्मेलन से वर्चुअल जुड़ते हुए सभी से वर्ष 2024 में वियतनाम में होने जा रहे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने की अपील की। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. जीपी राव ने गन्ने की फसल को शर्करा फसल से ऊर्जा फसल बनाने तथा चुकंदर, मक्का, धान व मीठी ज्वार आदि से भी एथेनॉल बनाने पर जोर दिया। उन्होंने देश में पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल के मिश्रणके सरकार के लक्ष्य को साकार करने में चीनी उद्योग की भूमिका समझाई। 


सम्मानित हुए वैज्ञानिक   
सम्मेलन में वैज्ञानिकों डॉ. अश्विनी दत्त पाठक, डॉ. जी. हेमप्रभा, डॉ. एससी देशमुख, डॉ. आर विश्वनाथन, डॉ. एसएन सिंह, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. रमेश जी हापसे, डॉ. राकेश लक्ष्मण, डॉ. डीपी सिंह, डॉ. रमेश सुंदर, डॉ. एके शाह, डॉ. एम. स्वप्ना, डॉ. एसपी सिंह  तथा डॉ. प्रियंका सिंह को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। सम्मेलन में स्मारिका, शुगरटेक के नवीनतम अंक व भारत में चुकंदर के उत्पादन पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया। एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है।

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