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केजीएमयू में सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट : कोरोना काल से बंद चल रहा था, पीएम-सीएम केयर फंड से मुफ्त में होगा
Mon, 31 Oct 2022 07:36 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 31 Oct 2022 07:36 PM IST
सार
डॉ. एके त्रिपाठी ने बताया कि चार मरीजों का सफल बोनमैरो प्रत्यारोपण किया जा रहा है। ऑटोलॉगस तकनीक से प्रत्यारोपण किया गया है। इसमें मरीज का बोनमैरो ही उसमें प्रत्यारोपित किया जाता है।
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केजीएमयू
- फोटो : amar ujala
विस्तार
केजीएमयू में कोरोना काल से बंद चल रहा बोन मैरो ट्रांसप्लांट फिर से शुरू हो गया है। इससे रक्त कैंसर से ग्रस्त मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए निजी या दूसरे राज्य की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। संस्थान में इसकी सुविधा फिर से मरीजों को मिलने लगी है। संस्थान में करीब एक माह पहले यह प्रत्यारोपण किया गया था।
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लखनऊ के ग्रामीण इलाके की रहने वाली 32 साल की महिला ने हीमैटोलाजी विभाग की ओपीडी में दिखाया। जांच पड़ताल बाद उसे रक्त कैंसर की पुष्टि हुई। कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने बताया कि रक्त कैंसर से पीड़ित मरीजों का बोनमैरो प्रत्यारोपण का फैसला किया। इससे मरीजों में कैंसर से जंग में नई आस जगी है। हीमैटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एके त्रिपाठी ने बताया कि चार मरीजों का सफल बोनमैरो प्रत्यारोपण किया जा रहा है। ऑटोलॉगस तकनीक से प्रत्यारोपण किया गया है। इसमें मरीज का बोनमैरो ही उसमें प्रत्यारोपित किया जाता है। इससे रिजेक्शन की आशंका बेहद कम रहती है। चारों प्रत्यारोपण के बाद मरीज अब स्वस्थ्य हैं। हालांकि यह मरीज तय समय पर बुलाकर इनकी जांचें कराई जा रही हैं।
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प्रत्यारोपण के यह रहे असली हीरो
प्रत्यारोपण टीम में विभाग में हीमैटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ.एके त्रिपाठी, डॉ. एसपी वर्मा, डॉ. स्वस्ती सिन्हा, पैथोलॉजी विभाग की डॉ. गीता यादव, ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा, रेडियोथेरेपी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एमएलबी भट्ट शामिल हैं।
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प्रत्यारोपण बाद तीन हफ्ते मरीज के लिए अहम
केजीएमयू हीमैटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एके त्रिपाठ ने बताया प्रत्यारोपण बाद मरीज केलिए तीन हफ्ते से लेकर एक माह बेहद अहत रहते हैं। प्रत्यारोपण बाद मरीज को अलग आईसीयू में रखा जाता है। मरीज की निगरानी के लिए कुशल स्टॉफ को तैनात किया जाता है। मरीज को संक्रमण बचाना चुनौती भरा रहता है।
पीएम-सीएम फंड से मुफ्त में प्रत्यारोपण की तैयारी
केजीएमयू प्रशासन का कहना है अभी तक मरीजों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने में पर करीब ढाई लाख का खर्च आता है। जबकि निजी सेंटर में यह कराने पर करीब दस लाख रुपए मरीजों के खर्च होते हैं। गरीब मरीजों को राहत देने के लिए संस्थान पीएम-सीएम फंड से मरीजों का मुफ्त बोन मैरो ट्रांसप्लांट करेगा ताकि असाध्य रोग से जूझ रहे मरीजों को राहत मिल सके।