{"_id":"6a5bea1751fc724a58002cdf","slug":"sub-inspector-ajay-was-planning-to-go-to-hapur-to-bring-back-his-wife-and-children-lucknow-news-c-13-lko1070-1834585-2026-07-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: पत्नी और बच्चों को लेने हापुड़ जाने वाले थे दरोगा अजय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: पत्नी और बच्चों को लेने हापुड़ जाने वाले थे दरोगा अजय
Sun, 19 Jul 2026 02:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 19 Jul 2026 02:33 AM IST
विज्ञापन
दुबग्गा। गाजीपुर के सर्वोदयनगर चौकी पर तैनात दरोगा अजय की मौत का कारण पोस्टमार्टम में स्पष्ट नहीं हो सका। डॉक्टरों ने हार्ट और विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा है। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
इंस्पेक्टर पारा सुरेश सिंह ने बताया कि दरोगा अजय के भाई विजय और ससुर नरेंद्र सिंह ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। परिजनों के मुताबिक, अजय की पत्नी कोमल 12 दिन पहले दोनों बेटों के साथ हापुड़ गई थीं। बृहस्पतिवार को अजय ने पत्नी को तबीयत खराब होने की जानकारी दी थी। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। सूचना पर पुलिसकर्मियों ने भी लगातार संपर्क करने का प्रयास किया। मोबाइल की बैटरी खत्म होने के बाद अंतिम लोकेशन पारा इलाके में मिली थी। शुक्रवार को उनका शव पारा क्षेत्र में कार के अंदर मिला था। भाई विजय ने बताया कि अजय रविवार को पत्नी और बच्चों को लेने हापुड़ जाने वाले थे। इसके बाद उनसे मिलने इंद्रगढ़ी आने वाले थी। लेकिन अब उन्हें छोटे भाई के शव को कंधा देना पड़ा।
विज्ञापन
इंस्पेक्टर पारा सुरेश सिंह ने बताया कि दरोगा अजय के भाई विजय और ससुर नरेंद्र सिंह ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। परिजनों के मुताबिक, अजय की पत्नी कोमल 12 दिन पहले दोनों बेटों के साथ हापुड़ गई थीं। बृहस्पतिवार को अजय ने पत्नी को तबीयत खराब होने की जानकारी दी थी। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। सूचना पर पुलिसकर्मियों ने भी लगातार संपर्क करने का प्रयास किया। मोबाइल की बैटरी खत्म होने के बाद अंतिम लोकेशन पारा इलाके में मिली थी। शुक्रवार को उनका शव पारा क्षेत्र में कार के अंदर मिला था। भाई विजय ने बताया कि अजय रविवार को पत्नी और बच्चों को लेने हापुड़ जाने वाले थे। इसके बाद उनसे मिलने इंद्रगढ़ी आने वाले थी। लेकिन अब उन्हें छोटे भाई के शव को कंधा देना पड़ा।
विज्ञापन